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17 अक्टूबर 2026

आगरा की यमुना हमारी जिम्मेदारी, हर नागरिक की भागीदारी

 

आगरा और यमुना का रिश्ता सदियों पुराना है। लेकिन आज नदी की हालत देखकर मन में एक सवाल उठता है,जिस यमुना ने हमारे शहर की पहचान को आकार दिया, क्या हम उसे आने वाली पीढ़ियों के लिए बचा पाएँगे?

यमुना में प्रदूषण की समस्या सिर्फ सरकार या प्रशासन की नहीं, बल्कि पूरे समाज की चिंता होनी चाहिए। हालाँकि, नदी को साफ रखने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी उन व्यवस्थाओं की भी है, जो गंदे पानी का उपचार करने और प्रदूषण रोकने के लिए बनाई गई हैं।

एक नागरिक के तौर पर हम भी अपनी भूमिका निभा सकते हैं। नदी में कचरा या पूजा सामग्री न डालना, प्लास्टिक का इस्तेमाल कम करना और दूसरों को जागरूक करना छोटे कदम हैं, लेकिन जरूरी हैं।

साथ ही, जहाँ नालों का गंदा पानी यमुना में गिरता दिखाई दे, वहाँ संबंधित विभाग तक शिकायत पहुँचानी चाहिए। प्रशासन से यह सवाल भी पूछना चाहिए कि सीवेज का उपचार और नदी की सफाई के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।

आगरा के युवा, सामाजिक संगठन और स्थानीय निवासी मिलकर यमुना संरक्षण के लिए जागरूकता अभियान चला सकते हैं। लेकिन यह प्रयास केवल किसी खास दिन तक सीमित नहीं रहने चाहिए। नदी को बचाने के लिए लगातार भागीदारी और प्रशासन की जवाबदेही, दोनों जरूरी हैं।

यमुना की चिंता करना अच्छी बात है, लेकिन चिंता को जिम्मेदारी में बदलना उससे भी ज्यादा जरूरी है। हमें यह नहीं मानना चाहिए कि हमारे अकेले के प्रयास से कुछ नहीं होगा। बदलाव तभी आता है, जब लोग अपनी भूमिका निभाते हैं और व्यवस्था से सही काम की माँग करते हैं।

यमुना को बचाना सिर्फ एक नारा नहीं, हमारी साझा जिम्मेदारी है। आज हम जो कदम उठाएँगे, वही तय करेंगे कि आने वाली पीढ़ियों को कैसी नदी मिलेगी।

20 सितंबर 2026

आगरा की स्वच्छता के लिए नई उम्मीद : तीन ब्रांड एंबेसडर क्या बदल सकते हैं?

 

आगरा नगर निगम ने स्वच्छता के लिए नितिन जोहरी, वंदना और आर. पी. सक्सेना को ब्रांड एंबेसडर बनाया है। तीनों को मेरी तरफ से बहुत-बहुत शुभकामनाएं। उम्मीद है कि वे इस नई जिम्मेदारी को केवल एक औपचारिक पद के रूप में नहीं, बल्कि आगरा के लिए कुछ अच्छा करने के एक अवसर के रूप में लेंगे।

मेरे लिए यह इसलिए भी अच्छी खबर है क्योंकि आगरा जैसा शहर स्वच्छता के मामले में थोड़ा और ध्यान मांगता है। आगरा सिर्फ ताजमहल का शहर नहीं है। यह हमारा घर है, हमारी रोजमर्रा की जिंदगी है और हर दिन यहां रहने वाले लाखों लोगों की अपनी जगह है। हर साल देश-विदेश से आने वाले पर्यटक भी इसी शहर को देखते हैं। इसलिए आगरा साफ और सुंदर हो, यह केवल पर्यटन की जरूरत नहीं, बल्कि यहां रहने वाले हर व्यक्ति की जरूरत है।

लेकिन यहां एक बात बहुत जरूरी है। शहर को साफ रखने की जिम्मेदारी सिर्फ नगर निगम या सफाई कर्मचारियों की नहीं हो सकती। नगर निगम को अपनी व्यवस्था बेहतर करनी ही चाहिए और सफाई कर्मचारियों की मेहनत का सम्मान भी होना चाहिए, लेकिन जब तक हम नागरिक अपनी आदतों पर ध्यान नहीं देंगे, तब तक पूरी तस्वीर बदलना मुश्किल है।

स्वच्छता की शुरुआत हमारी अपनी आदतों से होनी चाहिए

हम अक्सर सड़क पर कूड़ा देखकर कहते हैं कि नगर निगम को सफाई करनी चाहिए। यह बात अपनी जगह सही है। कूड़ा उठना चाहिए, सफाई व्यवस्था ठीक होनी चाहिए और सार्वजनिक स्थानों की देखभाल होनी चाहिए। लेकिन कभी-कभी हमें खुद से भी पूछना चाहिए कि सड़क पर पड़ा वह कूड़ा आया कहां से?

अगर कोई सफाई कर्मचारी सुबह किसी जगह की सफाई करके जाता है और कुछ घंटे बाद उसी जगह फिर कचरा दिखाई देने लगे, तो समस्या केवल

12 सितंबर 2026

क्या आगरा ताजमहल की पहचान से आगे बढ़कर तकनीकी शहर बन सकता है ?

आगरा का नाम लेते ही सबसे पहले ताजमहल याद आता है। सफेद संगमरमर की यह ऐतिहासिक इमारत सदियों से शहर की पहचान बनी हुई है और दुनिया के कोने-कोने से लोगों को आगरा तक खींच लाती है। लेकिन समय बदल रहा है। आज किसी शहर की पहचान केवल उसके इतिहास और इमारतों से नहीं, बल्कि वहां के युवाओं, रोजगार और भविष्य की संभावनाओं से भी तय होती है। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या आगरा अपनी ऐतिहासिक पहचान के साथ एक नई तकनीकी पहचान भी बना सकता है?

आगरा के युवाओं के लिए नए अवसर क्यों जरूरी हैं?

आगरा में प्रतिभा की कमी नहीं है। हर साल बड़ी संख्या में युवा शिक्षा पूरी करते हैं, लेकिन बेहतर रोजगार की तलाश में उन्हें नोएडा, गुरुग्राम, दिल्ली और देश के दूसरे बड़े शहरों का रुख करना पड़ता है। यह केवल युवाओं के लिए चुनौती नहीं है, बल्कि शहर के लिए भी एक अवसर के खोने जैसा है। यदि शिक्षा, प्रशिक्षण और तकनीकी क्षेत्र के लिए जरूरी सुविधाएं आगरा में विकसित हों, तो यही युवा शहर की अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे सकते हैं।

आज तकनीक ने काम की दुनिया को पहले से कहीं अधिक बदल दिया है। कई ऐसे काम हैं जिन्हें किसी बड़े महानगर में रहकर ही करना जरूरी नहीं है। यदि आगरा में अच्छी संचार व्यवस्था, आधुनिक कार्यस्थल और आवश्यक प्रशिक्षण उपलब्ध हो, तो यहां के युवा अपने शहर में रहकर देश और दुनिया के लिए काम कर सकते हैं।

पर्यटन और तकनीक साथ-साथ चल सकते हैं

आगरा के लिए सबसे अच्छी बात यह है कि उसे अपनी पहचान बदलने की जरूरत नहीं है। ताजमहल और पर्यटन उसकी ताकत हैं, और तकनीक उस ताकत को और बड़ा बना सकती है। पर्यटकों के लिए बेहतर डिजिटल सुविधाएं, स्थानीय व्यापार के लिए नए बाजार

15 अगस्त 2026

आगरा: बदलाव भी चाहिए और बदलाव से परहेज़ भी

 

आगरा दुनिया के नक्शे पर अपनी अलग पहचान रखने वाला शहर है। ताजमहल के कारण इसे देखने हर साल देश-विदेश से लोग आते हैं। लेकिन आगरा की पहचान केवल ताजमहल तक सीमित नहीं है। यह इतिहास, संस्कृति, व्यापार, शिक्षा और पर्यटन का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। ऐसे में स्वाभाविक है कि आगरा के लोग भी अपने शहर को आधुनिक, सुविधाजनक और व्यवस्थित देखना चाहते हैं।

अक्सर बातचीत में सुनने को मिलता है—“आगरा को भी दिल्ली, जयपुर, लखनऊ या दूसरे बड़े शहरों जैसा होना चाहिए।” बेहतर सड़कें हों, यातायात व्यवस्थित हो, नए बाजार और मनोरंजन के साधन हों, साफ-सफाई हो और शहर में रोजगार व निवेश के नए अवसर आएँ।

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लेकिन सवाल यह है कि जब बदलाव वास्तव में शुरू होता है, तो हम उसका स्वागत कितनी आसानी से करते हैं?

यही आगरा की एक दिलचस्प विडंबना है। हम चाहते हैं कि सड़कें चौड़ी हों, लेकिन सड़क चौड़ी करने के लिए अगर किसी दुकान या अतिक्रमण को हटाना पड़े तो विरोध शुरू हो जाता है। हम चाहते हैं कि ट्रैफिक कम हो, लेकिन पार्किंग या यातायात के नियम सख्त हों तो परेशानी होती है। हम चाहते हैं कि शहर साफ-सुथरा दिखे, लेकिन अपनी जिम्मेदारी निभाने की बात आती है तो अक्सर सरकार को ही दोष देते हैं।

यानी हमारी अपेक्षा है कि शहर बदले, लेकिन हमारी रोजमर्रा की आदतों और सुविधाओं में बहुत ज्यादा बदलाव न आए।

किसी भी शहर में परिवर्तन आसान नहीं होता। नई सड़क, मेट्रो, फ्लाईओवर, पार्किंग व्यवस्था या किसी बाजार का पुनर्विकास—इन सबका असर लोगों की रोजमर्रा

28 मार्च 2026

बारह साल बेमिसाल: आगरा को स्वच्छ बनाने की मिसाल बनी इंडिया राइजिंग सोसायटी

 

आगरा, 29 मार्च 2026 (रविवार) — ताजनगरी आगरा में स्वच्छता, जागरूकता और सौंदर्यीकरण के क्षेत्र में निरंतर कार्य कर रही इंडिया राइजिंग सोसायटी ने आज अपने 12 वर्षों के प्रेरणादायक सफर को एक और महत्वपूर्ण पड़ाव के साथ चिह्नित किया। सोसायटी द्वारा आयोजित यह 633वां लगातार अभियान न केवल उनकी प्रतिबद्धता का प्रमाण है, बल्कि समाज के प्रति उनके अटूट समर्पण को भी दर्शाता है।

प्रातः 7 से 9 बजे तक संजय प्लेस स्थित आगरा राइजिंग पार्क (शहीद स्मारक के सामने) में आयोजित इस विशेष अभियान में बड़ी संख्या में स्वयंसेवकों, स्थानीय नागरिकों और जागरूक युवाओं ने भाग लिया। झाड़ू, रंग और सकारात्मक सोच के साथ टीम ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि बदलाव की शुरुआत खुद से होती है।

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इस अभियान की खास बात यह रही कि यह सोसायटी के स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया, जिसमें स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए सामूहिक शपथ कार्यक्रम भी रखा गया। इसमें उपस्थित लोगों ने न केवल अपने आसपास सफाई बनाए रखने का संकल्प लिया, बल्कि दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करने का वचन दिया।

पिछले 12 वर्षों में इंडिया राइजिंग सोसायटी ने बिना रुके, बिना थके, हर रविवार स्वच्छता अभियान चलाकर एक नई मिसाल कायम की है। 633 लगातार अभियानों का यह सफर केवल

28 फ़रवरी 2026

गोल्डन ट्राएंगल यात्रा आज भी भारत की पहली पसंद

 

गोल्डन ट्राएंगल पर्यटन मार्ग, जो दिल्ली, आगरा और जयपुर को जोड़ता है, दशकों से विदेशी और भारतीय यात्रियों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा है। यह यात्रा मार्ग 1960 के दशक में विकसित हुआ था, जब भारत ने अंतरराष्ट्रीय पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए प्रमुख शहरों को जोड़ने का निर्णय लिया। तब से यह मार्ग भारत की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर का प्रतीक बन गया है और अब तक लाखों यात्रियों को अपनी ओर आकर्षित करता रहा है।

इस मार्ग की खासियत यह है कि यह यात्रियों को भारत के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और वास्तुकला के अनमोल अनुभव प्रदान करता है। यात्रा के दौरान पर्यटक ताजमहल, कुतुब मीनार, लाल किला, हवा महल, आमेर किला और सिटी पैलेस जैसी विश्वप्रसिद्ध जगहों को देख सकते हैं। प्रत्येक शहर की अपनी अनोखी संस्कृति, रंग-बिरंगी परंपराएं और शिल्पकला यात्रियों को मंत्रमुग्ध कर देती हैं।

गोल्डन ट्राएंगल का यह मार्ग हर प्रकार के पर्यटक के लिए अनुकूल है। यह यात्रा चार-पाँच दिनों में पूरी की जा सकती है और इसलिए छोटी छुट्टियों के लिए आदर्श मानी जाती है। दिल्ली, आगरा और जयपुर में आरामदायक होटल और स्वादिष्ट स्थानीय व्यंजन आसानी से उपलब्ध हैं, जिससे यात्रियों को सुविधा और आराम दोनों का अनुभव मिलता है।

सांस्कृतिक अनुभव भी इस यात्रा का मुख्य आकर्षण है। यात्रा के दौरान पर्यटक पारंपरिक बाज़ारों, शिल्पकला केंद्रों और स्थानीय संगीत का आनंद ले सकते हैं। इसके अलावा किले, महल और ऐतिहासिक स्मारक फोटोग्राफी प्रेमियों के लिए आदर्श स्थान प्रदान करते हैं। अक्टूबर से मार्च तक का मौसम गोल्डन ट्राएंगल

31 जनवरी 2026

दयालबाग: आगरा का शांत और आध्यात्मिक ठिकाना

 

भारत के उत्तर प्रदेश राज्य में स्थित दयालबाग, आगरा शहर का एक अनोखा और शांत क्षेत्र है। अगर आप शहर की भीड़-भाड़ और ऐतिहासिक धरोहरों के साथ-साथ कुछ शांति, हरियाली और आध्यात्मिक अनुभव की तलाश में हैं, तो दयालबाग आपके लिए एक आदर्श जगह है। यह स्थान न केवल अपनी स्वच्छता और प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि यहाँ का सांस्कृतिक और आध्यात्मिक जीवन यात्रियों को आकर्षित करता है।

दयालबाग का इतिहास

दयालबाग की स्थापना 1915 में हुई थी और यह दयालबाग समाज का मुख्य केंद्र है। यह समाज आचार्य मैत्रेय और उनके अनुयायियों द्वारा स्थापित किया गया था और यहाँ का जीवन साधारणता, सेवा और आध्यात्मिकता पर आधारित है। आगरा के अन्य हिस्सों की तुलना में यह क्षेत्र साफ-सुथरा, व्यवस्थित

29 जनवरी 2026

ताज महोत्सव 2026 आगरा में 18 से 27 फरवरी तक

 

ताज महोत्सव 2026 इस वर्ष 18 से 27 फरवरी तक आगरा में आयोजित किया जाएगा और इसकी तैयारियाँ  अंतिम चरण में हैं। आगरा मंडलायुक्त श्री शैलेन्द्र कुमार सिंह की अध्यक्षता में ताज महोत्सव समिति की बैठक हाल ही में संपन्न हुई, जिसमें आयोजन की सभी तैयारियों का विस्तृत जायजा लिया गया।
बैठक में बताया गया कि प्रकाशन, होर्डिंग, कंपोजिट वर्क, इवेंट मैनेजमेंट और पार्किंग सहित सभी कार्यादेश जारी कर दिए गए हैं और कार्यक्रम स्थल पर कार्य प्रारंभ हो चुका है। मंडलायुक्त महोदय ने निर्देशित किया कि जिलाधिकारी, नगरायुक्त और एडीए उपाध्यक्ष के साथ

21 दिसंबर 2025

धुंध में छिपा ताजमहल : आगरा की एक शांत और रहस्यमयी सुबह

 

आगरा की पहचान ताजमहल से है। हर सुबह, हर मौसम में ताजमहल अलग रूप में दिखाई देता है। लेकिन जब सर्दियों की धुंध आगरा पर छा जाती है, तो ताजमहल मानो धीरे-धीरे आंखों से ओझल हो जाता है। सफेद संगमरमर की यह ऐतिहासिक इमारत उस समय किसी तस्वीर की तरह लगती है, जिसे धुंध ने हल्के हाथों से ढक दिया हो।धुंध भले ही ताजमहल को पूरी तरह देखने न दे, लेकिन उसकी मौजूदगी महसूस होती रहती है।

धुंध ने बदला ताजमहल का नज़ारा

सुबह के समय जब यमुना किनारे घना कोहरा फैल जाता है, तो ताजमहल दूर से दिखाई देना बंद हो जाता है। कई पर्यटक निराश हो जाते हैं क्योंकि वे उसकी पूरी भव्यता नहीं देख पाते। वहीं कुछ लोग इस दृश्य को खास मानते हैं। उनका कहना होता है कि धुंध में ताजमहल और भी शांत, गहरा और भावनात्मक

14 दिसंबर 2025

आगरा के पुराने सिक्के : समय की सुनहरी धरोहर

आगरा के पुराने शहर की हवेलियाँ, गलियाँ और संग्रहालय इतिहास की कहानियों को संजोए हुए हैं। इनमें सबसे रोचक हैं पुराने सिक्के, जो न केवल उस समय के आर्थिक जीवन का प्रतीक हैं बल्कि सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक इतिहास की भी झलक देते हैं।

10 नवंबर 2025

आगरा की सड़कों पर कैमरे की आँख: 1950 का दौर

 

1950 का दशक आगरा के लिए केवल ताज महल या लाल किला ही नहीं, बल्कि शहर की सड़कों पर जिंदगी के छोटे‑छोटे दृश्य भी उतने ही जीवंत थे। उस समय बड़े‑बड़े फॉर्मेट कैमरे, ट्राइपॉड और फिल्म रोल्स वाले फोटोग्राफर शहर के माहौल को अपने लेंस में कैद करने की कोशिश करते थे।

 स्टूडियो से सड़क तक

उस समय आगरा में कुछ प्रसिद्ध फोटोग्राफ़ी स्टूडियो थे, जैसे Priya Lall & Sons Photo Studio, जो 1878 में स्थापित हुआ था। यहाँ मुख्यतः पोर्ट्रेट और परिवारिक फोटो खींचे जाते थे। लेकिन कुछ फोटोग्राफ़र ऐसे भी थे, जिन्होंने अपने बड़े कैमरे लेकर सड़क की जीवंत झलक को कैद करने की ठानी।

इन फोटोग्राफ़रों के लिए चुनौती थी,बड़े कैमरों को ले जाना कठिन था।हर तस्वीर के लिए फिल्म रोल सीमित था। शहर की हलचल और लोग अक्सर कैमरे के प्रति आशंकित रहते थे।

 सड़क‑फोटोग्राफ़ी के दृश्य

1950 के आगरा में आप रिक्शा, बैलगाड़ी, हाथ में सामान लिए दुकानदार, बच्चों का खेल और बाजार की हलचल देखते। बड़े कैमरे के साथ फोटोग्राफ़र इन क्षणों को सावधानी से फ्रेम करते।

एक आम दृश्य: ताज महल की सफेदी के पीछे, सड़क पर बैठे रिक्शा चालक

26 अक्टूबर 2025

आगरा: पत्रकारिता की विरासत और बदलता मीडिया परिदृश्य

 

आगरा, ताजमहल की नगरी आगरा न केवल स्थापत्य और पर्यटन के लिए जानी जाती है, बल्कि यह उत्तर भारत की पत्रकारिता का भी एक ऐतिहासिक केंद्र रहा है। आज जब डिजिटल मीडिया तेज़ी से आगे बढ़ रहा है, तब भी आगरा की मिट्टी में छपी स्याही की खुशबू इतिहास की गवाही देती है।

1850 के दशक में जब देश में सामाजिक और राजनीतिक चेतना का उदय हो रहा था, तब आगरा से निकलने वाले छोटे छोटे समाचार पत्र लोगों के विचारों को दिशा दे रहे थे। इतिहासकारों के अनुसार, आगरा से निकलने वाला लोकमित्र और सैनिक जैसे प्रकाशन ब्रिटिश शासन के विरुद्ध आवाज उठाने वाले शुरुआती पत्रों में गिने जाते हैं। उस दौर में, छपाई की तकनीक सीमित थी, फिर भी स्थानीय मुद्रक और संपादक अपने प्राणों की बाज़ी लगाकर सच्चाई जनता तक पहुँचाते थे।

स्वतंत्रता आंदोलन के समय आगरा के पत्रकारों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही। सैनिक पत्र ने 1930 के दशक में स्वदेशी आंदोलन और गांधीवादी विचारों का प्रचार करते हुए, स्थानीय जनजागरण

18 सितंबर 2025

आगरा की संकरी गलियां , जहां इतिहास आज भी दीवारों से झांकता है

 

ताजमहल से आगे: आगरा की अनदेखी सांस्कृतिक धरोहर


जब लोग आगरा की बात करते हैं, तो सबसे पहले ताजमहल का नाम आता है। मगर वो आगरा, जो ताजमहल के पीछे बसता है पुरानी, संकरी और टेढ़ी-मेढ़ी गलियों में वहां का जिक्र बहुत कम होता है। यही वो आगरा है, जो कहानियों से बना है, जहां इतिहास सिर्फ किताबों में नहीं, दीवारों पर लिखा दिखता है। कभी-कभी लगता है कि ये गलियाँ खुद किसी बुज़ुर्ग की तरह हैं शांत, अनुभवी और बहुत कुछ कहने को तैयार।

 एक गली, एक अफ़साना

छत्ता बाजार की एक गली है, जहां कहा जाता है कि शाहजहाँ के कारीगर ताजमहल के काम से लौटने के बाद वहीं चाय पीने बैठते थे। एक बूढ़ी अम्मा अपने घर के बाहर बैठकर रोज़ वही किस्सा सुनाती थी , जो उनके दादा ने उन्हें सुनाया था। यह जो पत्थर की चौखट है ना बेटा,वो कहती हैं, "यहाँ कभी एक कारीगर बैठा करता था, जिसे बादशाह ने अपनी अंगूठी इनाम में दी थी।"आज वो अंगूठी तो नहीं है, पर चौखट वैसी ही है — टूटी-फूटी, पर गवाह।

 स्वाद जो कभी नहीं बदला

पुरानी गलियों में घुसते ही एक महक आपके दिल को छूती हैकिसी नुक्कड़ पर बृजवासी हलवाई 80 साल से पेठा बेच रहा है। वही नुस्खा, वही मिठास।पास ही एक दुकान है, जो पांचवीं पीढ़ी चला रही है — कचौरी और जलेबी के लिए सुबह से लाइन लग  जाती है। एक बार एक बुज़ुर्ग दुकानदार ने कहा था, "बेटा, हमारे यहां स्वाद में मसाले नहीं, इतिहास होता है।" कहा जाता है कि किसी ज़माने में जब अकबर का काफ़िला शहर से गुज़रता था, तो इन गलियों में फूल बरसाए जाते थे। कोई ठोस सबूत नहीं है, मगर कुछ गलियों में अभी भी लोग "फूल वाली गली" कहते  हैं।

31 अक्टूबर 2022

आगरा के लोग आरामपसंद होते हैं, बेड़ई नाश्ते से करते हैं सुबह की शुरुआत

 

आगरा - विश्व प्रसिद्ध ताज सिटी आगरा एक ऐसा शहर है जहाँ के लोग अपने शहर की आलोचना करने से शायद ही कभी चूकते हों किन्तु आगरा से उनका लगाव एक मिलीमीटर भी कम नहीं  देखा गया  है। आगरा के ज्यादातर लोग अपनी सुबह की शुरुआत यहाँ के विशेष नाश्ते बेड़ई से करते हैं। शुरू में बाहर के लोगों को यहाँ की बोलचाल भाषा थोड़ी खुरदरी लग सकती है लेकिन लोग आरामपसंद हैं और आक्रामक स्वभाव बहुत कम है । कई बार आपको उनकी  नींद और कठोर वाला रवैया आपको निराश करेगा लेकिन धीमे धीमे आपको इसकी आदत पड़ जाएगी। इस शहर की संस्कृति बृज क्षेत्र की है और इसकी अपनी विशेष खासियत  है। यदि आप इसे ध्यान से देखेंगे तो आपको इसमें एक अनोखापन मिलेगा।

14 जून 2022

'राजनीति करने वालों से संवाद जनतांत्रिक मूल्‍यों को और गहरा करेगा'

   -- 'यू ट्यूब' चैनल  से शुरूआत होगी भटकी राजनीति को जनपरक बनाने की 

श्री राजेन्‍द्र सचदेवा

अगरा: भारतीय लोकतांत्रिक परंपरा की अनेक विशिष्‍टतायें हैं ,इनमें खास है देश की ' पॉलिटिकल पार्टियों'। आजादी के दो दशक बाद तक इनका स्‍वरूप सैद्धान्‍तिक और विचारधारा आधारित ही हुआ करता था,लेकिन बाद में इनका आकर व भमिका में काफी बदलावा आया है, यह कहना है पॉलिटिकल टीम इंडिया (पी टी आई) के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष श्री आर के सचदेवा का ।

श्री सचदेवा का मानना है कि आजादी के समय शुरू हुई राजनैतिक दलों की स्‍थितियों में बदलाव आना तो लाजमी था ,लेकिन विधान मंडलो और संसद  में प्रतिनिधित्‍व के अलावा जिन कारणो ने राजनैतिक दल व्‍यवस्‍था को प्रभावित किया है ,उनमें देश के आर्थिक आर्थिक परिवेश में परिवर्तन , सामाजिक ढंचे में बदलाव, आबादी का बढना, आरक्षण , धार्मिक दृष्‍टिकोण, सहष्‍णुता , चुनाव आयोग की राजनैतिक दलों के प्रति व्‍यवहार, इलैक्‍शन बांड, दलों की आंतरिक संगठनात्‍मक संरचनायें, राजनेताओं और उनके नेताओं के जनता से संवाद के तौर तरीके आदि शामिल हैं।

श्री सचदेवा ने कहा कि

27 मई 2022

कार्ययोजनाओं के लिये जनपद के जलस्‍त्रोतों की करवायी जायेगी 'ड्रोन मैपिंग'

 केन्‍द्र सरकार के  'एस टी पी आई' प्रोजेक्‍ट का सांसद करेंगे निरीक्षण

सांसद राजकुमार चाहर ,भाजपा नेता पौनियं आदि ने होटल पी एल पैलेस में की प्रैस वार्ता ।

आगरा:जनपद के प्रमुख जलसंसाधन स्‍त्रोतों की ड्रौन मैपिंग होगी, यह कहना है सांसद राजकुमार चाहर का जो कि शुक्रवार जे पी पैलेस होटल में महानगर के वरिष्‍ठ पत्रकारों से विकास संभावनाओं को दृष्‍टिगत योजनाओं और उनके क्रियान्‍वयन की स्‍थिति पर चर्चा कर रहे थे। उन्‍होंने कहा कि जनपद में पानी की गंभीर समस्‍या

है,अधिकांश विकास खंड डार्कश्रेणी के हो चुके हैं और भूजल पर निरर्भता लगातार बढ रही है।

 श्री चाहर ने कहा कि  मानसून कालीन पानी को

15 अप्रैल 2022

बृज साहित्‍य महोत्‍सव 17अप्रैल को , सांस्‍कृतिक अभिरुचि का बौद्धिक वर्ग होगा सहभागी

 -- सम्‍मान समारोह, साहित्‍य सम्‍मेलन सत्रों के अलावा वैचारिक अभिव्‍यक्‍ति 'मुझे जी लेने दो' की नाट्य प्रस्‍तुति 

आगरा: ब्रज साहित्‍य महोत्‍सव का आयोजन 17अप्रैल को सूर सदन में हो रहा है, एक दिवसीय यह आयोजन 'ताज लिट्रेचर क्‍लब के तत्‍वावधान में होगा। हाल के दशकों में हिन्‍दी और उसकी अभिवृद्धि की रीढ 'देवनागरी'  को लेकर तो कई आयोजन बज क्षेत्र खासकर आगरा में हुए किन्‍तु ठेठ ब्रज साहित्‍य को समर्पित अपने किस्‍म का पहला आयोजन है। ताज लिट्रेचर क्‍लब की संस्‍थापिका श्रीमती भावना बरदान शर्मा पिछले काफी समय से क्‍लब के माध्‍यम से साहित्‍य एवं संस्‍कृति क्षेत्र में अभिरुचि रखने वालों को सक्रिय रखने तथा स्‍थानीय महत्‍व के आयोजन करती रही हैं, किन्‍तु ब्रज साहित्‍य महोत्‍सव ' ब्रज लिट्रेचर फीस्‍ट 'के रूप में हो रहा ब्रज साहित्‍य महोत्‍सव अपने आप में समूचे ब्रज क्षेत्र और साहित्‍य जगत के लिये  महत्‍ता का आयोजन है।

आयोजन के संरक्षण मंडल के सदस्‍य श्री बृजेश अग्रवाल ने महोत्‍सव 17अप्रैल को सांय 6 बजे से शुरू होगा, इसके तहत औपचारिक उद्घाटन कार्यक्रम के अतरिक्‍त  सम्‍मान समारोह,साहित्‍य सम्‍ममेलन आदि सत्र होंगे, इन्‍हीं के क्रम में नाट्य प्रस्‍तुति 'मुझे जी लेने दो' होगी। इस नाटक को श्री पम्‍मी सरदाना ने ही लिखा व निर्देशित किया है और आयोजन से अध्‍यक्ष के रूप में भी परोक्ष रूप से जुडे हुए हैं।उन्‍होंने बताया कि संरक्षक के रूप में उनके साथ ही श्री महेश चन्‍द्र शर्मा, डा.राम प्रकाश चतुर्वेदी, इा.राजकुमार शर्मा भी सक्रिय सहभागी हैं। 
श्री अग्रवाल ने बताया कि 'ताज लिट्रेचर क्‍लब ' जैविक संक्रमण के रहे दो साल के नकारात्‍मकताओं से भरपूर रहे दौर में भी सक्रिय रहा और अब पांच स्‍वर्णिम वर्ष पूरे कर चुका है,'ब्रज साहित्‍य महोत्‍सव ' इसी कालखंड को स्‍मरणीय बनाये रखने को समर्पित है।आयोजन के माध्‍यम से उन सभी को अपनी सांस्‍कृतिक अभिरुचि की अभिच्व्‍यक्‍ति अनुरूप  सक्रिय सांस्‍कृतिक पटल से जुडने का अवसर है,जो अब तक इसकी जरूरत महसूस करते रहे हैं।
संस्‍थापिका अध्‍यक्ष भावना बरदान शर्मा ने आयोजन के पूर्व

27 सितंबर 2021

अलविदा 'एयर इंडिया " नीलामी की प्रक्रिया की औपचारिकतायें शुरू

-- आगरा का कार्यालय एयरपोर्ट अथार्टी के सुपुर्द , गुम हो गयी महाराजा की हनक

' अलविदा आगरा "
आगरा, समुद्र और इंटरनेशनल वार्डरों से सैकडों कि मी दूर ताज सिटी को इंटरनेशनल एवं नेशनल एयरकनैक्‍टिविटी
देने की शुरूआत करने वाली  एयरलाइंस
ने अब अपना आप्रेशन  आगरा में बन्‍द कर दिया है। इंटरनेशनल टूरिजम डे पर आयोजित कई समारोह महानगर में आयोजित हुए, इनमें से कई में वक्ताओं ने एयर इंडिया की सेवाये आगरा से विदा होने को लेकर भी चर्चा की।ये सभी चर्चायें एयर इंडिया के घाटे और सरकार के फैसले तक ही सीमित रहीं। दरअसल एयर इंडिया ही वह पहली एयर लाइंस है,जिसने इंटरनेशनल टूरिज्म से आगरा की प्रभावी सुविधाजनक हवाई यात्रा की

22 सितंबर 2021

कांग्रेस पूरी दमदारी से आगरा में लडेगी विधान सभा चुनाव

-पार्षद डा शिरोमणी सिह भी पार्टी टिकट अभ्यार्थयों की सूची में

डा शिरामणी सिह ने कांग्रेस महानगर अध्यक्ष देवेन्द्र कुमार चिल्ल
को आगरा द. वि स. सीट से टिकट के लिये दिया आवेदन
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आगरा: कांग्रेस भले ही राजनैतिक परिदृष्य में चाहे जिस स्थिति में पहुंची हुई लेकिन आगरा में विधान सभा चुनाव लडने के लिये पूरी तरह से तैयार है। पार्टी के द्वारा उ प्र विधान सभा के 2022 चुनाव के लिये जनपद में शुरू की गयी प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।अगर राज्य में सत्ताधारी भाजपा के विरूद्ध कोयी चुनावी राजनैति के लिये कोयी गठबन्धन नहीं होता है तो पार्टी जनपद की सभी नौ सीटों पर अपने बूते पर ही चुनाव में टक्कर देगी।पार्टी के चार बार नगर निगम के पार्षद रहे डा शिरोमणी सिह महानगर कीआगरा दक्षिण सीट से पार्टी के

 टिकट के लिये

14 सितंबर 2021

आगरा के आम नागरिकों की जरूरतों को चुनावी एजेंडे में शामिल करे कांग्रेस

 कांग्रेस उ प्र  चुनाव समिति के इंचार्ज सलमान खुर्शीद को सिविल
सोसायटी ने आगरा की समस्‍याओं से अवगत करवाया 
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-- वाहनों के इस्तेमाल की अवधि 15 साल करने से बडे पैमाने पर स्‍किल मैकेनिको तक का काम छिना

आगरा:राजनैतिक दलों के द्वारा अपनी चुनावी राजनीति में आगरा को भी शामिल कर यहां के विकास के मुददों के प्रति प्रतिबध्दता भी जतायी हुई  है,इसे दृष्टिगत उनके संज्ञान में आगरा की जरूरतों की तथ्यपरक जानकारी लाये जाने के लिये सिविल सोसायटी ने अभियान शुरू किया है। सोसायटी के जनरल सैकेट्री श्री अनिल शर्मा ने कांग्रेस के सैकेट्री एवं इंचार्ज उ प्र चुनाव समिति श्री सालमान खुर्शीद से 6सितम्बर 2021 को उनके आगरा आगमन पर मुलाकात की।

श्री शर्मा ने आगरा की अपेक्षाओं के अनुसार कांग्रेस से आग्रह किया है,कि आगरा में आटोमोवाइल एक्ट (National Automobile Scrappage Policy 2021)जो कि