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14 जून 2022

'राजनीति करने वालों से संवाद जनतांत्रिक मूल्‍यों को और गहरा करेगा'

   -- 'यू ट्यूब' चैनल  से शुरूआत होगी भटकी राजनीति को जनपरक बनाने की 

श्री राजेन्‍द्र सचदेवा

अगरा: भारतीय लोकतांत्रिक परंपरा की अनेक विशिष्‍टतायें हैं ,इनमें खास है देश की ' पॉलिटिकल पार्टियों'। आजादी के दो दशक बाद तक इनका स्‍वरूप सैद्धान्‍तिक और विचारधारा आधारित ही हुआ करता था,लेकिन बाद में इनका आकर व भमिका में काफी बदलावा आया है, यह कहना है पॉलिटिकल टीम इंडिया (पी टी आई) के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष श्री आर के सचदेवा का ।

श्री सचदेवा का मानना है कि आजादी के समय शुरू हुई राजनैतिक दलों की स्‍थितियों में बदलाव आना तो लाजमी था ,लेकिन विधान मंडलो और संसद  में प्रतिनिधित्‍व के अलावा जिन कारणो ने राजनैतिक दल व्‍यवस्‍था को प्रभावित किया है ,उनमें देश के आर्थिक आर्थिक परिवेश में परिवर्तन , सामाजिक ढंचे में बदलाव, आबादी का बढना, आरक्षण , धार्मिक दृष्‍टिकोण, सहष्‍णुता , चुनाव आयोग की राजनैतिक दलों के प्रति व्‍यवहार, इलैक्‍शन बांड, दलों की आंतरिक संगठनात्‍मक संरचनायें, राजनेताओं और उनके नेताओं के जनता से संवाद के तौर तरीके आदि शामिल हैं।

श्री सचदेवा ने कहा कि