29 नवंबर 2022

सास और बहू का बिहारी फूड बहुत लोकप्रिय हो गया है दिल्ली में

 

नई दिल्ली - भारत में बहुत से  लोगों ने महामारी से प्रेरित लॉकडाउन अवधि के दौरान अपने घर  से व्यावसायिक उद्यम शुरू किए थे । दिल्ली से मंजरी सिंह और उनकी सास हिरण्यमयी शिवानी भी उद्यम शुरू करने वालों में से एक हैं। सास और बहु ने एक क्लाउड किचन ' तड़का ' को जन्म दिया जो दिल्ली एनसीआर क्षेत्र में प्रामाणिक बिहारी व्यंजन परोसता है। वर्तमान मैं  वे दिल्ली में भोजन प्रेमियों के बीच एक बिहारी खाने के लिए हिट बन चुकी हैं । बताया  जाता है कि वे अब करीब 4 लाख रुपये प्रति माह कमाई करने में सक्षम हैं। 

मूल रूप से पटना, बिहार की रहने वाली ये दोनों  2011 से दिल्ली में रह रही है। मंजरी ने बताया कि तड़के को आर्डर  देने वाला पहला व्यक्ति हमारा पारिवारिक मित्र था, जो दिल्ली में अपने परिवार से दूर रहने वाला एक गैर-बिहारी था। इस व्यक्ति ने  एक बार मेरी सास का बनाया हुआ खाना खाया था ,जैसे ही उसे  हमारे उद्यम के बारे में पता चला, उसने हमें  तत्काल पहला ऑर्डर दिया।अब यह व्यक्ति नियमित रूप से खाना ऑर्डर करता है । छौंक अपने क्लाउड किचन से तरह-तरह के व्यंजन पेश करता है, जिसमें बाजका, झालमुरी, चुरा मटर, चुरा बादाम जैसे स्नैक्स शामिल हैं। भरपेट भोजन के लिए उनके पास खीर के साथ सत्तू की कचौरी, लिट्टी चोखा, पुलाव और दाल पूरी होती है। वे सत्तू शरबत, एक सर्वोत्कृष्ट बिहारी पेय भी पेश करती  हैं। वे सीसा-मुक्त, सुरक्षित-फ्रीज, लीक-प्रूफ भोजन देने के लिए ग्लास पैकेजिंग का उपयोग करती  हैं।

27 नवंबर 2022

मार्बल जड़ाई की कारीगरी प्रथा युगों से जारी है आगरा की गलियों में

 

आगरा शहर के सघन, भीड़भाड़ वाले इलाकों में संगमरमर की जड़ाई का जटिल शिल्प काम अभी भी चलन में है। जड़ाई करने वाले कुशल कारीगर अक्सर नई की मंडी, ताज गंज, गोकुलपुरा और अन्य छोटे इलाकों तथा  बस्तियों में ताजमहल के आसपास रहना जारी किये हुए हैं। ये कारीगर अब पर्यटकों को बेचने के लिए  कलाकृतियों, मूर्तियों, टेबल, स्टूल, बक्सों पर कीमती जड़ाई का काम करना जारी किये हुए हैं। आगरा की बहुत सी  गलियां शिल्पकारों, कारखानों के घरों से भरी हुई हैं। इटली से शुरू हुई  इस अद्भुत कला को मुगल साम्राज्य के कारीगरों द्वारा समय के साथ  महारत हासिल की थी । मुगल भारत में, पिएट्रा-ड्यूरा कला ( इतालवी शब्द ) को पच्चीकारी के नाम से जाना जाता था। इस  कला की  सबसे शानदार अभिव्यक्ति आगरा का ताजमहल है।


26 नवंबर 2022

फिल्म ' रेखा ' सड़क पर रहने वालों के प्रति समाज के रवैये पर सवाल उठाती है

 

गोवा - 53वें भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (इफ्फी) में  भारतीय पैनोरमा के नॉन-फीचर वर्ग में सड़क पर रहने वाले लोगों के रोज़मर्रा के संघर्ष, उनकी स्वच्छता और स्वछता के मुद्दों और उनके प्रति समाज के रवैये पर एक फिल्म दिखाई गई। 'रेखा' नाम की इस मराठी, नॉन-फीचर फिल्म के निर्देशक शेखर बापू रणखंबे ने कहा, “हम सड़क पर रहने वालों के लिए अपने दरवाजे बंद कर देते हैं। लेकिन हम ऐसा क्यों करते हैं? सड़क पर रहने वालों की इस बदकिस्मती और समाज की ऐसी उपेक्षा के कारण का पता लगाने की खोज ने मुझे इस प्रोजेक्ट पर डेढ़ साल तक शोध करने के लिए प्रेरित किया। सड़कों पर रहने वाली महिलाओं के जीवन में कठिनाइयों को पेश करते हुए फिल्म उनके मासिक धर्म की स्वच्छता की खराब हालत पर भी ध्यान केंद्रित करती है। उन्होंने कहा, “इस विषय पर शोध करते हुए मैं उनकी हकीकत के बारे में जानकर चौंक गया। वे महीनों तक नहा नहीं पाती हैं।”

फिल्म की सूत्रधार रेखा सड़क किनारे रहती है। त्वचा के एक फंगल संक्रमण से पीड़ित रेखा को डॉक्टर नहाने और दवा लगाने की सलाह देते हैं। लेकिन उसका पति उसे रोकता है और उसके साथ बुरा व्यवहार करता है। रेखा नहाने की कोशिश करती है लेकिन तब चौंक जाती है जब उसके समुदाय की महिलाएं उसे ऐसा न करने का कारण बताती हैं। जानकर वो दुविधा में पड़ जाती है। वो अपने पति को छोड़ने का फैसला करती है ताकि संक्रमण से निपटने के लिए नहा सके। फिल्म स्वच्छ रहने को लेकर उसकी कठिनाइयों को दर्शाती है।

24 नवंबर 2022

ताजमहल प्रवेश टिकट आगरा कैंट रेलवे स्टेशन पर भी क्यू आर कोड से बेचने की सम्भावना

 

आगरा। ताजमहल देखने के लिए आगंतुकों की संख्या दिन प्रतिदिन निरंतर  बढ़ती जा रही है। किन्तु प्रवेश टिकट खरीदने के लिए टूरिस्टों को हर दिन और अधिक  संघर्ष करना पड़ता है। आगरा कैंट  रेलवे स्टेशन पर  ओनलाइन टिकट प्राप्त करने  के लिए ' क्यू आर कोड  ' शीघ्र ही उप्लब्ध कराने का प्राविधान भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा विचारार्थ है।  आगरा के  टूरिस्ट व्यवसाय से जुड़े  लोगों की मांग थी कि  हेरिटेज सिटी आगरा में स्मारकों के टिकट ऑनलाइन के अतरिक्त मुख्य रेलवे स्टेशनों पर भी उपलब्ध कराये जाएँ। जिससे  देश विदेश से आये मेहमान ट्रेन से उतरते ही स्मारकों के प्रवेश टिकट खरीद सकते हैं । बढ़ती भीड़ भाड़  को देखते हुए ऑनलाइन के अतरिक्त आगरा के फोर्ट तथा कैंट स्टेशन पर भी ताजमहल आदि स्मारकों के प्रवेश टिकट खरीदने  कराने का दूसरा ऑप्शन अत्यंत आवश्यक है जिसे उपेक्षित नहीं किया जा सकता है । यहाँ बताना उचित होगा कि पेरिस , रोम , जिनेवा आदि में भी ऑनलाइन के अतरिक्त इस तरह के दूसरे ऑप्शन की सुविधा उपलब्ध है। 


22 नवंबर 2022

तमिलनाडु से बड़ी संख्या में आ रहे हैं पर्यटक वाराणसी में

 

वाराणसी - काशी तमिल संगमम कार्यक्रम के तीसरे दिन सोमवार को पवित्र गंगा नदी के तट पर काशी के विभिन्न घाटों पर तमिलनाडु से आए प्रतिनिधिगण बड़ी संख्या में एकत्र हुए। इन घाटों पर ‘हर हर महादेव’ के जाप के साथ पावन स्नान करने के बाद वे विभिन्न समूहों में श्री काशी विश्वनाथ मंदिर दर्शन करने गए।  उन्हें बनारसी व्यंजनों का स्वाद चखने के साथ-साथ विभिन्न हस्तशिल्प उत्पादों को निहारने एवं खरीदने में भी व्यस्त देखा गया।

तमिलनाडु से बड़ी संख्या में आ रहे पर्यटक वाराणसी रेलवे स्टेशन और हवाई अड्डे दोनों पर ही देखे जा रहे हैं। तमिलनाडु के विभिन्न हिस्सों से आ रहे मेहमानों के लिए शहर के अधिकतर  होटलों और धर्मशालाओं को बुक कर लिया गया है।

तमिलनाडु के रामेश्वरम शहर के छात्र जब पहली बार पवित्र शहर वाराणसी आए, तो संवाद के दौरान वे ‘काशी तमिल संगमम’ स्थल पर उत्साह से भरे हुए देखे गए। उन्होंने ‘काशी तमिल संगमम’ के रूप में संस्कृति और विरासत परिवेश को एकजुट करने में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की पहल की सराहना की।

21 नवंबर 2022

शिवपाल ने बड़ी बहू डिंपल को जिताने की अपील की

उत्तर प्रदेश के तीन उप चुनावों  में भाजपा और सपा-रालोद गठबंधन के बीच सीधी टक्कर होगी। मैनपुरी में  13 उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किया है, किन्तु सीधी टक्कर भाजपा और सपा के बीच ही नज़र आ रही है। इस वर्ष यूपी विधानसभा चुनाव में मायावती की पार्टी बसपा ने केवल एक सीट जीती थी जबकि कांग्रेस दो सीटें जीतने में सफल रही थी। चाचा शिवपाल का  भतीजे अखिलेश से हाथ मिलाना भाजपा के लिए एक झटका हो सकता। हैउल्लेखनीय है कि कांग्रेस 1989 से यूपी में सत्ता से बाहर है और यूपी विधानसभा में लगातार नौ चुनाव हार चुकी है। मैनपुरी की सीट पर  मुकाबला मुख्य रूप से सपा की डिंपल यादव और भाजपा के रघुराज सिंह शाक्य के बीच है। खतौली में मुकाबला भाजपा प्रत्याशी राजकुमारी और सपा सहयोगी रालोद के मदन भैया के बीच है। रामपुर सदर से केवल तीन उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किया है। भाजपा के आकाश सक्सेना ,सपा के असीम राजा तथा निर्दलीय उम्मीदवार राजेंद्र सिंह। 

17 नवंबर 2022

ताज सिटी आगरा के हर कोने में छिपी है विरासत की कहानी

 

आगरा - विश्व विरासत सप्ताह के दौरान ताजमहल देखने के साथ साथ  आगरा की छिपी विरासत की अवश्य खोज करें। यहाँ के हर कोने में विरासत छिपी है। ताज सिटी के नाम से जाने वाला आगरा एक समृद्ध, नाटकीय और गौरवशाली विरासत वाला शहर है। यहाँ की खासियत कि सड़कों पर चलते हुए आप हर जगह इतिहास के स्पर्श को महसूस कर सकते हैं। स्थानीय वास्तुकला काफी हद तक  अपने मूल रूप में संरक्षित है । यदि इस विश्व प्रसिद्ध शहर के ओल्ड सिटी में हेरिटेज वॉक करने का अवसर मिले तो यह वॉक हमें आकर्षक कहानियों के साथ 400 साल पहले मुगल के समय में वापस ले जाता है।

यदि  कोई भोजन प्रेमी है तो आपको पुराने शहर के मुंह में पानी लाने वाले भोजन हर जगह  परंपरागत स्टाइल की दुकानों पर दिखाई देते हैं । यहाँ की  पुरानी सड़कों के चक्रव्यूह से गुजरते समय  ऐसा महसूस होता है जैसे कि हम लाखों  लोगों से घिरे हैं। ओल्ड सिटी में हेरिटेज वॉक के दौरान सूर्यास्त का सुन्दर फोटो लेने के लिए यहाँ कई ऐसे पॉइंट मिलेंगे जो गूगल मैप पर भी नहीं है। 


14 नवंबर 2022

आगरा हेरिटेज शहर है किन्तु इसकी सुंदरता को छिपा रखा है गंदगी ने

 

आगरा। एक विदेशी युवा ने ताज सिटी आगरा में करीब 7 महीने बिताने के बाद अपने अनुभवों में लिखा कि आगरा दुनिया के महत्वपूर्ण पर्यटक शहरों में से एक है किन्तु शहर  आकर्षक क्यों नहीं है। उसने कहा कि इसका  मुख्य कारण यह है कि यहाँ के लोग स्वछता को अपनी जिम्मेदारी नहीं मानते हैं। भले ही आगरा में कई पर्यटक आकर्षण हैं, जैसे ताजमहल और लाल किला। इस युवा को  यमुना नदी के किनारे हमेशा टनों कचरा देखकर बड़ा आशचर्य हुआ। । शहर भी बहुत प्रदूषित है ।  फुटपाथ भी नहीं हैं इसलिए रिक्शा की चपेट में आने से बचने की कोशिश करते हुए सड़क के किनारे चलना वास्तव में मुश्किल है। उसने अनुभव किया कि आगरा एक सुन्दर शहर है किन्तु यहाँ के लोग इसकी सुंदरता को बचाने की पहल का प्रयास करते कम ही दिखाई देते हैं। 

13 नवंबर 2022

आगरा के युवा ने सोशल मीडिया से ढूंढी अपनी जीवन साथी मानचेस्टर में

 

आगरा - सोशल मीडिया के जरिये वार्तालाप को बढ़ाते हुए एक आगरा के एक युवा तथा ब्रिटिश युवती ने शादी रचा दी। 28 वर्षीय आगरा के पालेंद्र सिंह तथा हाना हॉबिट ने अपनी शादी का आयोजन हिंदू रीति रिवाज़ में किया। मानचेस्टर की  हाना हॉबिट वहाँ एक नर्स के रूप में नौकरी करती हैं। इन दोनों ने कोविड के दौरान तीन साल की ऑनलाइन बातचीत  के बाद  शादी के बंधन में बंधने  का निर्णय लिया । हाना का भारतीय रीति रिवाज से काफी समय से लगाव चला आ रहा है। पालेंद्र की माताजी अपने पुत्र के चयन से बहुत खुश हैं। उन्होंने दम्पति को वैवाहिक जीवन के लिए शुभ कामनाएं दीं। 

11 नवंबर 2022

जाएँ तो जाएँ कहाँ ये बन्दर , उनके जंगल तो छीन लिए हमने

 

आगरा - बंदरों का शहरों में स्थानान्तरण करना भारत के शहरों में ही नहीं बल्कि दुनिया के कई देशों जापान , थाईलैंड , साऊथ अफ्रीका आदि में में भी समस्या है। बंदर लंबे समय से दुनिया भर के मंदिरों और पर्यटन स्थलों में एक विशेष आकर्षण रहे हैं। ये बुद्धिमान जानवर माने जाते हैं। ये पहले शहरी केंद्रों से दूर रहते थे, खुद को बड़े शहरों के किनारे तक सीमित रखते थे।किन्तु वनों की कटाई, पशु कृषि, औद्योगीकरण और तेजी से बढ़ते शहरों ने  बंदरों के आवास को मुश्किल बना दिया है । इसी कारण  बंदरों की कई प्रजातियां भोजन, आश्रय और पानी के लिए शहरों में आश्रय खोजती जा  रही हैं।

पहले  बंदर लंबे समय से मंदिरों के आसपास रह करते  थे , जहां उन्हें अक्सर संरक्षित रखा जाता था। इन  मंदिरों से वे पास के जंगलों में वे नियमित आना जाना करते थे । लेकिन शहरीकरण ने मंदिर का आसपास के जंगल समाप्त से होते जा रहे हैं , जिससे  बंदर शहरों में बस्ते जा रहे हैं ।जैसे-जैसे बंदरों के प्राकृतिक आवास लगातार नष्ट होते जा रहे हैं, वैसे-वैसे बंदरों का इंसानों से डर खत्म होता जा रहा है। नए खाद्य स्रोतों की तलाश में, वे खेतों पर छापा मारते हैं, भोजन की भीख माँगते हैं, और घरों और व्यवसायों से चोरी करते हैं। शहरी क्षेत्र बंदरों को आश्रय, भोजन, पानी और बड़े पेड़ों

7 नवंबर 2022

1823 से 1882 के दौरान आगरा कॉलेज के सभी विवरण सीधे इंग्लैंड की संसद को भेजे जाते थे

 

आगरा।भारत के सबसे पुराने कॉलेजों में से एक आगरा कॉलेज 199 वर्ष पुरे कर 200 वर्ष में लग गया है। इसकी  स्थापना 1823 में ग्वालियर के माधव राव पेशवा की सेवा में एक प्रसिद्ध संस्कृत विद्वान और ज्योतिषी पंडित गंगाधर शास्त्री जी द्वारा की गई थी। आगरा कॉलेज  उत्तर भारत का सबसे पुराना और सबसे बड़ा शैक्षणिक संस्थान है। 1882 तक यह  कॉलेज एक सरकारी कॉलेज था। 1823 से 1882 की  अवधि के दौरान भारत के गवर्नर जनरल द्वारा इसकी शैक्षणिक गतिविधियों और प्रशासनिक समस्याओं के बारे में सभी विवरण सीधे इंग्लैंड की संसद को भेजे जाते  थे। उक्त अवधि के सभी अभिलेख अभी भी भारत अधिकारी पुस्तकालय और अभिलेख: विदेशी और सामान्य धन अधिकारी, लंदन में संरक्षित हैं। आगरा कॉलेज ने यूपी का फर्स्ट ग्रेजुएट तथा उत्तर भारत का  प्रथम विधि स्नातक। शुरू में इसकी स्थापना प्राथमिक शिक्षा के लिए की गई थी, लेकिन बाद में इसे उच्च शिक्षा के लिए अपग्रेड कर दिया गया। 1883 तक इसे एक सरकारी कॉलेज के रूप में चलाया जाता था। शुरू में  से आगरा कॉलेज कलकत्ता विश्वविद्यालय से संबद्ध था लेकिन इलाहाबाद विश्वविद्यालय की स्थापना के बाद यह उससे संबद्ध हो गया था।  इसकी संबद्धता 1927 में आगरा विश्वविद्यालय (वर्तमान में डॉ. भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय, आगरा के रूप में जाना जाता है) को स्थानांतरित कर दी गई थी। 

6 नवंबर 2022

फरवरी में होगा ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट लखनऊ में, यूके, फ्रांस और सिंगापुर प्रमुख भागीदार

 

लखनऊ - यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस और सिंगापुर यूपी इन्वेस्टर्स समिट के प्रमुख भागीदार होंगे। फरवरी 2023 में प्रस्तावित ग्लोबल मीट उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा लखनऊ में आयोजित किया जा रहा है। अमेरिका, जर्मनी, रूस, इज़राइल, कनाडा, संयुक्त अरब अमीरात, नीदरलैंड, दक्षिण अफ्रीका, बेल्जियम, ब्राजील और ऑस्ट्रेलिया के भी भाग लेने की पूरी उम्मीद की जा रही है। इस शिखर सम्मेलन में लगभग 10,000 राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय प्रतिनिधियों के भाग लेने की उम्मीद की जा रही है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपनी टीम के साथ, निवेशकों और बड़े निगमों के साथ बातचीत करने के लिए 19 देशों के 21 शहरों का दौरा करेंगे। इस सम्बन्ध में उ प्र  सरकार द्वारा भारतीय दूतावासों और मिशनों की मदद लेना जारी  है।