क्योंकि सारा काम परिवार के लोग ही करते थे। इसे कभी भी पूरे प्रोफेशन की तरह नहीं लिया गया, बल्कि एक मिशन की तरह लिया गया जहाँ रॉ-मटेरियल की क्वालिटी, प्योरिटी और खरीद पर पूरा ध्यान दिया जाता है। साथ ही, बनाने का प्रोसेस परिवार के लोगों की देखरेख में होता है। इसीलिए कोई भी प्रोडक्ट की क्वालिटी को चैलेंज नहीं कर सकता। अभी, 'चौबे जी के मसाला' कंपनी चाट मसाला, गरम मसाला, चना मसाला, कसूरी मैथी, हल्दी पाउडर, धनिया पाउडर, मरिच पाउडर, आमचूर, जीरा, अजवाइन, राई, सौंफ वगैरह जैसे कई मसालों को प्रोसेस और पैक कर रही है। सभी प्रोडक्ट्स भारत सरकार के एगमार्क से अप्रूव्ड हैं।
25 अप्रैल 2026
आगरा के स्वर्गीय वैध राम गोपाल चतुर्वेदी ने बनाया था पहला दाल का मसाला
17 अप्रैल 2026
आगरा में बढ़ता कैफे कल्चर: ऐतिहासिक शहर में बदलती युवा जीवनशैली
आगरा, जिसे दुनिया ताज महल के लिए जाना जाता है, अब केवल एक ऐतिहासिक पर्यटन शहर तक सीमित नहीं रहा। पिछले कुछ वर्षों में शहर में कैफे संस्कृति तेजी से बढ़ी है और यह युवाओं की नई जीवनशैली का हिस्सा बन गई है। शहर के कमला नगर, सदर बाजार, सिविल लाइंस और फतेहाबाद रोड जैसे इलाकों में कई आधुनिक कैफे खुल चुके हैं। इनमें एस्प्रेसो कॉफी एंड किचन, शीरोज़ हैंगआउट कैफे, टीज़ मी कैफे, और कैफे बेली जैसे स्थान युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय हो रहे हैं। इन कैफे में केवल भोजन ही नहीं बल्कि बैठकर काम करने, पढ़ाई करने और दोस्तों के साथ समय बिताने का चलन भी तेजी से बढ़ रहा है।
पहले आगरा में पारंपरिक चाय की दुकानों, पुरानी गलियों और घरों की बैठकों में सामाजिक मेलजोल होता था, लेकिन अब यह तस्वीर धीरे-धीरे बदल रही है। पुराने पारंपरिक सामाजिक मिलन के तरीके अब आधुनिक कैफे संस्कृति में बदलते जा रहे हैं। यह बदलाव दिखाता है कि शहर की पुरानी परंपराएं धीरे-धीरे नए दौर की जीवनशैली के साथ खुद को ढाल रही हैं।सोशल मीडिया ने इस बदलाव को और गति
28 मार्च 2026
बारह साल बेमिसाल: आगरा को स्वच्छ बनाने की मिसाल बनी इंडिया राइजिंग सोसायटी
आगरा, 29 मार्च 2026 (रविवार) — ताजनगरी आगरा में स्वच्छता, जागरूकता और सौंदर्यीकरण के क्षेत्र में निरंतर कार्य कर रही इंडिया राइजिंग सोसायटी ने आज अपने 12 वर्षों के प्रेरणादायक सफर को एक और महत्वपूर्ण पड़ाव के साथ चिह्नित किया। सोसायटी द्वारा आयोजित यह 633वां लगातार अभियान न केवल उनकी प्रतिबद्धता का प्रमाण है, बल्कि समाज के प्रति उनके अटूट समर्पण को भी दर्शाता है।
प्रातः 7 से 9 बजे तक संजय प्लेस स्थित आगरा राइजिंग पार्क (शहीद स्मारक के सामने) में आयोजित इस विशेष अभियान में बड़ी संख्या में स्वयंसेवकों, स्थानीय नागरिकों और जागरूक युवाओं ने भाग लिया। झाड़ू, रंग और सकारात्मक सोच के साथ टीम ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि बदलाव की शुरुआत खुद से होती है।
इस अभियान की खास बात यह रही कि यह सोसायटी के स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया, जिसमें स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए सामूहिक शपथ कार्यक्रम भी रखा गया। इसमें उपस्थित लोगों ने न केवल अपने आसपास सफाई बनाए रखने का संकल्प लिया, बल्कि दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करने का वचन दिया।
पिछले 12 वर्षों में इंडिया राइजिंग सोसायटी ने बिना रुके, बिना थके, हर रविवार स्वच्छता अभियान चलाकर एक नई मिसाल कायम की है। 633 लगातार अभियानों का यह सफर केवल
22 मार्च 2026
वारली चित्रकला: कैसे आज भी जीवित है हजारों साल पुरानी परंपरा
मधुकर रामभाऊ वाडू ने मात्र आठ साल की उम्र में वारली पेंटिंग सीखना शुरू किया था और पिछले लगभग पाँच दशकों से इस कला को समर्पित हैं। आज 56 वर्ष की उम्र में वे सिर्फ एक कलाकार ही नहीं, बल्कि लेखक, शोधकर्ता और इस परंपरा के समर्पित संरक्षक भी हैं। उन्होंने अपना जीवन वारली कला के संकेतों और उसके गहरे अर्थों को समझने में लगाया है। उनका मुख्य जुनून उस अदृश्य संबंध की खोज करना है, जो प्रागैतिहासिक गुफा चित्रों और प्राचीन पेट्रोग्लिफ्स को वारली कला से जोड़ता है।
वारली चित्रकला, महाराष्ट्र की एक प्रसिद्ध लोक कला परंपरा है, जिसे वारली जनजाति द्वारा पीढ़ियों से संजोया गया है। इसकी जड़ें 10वीं शताब्दी ईस्वी या उससे भी पहले, नवपाषाण युग (करीब 2,500–3,000 ईसा पूर्व) तक मानी जाती हैं। यह कला प्रकृति के साथ गहरे
13 मार्च 2026
रेहावली में उटंगन नदी : जीवनदायिनी नदी की कहानी
रेहावली के आसपास बहने वाली उटंगन नदी केवल एक जलधारा नहीं है, बल्कि यहाँ के लोगों की ज़िंदगी, खेती और संस्कृति का हिस्सा रही है। इस नदी का इतिहास, उसका महत्व और वर्तमान चुनौतियाँ हमें याद दिलाती हैं कि प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण कितना जरूरी है।
उटंगन नदी का भूगोल और उत्पत्ति
उटंगन नदी राजस्थान के अरावली की पहाड़ियों से निकलती है और धीरे-धीरे उत्तर की ओर बढ़ती हुई उत्तर प्रदेश के आगरा जिले के पास से गुजरती है। रेहावली गाँव के पास यह नदी अपने प्राकृतिक मार्ग में फैलती है और आगे जाकर यमुना नदी में मिलती है। बरसात के समय इसकी धारा चौड़ी हो जाती है और आसपास के खेतों और गाँवों को जीवन देती है। वहीं, शुष्क मौसम में नदी का प्रवाह कम हो जाता है, जिससे स्थानीय लोग और किसान इसकी हर बूंद के महत्व को और भी महसूस करते हैं।
कृषि और जल स्रोत के रूप में महत्व
उटंगन नदी का पानी रेहावली और आसपास के क्षेत्रों में कृषि के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। बरसात के समय यह खेतों में पानी भर देती है और भूजल स्तर को भी बढ़ाती है। पुराने समय में किसान नदी के प्रवाह पर निर्भर रहते थे, और नदी के पानी से फसलें उगती थीं। आज भी, स्थानीय लोग इसे सिंचाई और पेयजल के लिए इस्तेमाल करते हैं।
सिंचाई विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इस नदी के पानी को नियंत्रित तरीके से संग्रहित किया जाए, तो कई गाँवों में जल संकट दूर किया जा सकता है। यही कारण है कि प्रशासन और स्थानीय समाज ने रेहावली बांध परियोजना जैसी योजनाओं पर काम शुरू किया है, ताकि पानी का सही उपयोग हो और खेतों तक पर्याप्त जल पहुँच सके।
चुनौतियाँ और बदलाव
समय के साथ उटंगन नदी ने कई चुनौतियाँ देखी हैं। यमुना नदी के उच्च जलस्तर के समय कभी-कभी उसका पानी उटंगन में उलटी दिशा में बहने लगता है, जिससे आसपास के खेत और घर प्रभावित होते हैं। इसके अलावा, अवैध खनन और अतिक्रमण के कारण नदी के प्रवाह में गड़बड़ी आई है और गहरे गड्ढों ने सुरक्षा के नए जोखिम पैदा कर दिए हैं।
स्थानीय लोगों ने इस पर चिंता जताई है और प्रशासन ने नदी के किनारे सुरक्षा और नियंत्रण के लिए कदम उठाए हैं। बांध और जल संचयन जैसी योजनाएँ इसी दिशा में एक सकारात्मक प्रयास हैं।
सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व
उटंगन नदी सिर्फ पानी का स्रोत नहीं है। यहाँ के लोग धार्मिक और सांस्कृतिक अवसरों पर नदी किनारे पूजा, उत्सव और मूर्ति विसर्जन जैसी परंपराएँ निभाते हैं। ये पर्व और आयोजन इस नदी को समुदाय के जीवन का हिस्सा बनाते हैं। हालांकि, नदी के प्रवाह और गहराई में बदलाव ने इन परंपराओं को भी प्रभावित किया है, जिससे सुरक्षा और पर्यावरणीय जागरूकता की आवश्यकता बढ़ गई है।
भविष्य की राह
उटंगन नदी का इतिहास हमें यह सिखाता है कि प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण कितना जरूरी है। यदि स्थानीय समुदाय, प्रशासन और पर्यावरण विशेषज्ञ मिलकर काम करें, तो इस नदी को पुनर्जीवित किया जा सकता है। बांध और जल प्रबंधन परियोजनाएँ इसे सुरक्षित और स्थायी बनाने की दिशा में कदम हैं।
नदी के संरक्षण से न केवल खेती और पानी की समस्या हल होगी, बल्कि यह स्थानीय संस्कृति और जीवन को भी संरक्षित रखेगी। रेहावली में उटंगन नदी न केवल बहती जलधारा है, बल्कि यहाँ की पहचान, जीवन और उम्मीद की कहानी भी है।
8 मार्च 2026
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर ताजमहल में 40,000 से अधिक पर्यटक, आगरा में बढ़ी पर्यटन गतिविधियाँ
आगरा: 8 मार्च, 2026 को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आगरा स्थित विश्व प्रसिद्ध स्मारक ताजमहल में भारी संख्या में पर्यटकों ने दर्शन किए। आगरा पर्यटन विभाग के अनुसार, इस दिन लगभग 40,000 पर्यटक ताजमहल देखने पहुंचे, जिनमें देशी और विदेशी पर्यटक दोनों शामिल थे। सुबह से ही ताजमहल के मुख्य प्रवेश द्वार पर पर्यटकों की लंबी कतारें देखने को मिलीं, जिससे पता चलता है कि महिला दिवस पर लोगों की उत्सुकता और आकर्षण कितना अधिक है।
इस अवसर पर आगरा पर्यटन विभाग ने महिलाओं के लिए विशेष तैयारियाँ की थीं। ताजमहल परिसर में महिला पर्यटकों के लिए गाइडेड टूर और फोटो प्वाइंट की सुविधा उपलब्ध कराई गई, जिससे उन्होंने स्मारक का बेहतर अनुभव लिया। इसके अलावा सुरक्षा के मद्देनजर अतिरिक्त स्टाफ और सुरक्षा कर्मी तैनात किए गए थे। पर्यटकों के प्रवेश और बाहर जाने के मार्गों को व्यवस्थित करने के लिए भी विशेष इंतजाम किए गए थे, ताकि भीड़ को नियंत्रित किया जा सके और सभी पर्यटक आराम से दर्शन कर सकें।
भारी संख्या में पर्यटकों के आगमन का सीधा असर स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ा। होटल, रेस्टोरेंट, कैफे और शॉपिंग हब में व्यस्तता बढ़ गई। स्थानीय कारीगरों और स्मृति चिन्ह विक्रेताओं ने भी इस अवसर का पूरा लाभ उठाया। शहर के छोटे व्यवसायों ने पर्यटन की बढ़ती मांग से अपने उत्पादों की बिक्री में काफी सुधार देखा। इसके अलावा आगरा के ट्रैवल एजेंसियों और स्थानीय गाइडों के लिए भी यह दिन बेहद लाभकारी साबित हुआ।
पर्यटन विभाग ने कहा कि महिला दिवस पर ताजमहल में इतनी बड़ी संख्या में पर्यटकों का आगमन न केवल आगरा की पर्यटन क्षमता को दर्शाता है, बल्कि शहर की सुरक्षा और व्यवस्थाओं की क्षमता को भी प्रदर्शित करता है। विभाग ने बताया कि इस दौरान पर्यटकों की सुविधा और मार्गदर्शन के लिए गाइड और सुरक्षा कर्मियों की संख्या बढ़ा दी गई थी। आगरा के पर्यटन अधिकारी ने यह भी कहा कि इस तरह की बड़ी भीड़ का प्रबंधन सुनिश्चित करना चुनौतीपूर्ण होता है, लेकिन पिछले वर्षों के अनुभव और तैयारियों के चलते पर्यटकों को आरामदायक अनुभव मिल सका।
विशेषज्ञों का कहना है कि ताजमहल जैसी विश्व धरोहर स्थलों पर महिला दिवस या अन्य राष्ट्रीय उत्सवों के अवसर पर पर्यटकों की संख्या में वृद्धि आगरा की स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार के अवसरों के लिए महत्वपूर्ण है। अधिक पर्यटन से न केवल होटल और रेस्टोरेंट को लाभ होता है, बल्कि स्थानीय कारीगरों और शॉपिंग हब को भी फायदा मिलता है। इसके अलावा आगरा की सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान भी इस तरह के आयोजनों से मजबूत होती है।
पर्यटकों के लिए सलाह दी गई है कि ताजमहल का भ्रमण सुबह जल्दी करें ताकि भीड़ से बचा जा सके और पूरे स्मारक का आनंद लिया जा सके। साथ ही स्थानीय कारीगरों द्वारा बनाए गए स्मृति चिन्ह और हस्तशिल्प उत्पाद खरीदना न केवल यादगार अनुभव देता है, बल्कि स्थानीय कारीगरों का समर्थन भी करता है। आगरा किला और फतेहपुर सीकरी जैसी नजदीकी ऐतिहासिक जगहों का भ्रमण भी पर्यटक अनुभव को और समृद्ध बनाता है।
इस प्रकार अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर आगरा में ताजमहल ने अपनी पूरी क्षमता के साथ पर्यटकों का स्वागत किया और शहर में पर्यटन गतिविधियों को एक नई ऊँचाई दी। यह न केवल आगरा की पर्यटन क्षमता को दर्शाता है बल्कि स्थानीय व्यवसाय, कारीगर और अर्थव्यवस्था के लिए भी सकारात्मक संकेत है।
28 फ़रवरी 2026
गोल्डन ट्राएंगल यात्रा आज भी भारत की पहली पसंद
गोल्डन ट्राएंगल पर्यटन मार्ग, जो दिल्ली, आगरा और जयपुर को जोड़ता है, दशकों से विदेशी और भारतीय यात्रियों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा है। यह यात्रा मार्ग 1960 के दशक में विकसित हुआ था, जब भारत ने अंतरराष्ट्रीय पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए प्रमुख शहरों को जोड़ने का निर्णय लिया। तब से यह मार्ग भारत की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर का प्रतीक बन गया है और अब तक लाखों यात्रियों को अपनी ओर आकर्षित करता रहा है।
इस मार्ग की खासियत यह है कि यह यात्रियों को भारत के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और वास्तुकला के अनमोल अनुभव प्रदान करता है। यात्रा के दौरान पर्यटक ताजमहल, कुतुब मीनार, लाल किला, हवा महल, आमेर किला और सिटी पैलेस जैसी विश्वप्रसिद्ध जगहों को देख सकते हैं। प्रत्येक शहर की अपनी अनोखी संस्कृति, रंग-बिरंगी परंपराएं और शिल्पकला यात्रियों को मंत्रमुग्ध कर देती हैं।
गोल्डन ट्राएंगल का यह मार्ग हर प्रकार के पर्यटक के लिए अनुकूल है। यह यात्रा चार-पाँच दिनों में पूरी की जा सकती है और इसलिए छोटी छुट्टियों के लिए आदर्श मानी जाती है। दिल्ली, आगरा और जयपुर में आरामदायक होटल और स्वादिष्ट स्थानीय व्यंजन आसानी से उपलब्ध हैं, जिससे यात्रियों को सुविधा और आराम दोनों का अनुभव मिलता है।
सांस्कृतिक अनुभव भी इस यात्रा का मुख्य आकर्षण है। यात्रा के दौरान पर्यटक पारंपरिक बाज़ारों, शिल्पकला केंद्रों और स्थानीय संगीत का आनंद ले सकते हैं। इसके अलावा किले, महल और ऐतिहासिक स्मारक फोटोग्राफी प्रेमियों के लिए आदर्श स्थान प्रदान करते हैं। अक्टूबर से मार्च तक का मौसम गोल्डन ट्राएंगल
22 फ़रवरी 2026
आगरा की सांस्कृतिक झलक: In the Shadow of the Taj,A Portrait of Agra
आगरा पर एक प्रसिद्ध पुस्तक In the Shadow of the Taj: A Portrait of Agra आगरा के इतिहास, संस्कृति और शहर की विविधताओं को समझने के लिए एक अनूठा स्रोत है। यह किताब सिर्फ ताजमहल तक सीमित नहीं है बल्कि शहर की गली‑निक्कों, पुरानी हवेलियों, बाजारों और स्थानीय जीवन के रंगीन पहलुओं का भी चित्रण करती है। लेखक रॉइना ग्रेवाल ने आगरा की सड़कों, किलों और स्मारकों की यात्रा करके शहर की विविधता और ऐतिहासिक महत्व को बड़े ही जीवंत और विस्तारपूर्वक तरीके से प्रस्तुत किया है।
यह पुस्तक 2025 में प्रकाशित हुई थी और इसमें आगरा के अतीत और वर्तमान को एक साथ दिखाया गया है। पुस्तक में बताया गया है कि कैसे मुगल साम्राज्य के समय से लेकर ब्रिटिश शासन और आधुनिक युग तक आगरा ने अनेक बदलाव देखे हैं। लेखक ने शहर के प्रमुख स्मारकों जैसे आगरा किला, सिकंदरा, फतेहपुर सीकरी के अलावा स्थानीय बाजारों, पुराने मोहल्लों और कला केंद्रों के माध्यम से आगरा की असली कहानी पेश की है।
पुस्तक में आगरा की सांस्कृतिक विरासत पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। यह शहर सिर्फ ताजमहल के लिए ही प्रसिद्ध नहीं है, बल्कि यहाँ की स्थानीय कला, हस्तशिल्प, मिठाई उद्योग, और सामाजिक जीवन भी इसे विशेष बनाते हैं। लेखक ने स्थानीय लोगों के जीवन, उनकी
7 फ़रवरी 2026
पार्षदों की भूमिका आगरा में नगर निगम को अधिक प्रभावी बना सकती है
आगरा नगर निगम का उद्देश्य शहर के नागरिकों को बेहतर सेवाएं प्रदान करना और आगरा को स्वच्छ, व्यवस्थित एवं सुविधाजनक बनाना है। इस उद्देश्य को केवल प्रशासनिक प्रयासों से पूरा करना शायद आसान नहीं है। पार्षद इस प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण कड़ी हैं, क्योंकि वे सीधे नागरिकों और नगर निगम के बीच संबंध स्थापित करते हैं। हालांकि, अक्सर देखा जाता है कि कई पार्षद अपने क्षेत्रों में वास्तविक सक्रिय भूमिका नहीं निभा रहे हैं। इसका नतीजा यह होता है कि नागरिकों की समस्याएं समय पर पहचानी नहीं जातीं और नगर निगम की सेवाओं में सुधार की गति धीमी हो जाती है।
पार्षद अपने क्षेत्रों में नियमित संवाद स्थापित करके नागरिकों की समस्याओं और सुझावों को समझ सकते हैं। वे स्थानीय मुद्दों की पहचान करके नगर निगम तक पहुँचा सकते हैं और यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि नगर निगम द्वारा लिए गए कदम प्रभावी हों। इसके साथ ही, पार्षद नागरिकों को उनके अधिकारों






