31 अगस्त 2026

क्या आगरा उत्तर प्रदेश का अगला सूचना प्रौद्योगिकी केंद्र बन सकता है?

 

आगरा का नाम सुनते ही हमारे मन में सबसे पहले ताजमहल, पर्यटन, पेठा और जूता उद्योग की तस्वीर सामने आती है। लेकिन बदलती अर्थव्यवस्था और तेजी से बढ़ती तकनीक के इस दौर में क्या आगरा की पहचान केवल पर्यटन नगरी तक सीमित रहनी चाहिए?

क्या आने वाले वर्षों में आगरा उत्तर प्रदेश का एक महत्वपूर्ण सूचना प्रौद्योगिकी केंद्र बन सकता है?

मेरे विचार से इसका उत्तर हाँ है।

हालाँकि इसके लिए केवल एक सरकारी केंद्र या कुछ कंपनियों की मौजूदगी पर्याप्त नहीं होगी। आगरा को ऐसा पूरा वातावरण तैयार करना होगा, जहाँ तकनीकी शिक्षा प्राप्त युवा, नए उद्यमी, स्थानीय व्यवसाय, शिक्षण संस्थान, निवेशक और सरकार मिलकर काम कर सकें।

आगरा के लिए सूचना प्रौद्योगिकी क्यों महत्वपूर्ण है?

आगरा और आसपास के क्षेत्रों में हर वर्ष बड़ी संख्या में युवा इंजीनियरिंग, कंप्यूटर, प्रबंधन और अन्य व्यावसायिक शिक्षा पूरी करते हैं।

इनमें से बहुत से युवा तकनीकी क्षेत्र में अपना भविष्य बनाना चाहते हैं। लेकिन अच्छी नौकरी की तलाश में उन्हें नोएडा, दिल्ली, गुरुग्राम, बेंगलुरु, हैदराबाद और पुणे जैसे शहरों की ओर जाना पड़ता है।

यह केवल युवाओं के दूसरे शहर जाने की समस्या नहीं है। जब प्रतिभाशाली युवा

15 अगस्त 2026

आगरा: बदलाव भी चाहिए और बदलाव से परहेज़ भी

 

आगरा दुनिया के नक्शे पर अपनी अलग पहचान रखने वाला शहर है। ताजमहल के कारण इसे देखने हर साल देश-विदेश से लोग आते हैं। लेकिन आगरा की पहचान केवल ताजमहल तक सीमित नहीं है। यह इतिहास, संस्कृति, व्यापार, शिक्षा और पर्यटन का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। ऐसे में स्वाभाविक है कि आगरा के लोग भी अपने शहर को आधुनिक, सुविधाजनक और व्यवस्थित देखना चाहते हैं।

अक्सर बातचीत में सुनने को मिलता है—“आगरा को भी दिल्ली, जयपुर, लखनऊ या दूसरे बड़े शहरों जैसा होना चाहिए।” बेहतर सड़कें हों, यातायात व्यवस्थित हो, नए बाजार और मनोरंजन के साधन हों, साफ-सफाई हो और शहर में रोजगार व निवेश के नए अवसर आएँ।

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लेकिन सवाल यह है कि जब बदलाव वास्तव में शुरू होता है, तो हम उसका स्वागत कितनी आसानी से करते हैं?

यही आगरा की एक दिलचस्प विडंबना है। हम चाहते हैं कि सड़कें चौड़ी हों, लेकिन सड़क चौड़ी करने के लिए अगर किसी दुकान या अतिक्रमण को हटाना पड़े तो विरोध शुरू हो जाता है। हम चाहते हैं कि ट्रैफिक कम हो, लेकिन पार्किंग या यातायात के नियम सख्त हों तो परेशानी होती है। हम चाहते हैं कि शहर साफ-सुथरा दिखे, लेकिन अपनी जिम्मेदारी निभाने की बात आती है तो अक्सर सरकार को ही दोष देते हैं।

यानी हमारी अपेक्षा है कि शहर बदले, लेकिन हमारी रोजमर्रा की आदतों और सुविधाओं में बहुत ज्यादा बदलाव न आए।

किसी भी शहर में परिवर्तन आसान नहीं होता। नई सड़क, मेट्रो, फ्लाईओवर, पार्किंग व्यवस्था या किसी बाजार का पुनर्विकास—इन सबका असर लोगों की रोजमर्रा

14 अगस्त 2026

आगरा में भी चले मिनी टूरिस्ट ट्रेन, पर्यटन को मिल सकती है नई रफ्तार

 

आगरा का नाम सुनते ही दुनिया भर के पर्यटकों के सामने ताजमहल की खूबसूरत तस्वीर उभर आती है। मुगलकालीन इतिहास, शानदार स्थापत्य, पुराने बाजार और सांस्कृतिक विरासत के कारण आगरा भारत के प्रमुख पर्यटन शहरों में शामिल है। हर साल देश-विदेश से बड़ी संख्या में पर्यटक यहां पहुंचते हैं।

लेकिन सवाल यह है कि क्या आगरा में पर्यटकों को शहर और उसकी विरासत को देखने का कोई ऐसा नया और यादगार माध्यम मिल सकता है, जो यात्रा को और सुविधाजनक होने के साथ-साथ मनोरंजक भी बनाए?

इस दिशा में मिनी टूरिस्ट ट्रेन एक आकर्षक विकल्प हो सकती है।

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आगरा की सैर को मिल सकता है नया अनुभव :

कई प्रसिद्ध पर्यटन शहरों में पर्यटकों को प्रमुख स्थलों की सैर कराने के लिए छोटी टूरिस्ट ट्रेन या हेरिटेज ट्रेन जैसी सुविधाएं देखने को मिलती हैं। इसी तरह आगरा में भी एक विशेष मिनी टूरिस्ट ट्रेन शुरू की जा सकती है।

यह ट्रेन शहर के प्रमुख पर्यटन स्थलों को एक निर्धारित पर्यटन मार्ग से जोड़ सकती है। पर्यटक आराम से बैठकर शहर की ऐतिहासिक इमारतों, पुराने इलाकों और स्थानीय संस्कृति का आनंद ले सकेंगे।

खास बात यह होगी कि यात्रा केवल एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचने

21 जुलाई 2026

क्या सिर्फ पर्यटन के दम पर बदल सकता है आगरा का भविष्य ?

 

ताजमहल ने आगरा को दुनिया भर में पहचान दिलाई है, लेकिन अब आगरा के सामने एक बड़ा सवाल यह है कि क्या सिर्फ़ पर्यटन ही इसकी अर्थव्यवस्था को लंबे समय तक तेज़ी से आगे बढ़ा सकता है? जानकारों का मानना ​​है कि पर्यटन आगरा की ताकत हो सकता है, लेकिन पूरे शहर की आर्थिक तरक्की के लिए सिर्फ़ इसी पर निर्भर रहना जोखिम भरा हो सकता है। किसी बड़े शहर की आर्थिक तरक्की सिर्फ़ पर्यटकों की संख्या पर नहीं, बल्कि रोज़गार देने वाली आर्थिक गतिविधियों, उद्योगों, निवेश और आधुनिक सुविधाओं पर निर्भर करती है।

आगरा में पर्यटक तो आते हैं, लेकिन शहर को कितना आर्थिक फ़ायदा होता है? हर साल हज़ारों पर्यटक आगरा आते हैं, लेकिन एक बड़ी चुनौती यह है कि उनमें से कई सिर्फ़ ताजमहल देखने के लिए बहुत कम समय के लिए शहर में रुकते हैं। इसलिए, वे जो पैसा खर्च करते हैं, वह ज़्यादातर होटलों, ट्रांसपोर्ट सर्विस और कुछ बड़े आउटलेट्स तक ही सीमित रह जाता है। असली आर्थिक फ़ायदा तभी होगा जब पर्यटक

18 जुलाई 2026

आगरा को भारत का आईटी सिटी सिटी बनाना क्यों जरूरी ?

 

आगरा का नाम सुनते ही सबसे पहले ताजमहल और मुग़ल इतिहास की याद आती है। हर साल दुनिया भर से लाखों पर्यटक इस ऐतिहासिक जगह को देखने आते हैं, जिससे आगरा भारत का एक प्रमुख पर्यटन स्थल बन गया है। हालाँकि, डिजिटल अर्थव्यवस्था की ओर तेज़ी से बढ़ती दुनिया में यह सवाल उठता है: क्या आगरा सिर्फ़ पर्यटन तक ही सीमित रहेगा या यह टेक्नोलॉजी और इनोवेशन हब के तौर पर अपनी नई पहचान बना सकता है?

हम बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे, नोएडा और गुरुग्राम जैसे शहरों को देश के मुख्य IT डेस्टिनेशन के तौर पर देखते हैं। लेकिन आगरा शहर में भी वह क्षमता और सही इंफ्रास्ट्रक्चर मौजूद है, जिसका सही इस्तेमाल करके इसे उत्तर भारत का अगला IT और इंफॉर्मेटिक्स शहर बनाया जा सकता है।

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आगरा में क्या क्षमता है?

आगरा की सबसे बड़ी ताकत इसकी भौगोलिक स्थिति है। यह एक्सप्रेसवे और नेशनल हाईवे के ज़रिए दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम, लखनऊ और कानपुर

16 जुलाई 2026

आगरा: शिकायतों के बीच बसा एक गहरा अपनापन

 

आगरा के लोगों के पास अपने शहर की कमियां गिनाने की कोई कमी नहीं है। ट्रैफ़िक जाम की समस्या से लेकर शहर की गंदगी और बदलते स्वरूप पर निराशा तक,आगरा के ख़िलाफ़ उनकी शिकायतों की लंबी लिस्ट कभी खत्म नहीं होती। फिर भी, जब आगरा छोड़ने का समय आता है, तो कई निवासियों के लिए यहाँ से जाना हैरानी की हद तक मुश्किल हो जाता है।

आगरा सिर्फ़ एक शहर नहीं, बल्कि एक एहसास 

खासकर, यहाँ की सुबह का अपना ही एक अनोखा अंदाज़ होता है। सुबह की ठंडी हवा में तली जा रही कचौड़ियों की ललचाने वाली खुशबू, गरमा-गरम जलेबियों की मिठास और दोस्तों-पड़ोसियों के साथ चाय की चुस्कियों के बीच अनौपचारिक बातचीत—ये छोटे-छोटे पल ही आगरा में रहने की असली पहचान हैं। 

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                                यहाँ के कई निवासियों के लिए, नाश्ता सिर्फ़ खाने की चीज़ नहीं है—यह एक ऐसी परंपरा है जो लोगों को जोड़ती है और ज़िंदगी का अहम हिस्सा है। शहर की सबसे पुरानी दुकानों में से किसी एक पर बैठकर कचौड़ी-जलेबी का मज़ा लेना, स्थानीय लोगों से बातचीत करना और अपने हिसाब से दिन की शुरुआत करना—यही तो आगरा की ज़िंदगी है।

शायद यही वजह है कि जो लोग आगरा से बाहर रहते हैं, वे वापस आकर सीधे अपने शहर और अपनी मिट्टी की खुशबू की ओर खिंचे चले आते हैं।

4 जुलाई 2026

क्या आप जानते हैं ? आगरा के मोहल्लों के नाम कैसे पड़े

 

आगरा : किसी भी शहर की पहचान केवल उसकी इमारतों या स्मारकों से नहीं होती, बल्कि उसके मोहल्लों के नाम भी उस शहर के इतिहास की कहानी सुनाते हैं। आगरा भी ऐसा ही शहर है, जहाँ कई मोहल्लों के नाम सैकड़ों साल पुराने हैं। कुछ नाम मुगल काल की याद दिलाते हैं, कुछ स्थानीय व्यापार से जुड़े हैं, तो कुछ नामों के पीछे ऐसी कहानियाँ हैं जो आज भी लोगों की जुबान पर ज़िंदा हैं।आइए जानते हैं कि आगरा के कुछ प्रसिद्ध मोहल्लों के नाम कैसे अस्तित्व में आए।

लोहामंडी – जहाँ लोहे का व्यापार फलता-फूलता था

आगरा का लोहामंडी इलाका अपने नाम की तरह ही लोहे के व्यापार के लिए जाना जाता रहा है। इतिहासकारों का मानना है कि इस क्षेत्र में लोहे और धातु से जुड़े व्यापारी बड़ी संख्या में रहते थे। समय के साथ यह इलाका व्यापार का प्रमुख केंद्र बन गया और लोगों ने इसे "लोहामंडी" कहना शुरू कर दिया।आज भी यहाँ हार्डवेयर और धातु से जुड़े कई पुराने व्यवसाय देखने को मिल जाते हैं, जो इस नाम की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि की याद दिलाते हैं।

शाहगंज – एक ऐतिहासिक बाज़ार

"शाह" फ़ारसी भाषा का शब्द है, जिसका अर्थ राजा या शासक होता है, जबकि "गंज" का अर्थ बाज़ार या व्यापारिक क्षेत्र माना जाता है। उत्तर भारत के कई पुराने शहरों में "गंज" नाम वाले इलाके मिलते हैं।आगरा का शाहगंज भी लंबे समय से व्यापारिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। माना जाता है कि इसका विकास मुगल काल और उसके बाद के दौर में एक प्रमुख बाज़ार के रूप में हुआ।

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रकाबगंज – नाम में छिपा शाही संबंध

आगरा का रकाबगंज नाम लोगों के बीच हमेशा उत्सुकता का विषय रहा है।रकाब" फ़ारसी शब्द है, जिसका अर्थ घोड़े की रकाब (Stirrup) होता है। कुछ इतिहासकारों का मानना है कि यह नाम शाही अस्तबलों या घुड़सवारी से जुड़े लोगों के कारण पड़ा होगा। हालांकि इसके बारे में अलग-अलग मत भी मिलते हैं और किसी एक व्याख्या को अंतिम नहीं माना जाता। यही बात पुराने शहरों के इतिहास को और भी रोचक बना देती है।

बेलनगंज – नाम की कहानी आज भी चर्चा में

आगरा के बेलनगंज के नाम को लेकर अलग-अलग स्थानीय कहानियाँ प्रचलित हैं। कुछ लोग इसे किसी पुराने व्यापारी या स्थानीय परिवार से जोड़ते हैं, जबकि कुछ इसे यहाँ होने वाले विशेष व्यापार से जोड़कर देखते हैं।

हालाँकि इस नाम की उत्पत्ति पर इतिहासकारों में पूरी सहमति नहीं है। यही कारण है कि बेलनगंज आज भी स्थानीय इतिहास प्रेमियों के लिए एक दिलचस्प विषय बना हुआ है।

किनारी बाज़ार – जहाँ ज़री और किनारी की पहचान बनी

आगरा का किनारी बाज़ार केवल एक बाज़ार नहीं, बल्कि शहर की पारंपरिक कारीगरी का प्रतीक है।पुराने समय में यहाँ कपड़ों की किनारी, ज़री, गोटा और शादी-ब्याह में इस्तेमाल होने वाले सजावटी सामान की दुकानें बड़ी संख्या में थीं। इसी कारण इस क्षेत्र को "किनारी बाज़ार" कहा जाने लगा। आज भी यह इलाका अपनी पारंपरिक पहचान को काफी हद तक बनाए हुए है।

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हर नाम के पीछे एक कहानी

भारत के पुराने शहरों में मोहल्लों के नाम अक्सर किसी पेशे, बाज़ार, शासक, धार्मिक स्थल, परिवार या स्थानीय विशेषता के आधार पर रखे जाते थे। आगरा भी इससे अलग नहीं है। यही वजह है कि शहर के कई नाम आज भी हमें उसके व्यापार, संस्कृति और सामाजिक जीवन की झलक दिखाते हैं।

कुछ कहानियाँ इतिहास में, कुछ लोगों की यादों में दिलचस्प बात यह है कि हर मोहल्ले के नाम की पूरी जानकारी सरकारी रिकॉर्ड में नहीं मिलती। कई नामों की असली कहानी स्थानीय लोगों की यादों, पुराने दस्तावेज़ों और पीढ़ी-दर-पीढ़ी सुनाई जाने वाली बातों में आज भी जीवित है।




15 जून 2026

जेवर से उड़ान भरने का सपना हुआ साकार, नोएडा एयरपोर्ट ने शुरू की यात्री सेवाएं

 


नोएडा: उत्तर प्रदेश और दिल्ली-एनसीआर के लिए एक बड़ी उपलब्धि के रूप में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (NIA) ने व्यावसायिक उड़ान सेवाओं की शुरुआत कर दी है। एयरपोर्ट ने अपने पहले यात्रियों का स्वागत किया और इसके साथ ही यह देश के प्रमुख उभरते एविएशन हब के रूप में संचालन में आ गया। एयरपोर्ट से उड़ान संचालन शुरू करने वाली पहली एयरलाइन इंडिगो बनी। पहली आने वाली फ्लाइट लखनऊ से नोएडा पहुंची, जबकि पहली प्रस्थान करने वाली उड़ान बेंगलुरु के लिए रवाना हुई।

 इस मौके को क्षेत्र की हवाई कनेक्टिविटी के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। एयरपोर्ट प्रशासन के अनुसार, कमर्शियल संचालन शुरू करने से पहले सभी आवश्यक तकनीकी और परिचालन तैयारियां पूरी कर ली गई थीं। विभिन्न चरणों में किए गए परीक्षणों के दौरान यात्री सेवाओं, सुरक्षा व्यवस्थाओं, डिजिटल सिस्टम और एयरपोर्ट संचालन से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की गई, ताकि यात्रियों को सुरक्षित और सुगम यात्रा अनुभव मिल सके। शुरुआती चरण में एयरपोर्ट से घरेलू उड़ानों का संचालन किया जाएगा। हालांकि, आने वाले महीनों में अंतरराष्ट्रीय उड़ान सेवाएं भी शुरू करने की योजना है। इससे पश्चिमी उत्तर प्रदेश, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद और आसपास के क्षेत्रों के यात्रियों को सीधा फायदा मिलेगा।                                                                                                                        

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को आधुनिक सुविधाओं और डिजिटल तकनीकों से लैस किया गया है। यहां यात्रियों को डिजीयात्रा (DigiYatra) के माध्यम से पेपरलेस यात्रा, सेल्फ चेक-इन, सेल्फ बैगेज ड्रॉप

29 मई 2026

क्या डिजिटल भुगतान वास्तव में नकदी की जगह ले सकता है ?

 

पिछले कुछ वर्षों में भारत में डिजिटल भुगतान का उपयोग तेजी से बढ़ा है। किराना दुकानों से लेकर बड़े शोरूम तक, लगभग हर जगह QR कोड और ऑनलाइन भुगतान की सुविधा उपलब्ध है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या भविष्य में नकदी का उपयोग पूरी तरह समाप्त हो सकता है?

डिजिटल भुगतान का बढ़ता चलन

स्मार्टफोन और सस्ते इंटरनेट ने डिजिटल भुगतान को आम लोगों तक पहुंचाया है। आज लोग मोबाइल ऐप के माध्यम से बिजली बिल जमा कर सकते हैं, टिकट बुक कर सकते हैं और दुकानों पर तुरंत भुगतान कर सकते हैं।

इस सुविधा ने समय की बचत के साथ लेनदेन को भी आसान बनाया है।

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नकदी की अपनी उपयोगिता

हालांकि डिजिटल भुगतान तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन नकदी की उपयोगिता अभी भी बनी हुई है। ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट की उपलब्धता और डिजिटल साक्षरता हर जगह समान नहीं है।

कई लोग आज भी नकद लेनदेन को अधिक सुविधाजनक और सुरक्षित मानते हैं।

डिजिटल भुगतान के फायदे

डिजिटल भुगतान से लेनदेन का रिकॉर्ड सुरक्षित रहता है। लोगों को बड़ी मात्रा में नकदी साथ रखने की आवश्यकता नहीं पड़ती। ऑनलाइन भुगतान के कारण कई सेवाएं पहले से अधिक तेज और सुविधाजनक हो गई हैं।

व्यापारियों को भी भुगतान प्राप्त करने में आसानी होती है।

चुनौतियां क्या हैं?

साइबर धोखाधड़ी और ऑनलाइन ठगी डिजिटल भुगतान की बड़ी चुनौतियों में से एक हैं। कई बार

25 मई 2026

जो पियेगा हमारी लस्सी, वो जिएगा 80 – मथुरा के प्रसिद्ध नत्थू यादव

 

Mathura के प्रसिद्ध चौक बाजार में स्थित नत्थू यादव लस्सी वाले अपनी पारंपरिक देसी लस्सी के कारण खास पहचान बना चुके हैं। गर्मियों के दिनों में यहां सुबह से ही लोगों की भीड़ उमड़ने लगती है, क्योंकि शहर में आने वाला लगभग हर पर्यटक उनकी मशहूर लस्सी का स्वाद जरूर चखना चाहता है।

इनका लोकप्रिय संवाद — “जो पियेगा हमारी लस्सी, वह जिएगा 80” — आज भी लोगों की जुबान पर बना रहता है। यह सिर्फ एक लाइन नहीं, बल्कि उनकी लस्सी के स्वाद और भरोसे की पहचान बन चुकी है। वर्षों पुरानी यह दुकान आज भी अपने देसी अंदाज और पारंपरिक स्वाद को उसी तरह बनाए हुए है।

यहां मिलने वाली गाढ़ी, ठंडी और मलाईदार लस्सी मिट्टी के कुल्हड़ में परोसी जाती है, जिससे इसका स्वाद और भी खास हो जाता है। कुल्हड़ की सोंधी खुशबू और ऊपर जमी ताजी मलाई हर घूंट को यादगार बना देती है।

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सुबह से देर शाम तक दुकान पर ग्राहकों की लंबी कतार लगी रहती है। स्थानीय लोगों के साथ-साथ श्रद्धालु और देश-विदेश से आने वाले पर्यटक भी

कान्स फिल्म फेस्टिवल 2026 में आराध्या बच्चन का स्टाइलिश डेब्यू बना इंटरनेट सेंसेशन

 

Aishwarya Rai Bachchan एक बार फिर कान्स फिल्म फेस्टिवल में अपने शानदार अंदाज को लेकर चर्चा में रहीं, लेकिन इस बार उनकी बेटी आराध्या बच्चन ने भी लोगों का खूब ध्यान खींचा। पहली बार रेड कार्पेट पर ऑफिशियल एंट्री करने वाली आराध्या का ग्लैमरस लुक सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

कान्स में आयोजित L'Oréal Paris के Lights on Women’s Worth कार्यक्रम में मां-बेटी की यह खूबसूरत जोड़ी नजर आई। जैसे ही दोनों की तस्वीरें और वीडियो सामने आए, फैंस ने सोशल मीडिया पर जमकर प्रतिक्रिया देना शुरू कर दिया।

ऐश्वर्या राय ने इस खास मौके पर पेस्टल पिंक शेड का बेहद एलिगेंट गाउन पहना था। Sophie Couture द्वारा डिजाइन किए गए इस आउटफिट में क्रिस्टल फ्लोरल डिटेलिंग और लंबी केप ने उनके पूरे लुक को रॉयल फील दिया। हमेशा की तरह ऐश्वर्या का स्टाइल और कॉन्फिडेंस लोगों को काफी पसंद आया।

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वहीं दूसरी ओर 14 वर्षीय आराध्या बच्चन रेड कलर के स्टाइलिश गाउन में बेहद ग्रेसफुल दिखाई दीं। खुले वेवी हेयर और सिंपल मेकअप के साथ उनका लुक काफी क्लासी नजर आया। रेड कार्पेट पर उनकी सहज मुस्कान

22 मई 2026

Cannes Film Festival 2026 में Amma Ariyan ने क्यों जीता सबसे ज्यादा दिल

 

Cannes Film Festival 2026 (79th edition) दुनिया का सबसे प्रतिष्ठित फिल्म समारोह माना जाता है, जहाँ हर साल विभिन्न देशों की बेहतरीन फिल्में प्रदर्शित की जाती हैं। इस बार भी भारत ने इस मंच पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई, लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा और भावनात्मक प्रतिक्रिया जिस भारतीय फिल्म को मिली, वह थी मलयालम सिनेमा की क्लासिक फिल्म Amma Ariyan

Amma Ariyan मूल रूप से 1986 में प्रसिद्ध निर्देशक John Abraham द्वारा बनाई गई फिल्म है, जिसे भारतीय parallel cinema की सबसे महत्वपूर्ण फिल्मों में गिना जाता है। यह फिल्म किसी सामान्य कहानी से आगे बढ़कर समाज, राजनीति और मानवीय भावनाओं को बहुत ही वास्तविक और गहराई से प्रस्तुत करती है। इसकी कहानी एक युवा की यात्रा के माध्यम से जीवन, मृत्यु और समाज की सच्चाइयों को समझने की कोशिश करती है।

समय के साथ यह फिल्म लगभग खो चुकी थी क्योंकि इसके original prints लंबे समय तक उपलब्ध नहीं थे। लेकिन फिल्म संरक्षण से जुड़े विशेषज्ञों ने वर्षों की मेहनत के बाद इसका 4K restored version तैयार किया। इसी restored संस्करण को Cannes 2026 के “Cannes Classics” सेक्शन में दिखाया गया, जो पुरानी और ऐतिहासिक फिल्मों को सम्मान देने के लिए जाना जाता है।

Cannes 2026 में Amma Ariyan की स्क्रीनिंग एक बेहद भावनात्मक और यादगार पल बन गई। फिल्म खत्म होने के बाद दर्शकों ने लंबे समय तक standing ovation दिया, जो इस बात का संकेत था कि फिल्म ने अंतरराष्ट्रीय दर्शकों को गहराई से प्रभावित किया। कई फिल्म समीक्षकों ने

16 मई 2026

ताजमहल को पहली बार देखकर लोगों के मुंह से अपने आप निकलता है “वाह!”

 

भारत में खूबसूरत इमारतों और ऐतिहासिक धरोहरों की कोई कमी नहीं है, लेकिन जब बात दुनिया के सबसे सुंदर स्मारकों की आती है, तो  ताजमहलका नाम सबसे पहले लिया जाता है। सफेद संगमरमर से बना यह अद्भुत स्मारक केवल एक इमारत नहीं, बल्कि प्रेम, कला और वास्तुकला का ऐसा संगम है जिसे देखकर आज भी लोग मंत्रमुग्ध हो जाते हैं।

कई लोग तस्वीरों और वीडियो में ताजमहल को देखकर सोचते हैं कि असल में यह शायद इतना खास नहीं होगा। लेकिन जैसे ही कोई व्यक्ति ताजमहल के मुख्य दरवाजे से अंदर प्रवेश करता है और सामने उसकी पहली झलक दिखाई देती है, उसके मुंह से अनायास ही एक शब्द निकलता है  “वाह!” शायद यही ताजमहल की सबसे बड़ी खूबी है। उसकी भव्यता को शब्दों में पूरी तरह बयान करना आसान नहीं।

सुबह की हल्की धूप में चमकता हुआ ताजमहल, शाम के बदलते रंगों में उसका अलग रूप, और पूर्णिमा की रात में उसकी खूबसूरती , हर समय यह स्मारक अलग एहसास देता है। खास बात यह भी है कि आसमान से देखने पर ताजमहल की बनावट और भी अद्भुत दिखाई देती है। ऊपर से देखने पर उसकी पूर्ण समरूपता, चारों मीनारें और बीच में चमकता सफेद गुंबद किसी

15 मई 2026

तेरहमोरी बांध के गेटों की मरम्मत और मूल स्ट्रैक्चर के अनुरक्षण का निर्देश

--भूजलस्तर में सुधार के अलावा आगरा का वायु प्रदूषण थामने को जरूरी:डा.मंजू भदौरिया 

सि.सो. के  सैकेट्री स्व.अनिल शर्मा  एवं  अध्यक्ष डा शिरोमणी
 सिंह ने पूर्व में किया था,बांध का निरक्षण।फोटो असलम सलीमी

जनपद की सबसे अधिक पानी भंडारण क्षमता (Water Storage Capacity) और जल अंतःस्यंदन क्षमता (Water Infiltration Capacity) वाली जलसंचय संरचना तेरह मोरी बांध सुचारू करने संबधी संभावनाये एक बार फिर बन गयी हैं, जिला सिंचाई बंधू की 12 मई को हुई बैठक में जिला पंचायत अध्यक्ष डा.मंजू भदौरिया ने सिंचाई विभाग को निर्देशित किया है कि तेरहमोरी बांध को सुचारू करने के लिये एस्टीमेट बनाये तथा पुरातत्व सर्वेक्षण से कार्यशुरू करने के लिये अनापत्ति प्राप्त करने को पत्र पत्र प्रेषित करें।

 डा भदौरिया ने कहा कि ताज ट्रिपेजियम जोन के तहत आने वाली यह जनपद की सबसे महत्वपूर्ण जल संचय संरचना है,बांध में मानसून काल में जलसंचय न होने के कारण संपूर्ण फतेहपुर सीकरी क्षेत्र का भूजल स्तर लगातार गिर रहा है।हैंडपंप निष्प्रयोज्य सावत हो रहे हैं,यांत्रिक जलदोहन भी अधिकांश गांवों में चूनौती से भरपूर

क्या भारत के स्कूलों में मोबाइल फोन पूरी तरह बैन होने चाहिए ?

 

आज के समय में मोबाइल फोन बच्चों की जिंदगी का एक बड़ा हिस्सा बन चुका है। ऑनलाइन पढ़ाई, इंटरनेट और डिजिटल जानकारी के कारण मोबाइल कई मामलों में उपयोगी साबित हुआ है। लेकिन दूसरी तरफ स्कूलों में मोबाइल फोन का बढ़ता इस्तेमाल चिंता का विषय भी बनता जा रहा है। कई शिक्षक मानते हैं कि मोबाइल की वजह से बच्चों का ध्यान पढ़ाई से भटक रहा है और उनकी एकाग्रता कम हो रही है।

स्कूलों में अक्सर देखा जाता है कि बच्चे पढ़ाई के दौरान सोशल मीडिया, गेम्स या वीडियो में व्यस्त हो जाते हैं। इससे न केवल उनका समय खराब होता है, बल्कि पढ़ाई का माहौल भी प्रभावित होता है। कुछ मामलों में मोबाइल के गलत इस्तेमाल से साइबर बुलिंग और नकल जैसी समस्याएँ भी सामने आती हैं। यही कारण है कि कई लोग स्कूलों में मोबाइल फोन पूरी तरह बैन करने की मांग करते हैं।

वहीं दूसरी ओर कुछ लोगों का मानना है कि मोबाइल को पूरी तरह गलत कहना भी सही नहीं है। अगर सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए, तो मोबाइल बच्चों के लिए सीखने का अच्छा माध्यम बन सकता है। आज कई शैक्षणिक ऐप्स, ऑनलाइन क्लास और डिजिटल नोट्स

14 मई 2026

जापान में स्कूलों में बच्चे खुद क्यों साफ करते हैं अपनी क्लास? वजह

 

अगर आप कभी Japan के किसी स्कूल में जाएं, तो वहां एक ऐसी चीज़ देखने को मिलेगी जो दुनिया के कई देशों के लोगों को हैरान कर देती है। क्लास खत्म होने के बाद बच्चे खुद झाड़ू लगाते हैं, फर्श साफ करते हैं, डेस्क पोंछते हैं और कई स्कूलों में टॉयलेट तक साफ करते हैं। सबसे दिलचस्प बात यह है कि वहां ज्यादातर स्कूलों में अलग से सफाई कर्मचारी नहीं होते।

पहली नजर में यह थोड़ा अजीब लग सकता है। कई लोगों को लगता है कि इतना विकसित और अमीर देश होने के बावजूद जापान स्कूलों में cleaners क्यों नहीं रखता। लेकिन इसके पीछे वजह पैसे बचाना नहीं है। असल में यह जापान की शिक्षा और संस्कृति का हिस्सा है।

जापान में माना जाता है कि शिक्षा सिर्फ किताबों और exams तक सीमित नहीं होनी चाहिए। बच्चों को बचपन से जिम्मेदारी, अनुशासन और दूसरों के काम का सम्मान करना भी सिखाया जाना चाहिए। यही कारण है कि वहां सफाई को punishment नहीं बल्कि learning process का हिस्सा माना जाता है।

जापानी स्कूलों में हर दिन एक खास समय होता है जिसे “Osoji Time” कहा जाता है। इस दौरान बच्चे और शिक्षक मिलकर पूरे स्कूल की सफाई करते हैं। कोई floor साफ करता है, कोई windows पोंछता है और कोई desks ठीक करता है। कई बार प्रिंसिपल भी इसमें शामिल होते हैं। वहां किसी काम को छोटा या बड़ा नहीं माना जाता।

इस आदत का बच्चों पर गहरा असर पड़ता है। जब बच्चों को पता होता है कि गंदगी उन्हें खुद साफ करनी है, तो वे चीजों को ज्यादा संभालकर इस्तेमाल करते हैं। वे बिना वजह कचरा फैलाने

5 मई 2026

सत्यजीत रे जयन्ती जयंती मनाई, आशा भोंसले को समर्पित गानों का भी हुआ प्रस्तुतिकरण

--सांस्कृतिक सरोकार को समर्पित हम लोगसंस्था ने किया आयोजन 

सत्यजीत रे के सृजन पर आयोजित संगोष्ठी के सहभागी
'हमलोग ' के द्वारा किये गये सम्मानित।

आगरा। साहित्यिक सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्था, हम लोग के तत्वावधान में सत्यजीत रे जयन्ती पर उनके कृत्वि और व्यक्तित्व पर संगोष्ठी, स्व. आशा भोंसले को गीतांजलि के कार्यक्रम आयोजित किये गये।मशहूर फिल्म डायरेक्टर ऑस्कर प्राप्त लेखक सत्यजीत रे की जन्म जयंती पर स्थापित संस्था हम लोग के तत्वाधान में बाग मुजफफरखॉ में सत्यजीत रे कतित्व और व्यक्तित्व पर स्थित सांस्कृतिक केंद्र पर संगोष्ठी व संगीत सुर मलिका दिवंगत सुर माल्ल्किा आशा भोंसले को समर्पित गीत व संगीत संध्या का आयोजन किया गया। जिसका उद्‌घाटन मां शारदे व दोनों दिवंगत हस्तियों के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित व माल्यार्पण कर मुख्य मुख्य अतिथि समाज सेविका सांस्कतिक कर्मी संध्या जोशी व फिल्म जगत से जुड़े शैलेन्द्र नरवार, नितिन मेहरा, संस्था अध्यक्ष अनिल अरोरा 'संघर्ष

26 अप्रैल 2026

भारत की आत्मा को कैमरे में कैद करने वाले रघु राय का निधन

 

भारतीय फोटोग्राफी जगत के दिग्गज रघु राय अब हमारे बीच नहीं रहे। उनके निधन से कला, मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में गहरा शोक व्याप्त है। रघु राय ने अपने कैमरे के माध्यम से भारत के सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक जीवन को इस तरह प्रस्तुत किया कि उनकी तस्वीरें केवल दृश्य नहीं, बल्कि एक जीवंत कहानी बन जाती थीं। रघु राय का जन्म 1940 के दशक में हुआ और उन्होंने अपने करियर की शुरुआत पत्रकारिता से की। बाद में उन्होंने फोटोग्राफी को अपना माध्यम बनाया और बहुत कम समय में ही अपनी एक अलग पहचान स्थापित कर ली। उनके बड़े भाई S. Paul से उन्हें इस क्षेत्र में प्रेरणा मिली।

वे अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त संस्था Magnum Photos के सदस्य रहे, जो दुनिया के चुनिंदा श्रेष्ठ फोटोग्राफरों को ही स्थान देती है। उनकी तस्वीरों में आम लोगों का जीवन, देश की राजनीति और ऐतिहासिक घटनाएं गहराई से झलकती हैं।1984 की Bhopal Gas Tragedy को उन्होंने जिस संवेदनशीलता के साथ अपने कैमरे में कैद किया, वह आज भी फोटो जर्नलिज्म का एक महत्वपूर्ण दस्तावेज माना जाता है। उनकी तस्वीरों ने दुनिया को इस त्रासदी की भयावहता से रूबरू कराया।

रघु राय को Taj Mahal से विशेष प्रेम था। उन्होंने इस ऐतिहासिक धरोहर को अलग-अलग रोशनी, मौसम और भावनात्मक दृष्टिकोण से चित्रित किया। उनकी तस्वीरों में ताजमहल केवल एक स्मारक नहीं, बल्कि प्रेम और समय की गहराई का प्रतीक बनकर उभरता है। उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें Padma Shri से सम्मानित किया था। उनकी तस्वीरें आज भी दुनिया भर की प्रदर्शनियों, संग्रहालयों और प्रकाशनों में जीवित हैं।

25 अप्रैल 2026

आगरा के स्वर्गीय वैध राम गोपाल चतुर्वेदी ने बनाया था पहला दाल का मसाला

 यदि आप दाल के शौकीन हों तो अवश्य जानें कि भारत में दाल का मसाला सबसे पहले 1908 में आगरा के स्वर्गीय वैध पंडित राम गोपाल चतुर्वेदी ने बनाया था। 1937 में उनकी मृत्यु  के बाद, उनके बेटे, स्वर्गीय पंडित महेश पहलवान ने मसालों को भारत के हर घर तक पहुंचाने के लिए कड़ी मेहनत की। 1983 में पंडित महेश पहलवान भी गुज़र गए। अभी, मसाले पंडित महेश के बेटों और पोतों की देखरेख में बनाये जाना जारी  हैं। शुरुआत में, दाल मसाला, रामवन वटी, हाजमा चूर्ण, लवण भास्कर चूर्ण, सुलेमानी चटनी, अनार दाना गोली, वगैरह जैसे कुछ ही प्रोडक्ट बनते थे। आगरा के इस परिवार ने अनोखे मसाले का स्वाद हर घर तक पहुँचाने के लिए बहुत मेहनत की।

 क्योंकि सारा काम परिवार के लोग ही करते थे। इसे कभी भी पूरे प्रोफेशन की तरह नहीं लिया गया, बल्कि एक मिशन की तरह लिया गया जहाँ रॉ-मटेरियल की क्वालिटी, प्योरिटी और खरीद पर पूरा ध्यान दिया जाता है। साथ ही, बनाने का प्रोसेस परिवार के लोगों की देखरेख में होता है। इसीलिए कोई भी प्रोडक्ट की क्वालिटी को चैलेंज नहीं कर सकता। अभी, 'चौबे जी के मसाला' कंपनी चाट मसाला, गरम मसाला, चना मसाला, कसूरी मैथी, हल्दी पाउडर, धनिया पाउडर, मरिच पाउडर, आमचूर, जीरा, अजवाइन, राई, सौंफ वगैरह जैसे कई मसालों को प्रोसेस और पैक कर रही है। सभी प्रोडक्ट्स भारत सरकार के एगमार्क से अप्रूव्ड हैं।

17 अप्रैल 2026

आगरा में बढ़ता कैफे कल्चर: ऐतिहासिक शहर में बदलती युवा जीवनशैली

 

आगरा, जिसे दुनिया ताज महल  के लिए जाना जाता है, अब केवल एक ऐतिहासिक पर्यटन शहर तक सीमित नहीं रहा। पिछले कुछ वर्षों में शहर में कैफे संस्कृति तेजी से बढ़ी है और यह युवाओं की नई जीवनशैली का हिस्सा बन गई है। शहर के कमला नगर, सदर बाजार, सिविल लाइंस और फतेहाबाद रोड जैसे इलाकों में कई आधुनिक कैफे खुल चुके हैं। इनमें एस्प्रेसो कॉफी एंड किचन, शीरोज़ हैंगआउट कैफे, टीज़ मी कैफे, और कैफे बेली जैसे स्थान युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय हो रहे हैं। इन कैफे में केवल भोजन ही नहीं बल्कि बैठकर काम करने, पढ़ाई करने और दोस्तों के साथ समय बिताने का चलन भी तेजी से बढ़ रहा है।

पहले आगरा में पारंपरिक चाय की दुकानों, पुरानी गलियों और घरों की बैठकों में सामाजिक मेलजोल होता था, लेकिन अब यह तस्वीर धीरे-धीरे बदल रही है। पुराने पारंपरिक सामाजिक मिलन के तरीके अब आधुनिक कैफे संस्कृति में बदलते जा रहे हैं। यह बदलाव दिखाता है कि शहर की पुरानी परंपराएं धीरे-धीरे नए दौर की जीवनशैली के साथ खुद को ढाल रही हैं।सोशल मीडिया ने इस बदलाव को और गति