--भूजलस्तर में सुधार के अलावा आगरा का वायु प्रदूषण थामने को जरूरी:डा.मंजू भदौरिया
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| सि.सो. के सैकेट्री स्व.अनिल शर्मा एवं अध्यक्ष डा शिरोमणी सिंह ने पूर्व में किया था,बांध का निरक्षण।फोटो असलम सलीमी |
जनपद
की सबसे अधिक पानी भंडारण क्षमता (Water
Storage Capacity) और जल अंतःस्यंदन क्षमता (Water Infiltration Capacity) वाली जलसंचय संरचना’ तेरह मोरी बांध’ सुचारू
करने संबधी संभावनाये एक बार फिर बन गयी हैं,
जिला सिंचाई बंधू की 12 मई को हुई
बैठक में जिला पंचायत अध्यक्ष डा.मंजू भदौरिया ने सिंचाई विभाग को निर्देशित किया
है कि तेरहमोरी बांध को सुचारू करने के लिये एस्टीमेट बनाये तथा पुरातत्व
सर्वेक्षण से कार्यशुरू करने के लिये अनापत्ति प्राप्त करने को पत्र पत्र प्रेषित
करें।
डा भदौरिया ने कहा कि ताज ट्रिपेजियम जोन के तहत आने वाली यह जनपद की सबसे महत्वपूर्ण जल संचय संरचना है,बांध में मानसून काल में जलसंचय न होने के कारण संपूर्ण फतेहपुर सीकरी क्षेत्र का भूजल स्तर लगातार गिर रहा है।हैंडपंप निष्प्रयोज्य सावत हो रहे हैं,यांत्रिक जलदोहन भी अधिकांश गांवों में चूनौती से भरपूर
हो चुका है।उन्होंने उम्मीद जतायी कि जलभंडारण शुरू हो जाने के बाद फतेहपुर सीकरी के अधिकांश गांवों की जलस्तर स्थिति सुधरेगी।सिंचाई विभाग राजस्थान(भरतपुर जनपद) के अजान बांध का पानी आना बन्द हो जाने का तर्क देकर तेरहमोरी बांध का अनुरक्षण
| जि.पं.अध्यक्ष डा मंजू भदौरिया |
--नगर
पालिका चेयरमैन की चिंता
फतेहपुर
सीकरी नगर पालिका परिष्द की अध्यक्ष शवाना इस्लाम ने तेरहमोरी बांध को जलसंचय
उपयुक्त बनाने के लिये सैकेट्री ताज ट्रिपेजियम जोन पाधिकरण को पत्र लिख कर आवश्यक
कार्रवाही करने का अनुरोध किया था।उन्हों ने कहा था कि यदि फाटकों की मरम्मत कर दी जाए तो न केवल भूजल स्तर में
सुधार होगा, बल्कि
क्षेत्र में उड़ने वाले सूक्ष्म धूल कणों पर भी नियंत्रण संभव हो सकेगा।जिनके कारण
आगरा के वायु प्रदूषण पर प्रतिकूल प्रभाव पडता है।इस पत्र को संज्ञान में लेकर टी
टी जैड अथार्टी की ओर से सिंचाई विभाग के तृतीय सिंचाई मंडल (3rd Circle, Irrigation) के अधिशासी अभियन्ता लोअर खण्ड आगरा नहर को बांध को मानसून
कालीन वर्षाजल के संचय को कार्ययोजना बनाये जाने को कहा गया था।
उल्लेखनिय
है कि तेरहमारी बांध में मानसून कालीन पानी को संचय कर ,अक्टूवर
महीने में खारी नदी में डिसचार्ज कर दिया जाता है,जो लगभग 80 कि मी बहकर
मोतीपुरा गांव (फतेहाबाद विकास खंड) में उटंगन नदी में गिरती है।यह नदी जिनगांवों
से होकर गुजरती है,उनसभी गांवों स्वत:ही भूजल रिचार्ज हो जाता है और
हैंडपंप कार्यकरने लगते थे।लकिन तेरहमोरी बांध के गेट क्षतिग्रस्त हो जाने के बाद
से स्थानिय भूगर्भ जल रिचार्ज का पूरा सिस्टम ही समाप्त हो गया ।
--सिविल
सोसायटी आफ आगरा की चिंता
सिविल
सोसायटी के द्वारा तेरहमोरी बांध का मुद्दा जिला पंचायत अध्यक्ष के समक्ष उठाने के
अलाव ताज ट्रिपेजियम जोन अथार्टी के समक्ष भी उठाया। सोसायटी के पूर्व सैकेट्री
स्व अनिल शर्मा का कहना था कि सीकरी हिस्सा चतुर्थ (Sikri
Hissa IV), दादूपुरा (Dadupura), नागर (Nagar),
दूरा (Doora),,पाली,पतसाल आदि सहित कई अन्य गांवों का मानसून कालीन जल
तेरहमोरी बांध में पहुंचता है।यह जल राशि इतनी होती है ,जो कि तेरहमोरी बांध को पानी से भरपूर रखने को
पर्याप्त है।
फतेहपुर
सीकरी जिस पथरीली पहाड़ी (Rocky
Ridge) पर बसा हुयी है, वह मूल रूप से विंध्य पर्वत श्रृंखला (Vindhyan Range) का ही एक हिस्सा है,
जो लाल बलुआ पत्थरों (Red Sandstone) से बनी है। यह उत्तर-पूर्व (North-East)
से दक्षिण-पश्चिम (South-West) दिशा की ओर फैली हुई है। इसकी कुल लंबाई लगभग 3 किलोमीटर (1.9
मील)है,जबकि चौडाई लगभग 1 किलोमीटर ( 0.62 मील)तथा
आसपास के निचले जमीनी स्तर से लगभग 40 मीटर (131 फीट) ऊंची है.। इसमें भी सबसे दिलचस्प तथ्य यह है कि पहाडी के दक्षिण
पश्चिम के ढालानों का वर्षा जल तो स्वभाविक बहाव के कारण सीधा तेरह मोरी बांध में
पहुंचता है,जबकि उत्तर पूर्वी ढालान का पानी चार हिस्सा रोड पर
बनी कल्वर्ट (भैसा मोरी) से होकर तेरहमारी बांध में योगदान देता है।
सिविल
सोसायटी आफ आगरा के अध्यक्ष डा शिरोमणी सिंह,असलम सलीमी एवं पर्यावरण विधि विशेषज्ञ अभिनय प्रसाद
एड. का कहना है कि उनका और अनिल का प्रयास था,कि तेरह मोरी बांध पुनरुद्धार
परियोजना (Tehra Mori Dam
Revival Project)बनाकर कार्य हो किंतु मुख्य
कार्य यानि सैल्यूस गेटो की मरम्मत तथा
बाध के ढाचे का अनुरक्षण जैसे सीमित व्यय के कार्य करवा के फिलहाल बांध सुचारू
किया जा सकता है।
