लगता है हार के कारण समाजवादी पार्टी में फिर होगी कलह। शिवपाल सिंह यादव ने पार्टी की कमान अपने और मुलायम सिंह के हाथ लेने की कोशिशें शुरू कर दी हैं। अखिलेश की जबरदस्त हार के बाद उन्होंने एक मिनट भी साँस नहीं ली और तत्काल अमिताभ बच्चन की आवाज वाला और खुद को केंद्र में रखते हुए एक वीडियो सोशल मीडिया पर साँझा कर दिया। इस विडियो में उन्होंने मुलायम सिंह द्वारा बनाई समाजवादी पार्टी की पुरानी चमक को दुबारा प्राप्त करने और सत्ता में वापसी का संकल्प लिया। अब उनकी निगाह लगी है 2019 के लोकसभा चुनाव पर। हो सकता है वह अमर सिंह जैसे पुराने खिलाडियों से संपर्क कर सकते हैं। मुलायम सिंह और शिवपाल सिंह लखनऊ लौटकर पार्टी की हार के कारणों की समीक्षा करेंगे। उधर अखिलेश भी पार्टी की कमान आसानी से छोड़ने वाले नहीं हैं। वह लोकसभा चुनाव के लिए नई राण नीति तैयार कर सकते हैं।यदि पारवारिक कलह जारी रही तो अगला चुनाव भी महँगा पद सकता सपा को।
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13 मार्च 2017
12 मार्च 2017
मोदी लहर को अकेले नहीं रोक सकती हैं पार्टियां
मायावती के लिए उत्तर प्रदेश चुनाव एक भारी झटका है। मोदी की तेज हवा से जूझने के लिए 2019 के लोकसभा चुनाव में सपा और कांग्रेस के साथ बसपा यूपी में यदि महागठजोड़ नहीं बनाते हैं तो इन तीनों पार्टियों का मोदी के सामने अकेला टिकना बहुत मुश्किल होगा। ये पार्टियां मोदी की चलती आंधी को देखकर पूरी तरह पस्त हो चुकी हैं। मायावती जो कि सरकार बनाने की उम्मीद में थीं उनका तीसरे नंबर पर खिसकने से बसपा खस्ता हालत में नज़र आती है। मुलायम ने भी जब चुनाव का रिजल्ट सुना तो उनके पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई। उन्हें ऐसी हार का अनुमान सपने में भी नहीं था। मुलायम ने अखिलेश की बिलकुल आलोचना नहीं की और कहा हार के लिए कोई जिम्मेदार नहीं है। इस चुनाव में जनता का झुकाव भाजपा की ओर था और हम लोग मतदाताओं को समझाने में सफल नहीं रहे। उन्होंने कहा हमने हमेशा संघर्ष किया है और हम फिर संघर्ष करेंगे और अपनी जीत फिर से हांसिल करेंगे।
6 फ़रवरी 2017
अखिलेश ने काम किया है तो जनता अवश्य जिताएगी
उत्तर प्रदेश के अगले सीएम अखिलेश यादव होंगे। यह कहा फिर से मुलायम सिंह ने। मुलायम को अखिलेश के प्रति गुस्सा और प्यार दोनों है। उन्होंने कहा कि यदि अखिलेश ने प्रदेश ने अच्छा काम किया है तो जनता उन्हें जिताएगी। अब मुलायम ने सपा कांग्रेस के गठबंधन के समर्थन में प्रचार 13 फरवरी से करने की घोषणा की है। शिवपाल के बारे में उन्होंने बोलते हुए कहा कि वह सपा के कैंडिडेट हैं। शिवपाल अखिलेश से गुस्सा थे इसी कारण उन्होंने अलग से दूसरी पार्टी बनाने की घोषणा की थी। लेकिन अब उनका गुस्सा शांत हो गया है। शिवपाल के लिए मुलायम के लिए 11 फरवरी से चुनाव प्रचार शुरू करेंगे और उसके बाद सपा-कांग्रेस गठबंधन के पक्ष में के लिए प्रचार करेंगे। मुलायम घरेलू झगडे से बहुत परेशान चल रहे हैं। एक तो पारवारिक झगड़ा और दूसरा सपा-कांग्रेस गठबंधन उनके मन नहीं भ रहा है।
16 जनवरी 2017
मुस्लिम वोट अबभी जुड़ा है मुलायम के साथ
चुनाव आयोग द्वारा अखिलेश की सपा को असली सपा घोषित करने का कारण उनके पक्ष में सारे दस्तावेज देना था। मुलायम सिंह ने आखिरी तक अपने पक्ष में पूरे दस्तावेज़ नहीं प्रस्तुत किये। यदि मुलायम का पक्ष मज़बूत होता तो साइकिल चुनाव चिन्ह फ्रीज किया जा सकता था। चुनाव आयोग के 42 पेज के आदेश से यह बात साफ होती है कि मुलायम की दावेदारी में ज्यादा ताकत नहीं थी। अखिलेश द्वारा सर्मथकों के शपथपत्रों से उनका दावा काफी मजबूत हुआ जबकि मुलायम सिंह यादव के गुट की ओर से सिर्फ यही कहा जाता रहा कि सपा पर अब भी नेताजी की पकड़ है और वे ही पार्टी के सर्वे सर्वा हैं।चुनाव आयोग अनुसार अखिलेश यादव की ओर से जमा किये गये शपथपत्रों की सत्यता पर मुलायम सिंह ने सवाल तो उठाये लेकिन इस आपत्ति को लेकर चुनाव आयोग कभी संतुष्ट नहीं किया। बताया जाता है उत्तर प्रदेश का मुस्लिम वोट को मुलायम सिंह से हटाना अखिलेश के लिए आसान काम नहीं है।
मुलायम में है अब भी ताकत,अखिलेश के खिलाफ लड़ेंगे चुनाव
आखिर साइकिल मिली अखिलेश यादव को। चुनाव आयोग ने यह फैंसला सुनाकर मुलायम सिंह को परेशानी में डाल दिया। किन्तु मुलायम मजहे हुए राजनीतिज्ञ हैं। वह हार मानने वाले नहीं। मुलायम सिंह यादव ने यहाँ तक संकेत दिये हैं कि वह अपने पुत्र के अखिलेश यादव के विरुद्ध विधानसभा चुनाव लड़ेंगे। सुना गया है मुलायम सिंह यादव ने कहा है कि अखिलेश यादव साईकिल संभाले। पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ बैठक में मुलायम ने संकेत दिया था कि यदि अखिलेश यादव उनकी बात नहीं मानते हैं तो वह उनके खिलाफ चुनाव लड़ेंगे। सपा प्रवक्ता अनुसार हमारी पार्टी महागठबंधन कर सकती है जिसका अंतिम फैसला अखिलेश यादव करेंगे।
मुस्लिम वोट के लिए मुलायम और अखिलेश में खींच तान
अखिलेश पर मुस्लिम विरोधी होने काआरोप लगाया मुलायम ने । चुनाव चिन्ह की लड़ाई अब वोटों की लड़ाई बन गई है। मुस्लिम वोटों को पकड़ने के लिए अब बाप बेटे खुलकर आमने सामने आ गए हैं। मुस्लिमों को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए मुलायम ने खुला नृत्य करना शुरू कर दिया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि अखिलेश यादव मुसलिम डीजीपी की नियुक्ति के जबरदस्त खिलाफ थे। लेकिन मालूम हो कि प्रदेश में इस समय जाविद अहमद डीजीपी हैं। उधर अखिलेश भी कांग्रेस के साथ सांठ गांठ करने के भरसक प्रयत्न कर रहे हैं। मुलायम ने कहा कि उनका बेटा दूसरे लोगों के हाथों खेल रहा है। रामगोपाल पार्टी को बर्बाद करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा है।
9 जनवरी 2017
मुलायम रोज़ बदल रहे हैं अपने वक्तव्य अखिलेश के बारे में
यह बात साफ नहीं हो पा रही है मुलायम सिंह क्या चाहते हैं। एक तरफ वह कह रहे हैं कि मेरे और अखिलेश यादव के बीच कोई विवाद नहीं है और दूसरी तरफ उन्होंने साइकिल चुनाव चिह्न को लेकर अपनी दावेदारी पेश की है । मुलायम ने आरोप लगाया है कि अखिलेश के कुछ करीब लोग उनको गुमराह करने के प्रयत्न में लगे हैं और सपा को तोड़ना चाहते हैं। शायद मुलायम का यह इशारा रामगोपाल यादव की ओर है। उधर रामगोपाल यादव ने कहा कि उन्होंने चुनाव आयोग से अपील की है कि सपा में राजनीतिक संकट पर चुनाव आयोग जल्द कोई फैसला ले।
2 जनवरी 2017
किसको मिलेगी साइकिल,घमासान जारी
देखना है अब साइकिल किसको मिलती है पापा या बेटे को। चुनाव चिह्न साइकिल को लेकर अब दोनों गुटों में घमासान युद्ध चल रहा है। दोनों ही चुनाव आयोग से साइकिल पाने की कोशिस में हैं। अखिलेश गुट अपने अधिवेशन में लिये गये फैसले के बारे में जानकारी देंगे और साइकिल पर चिनाव आयोग के सम्मुख अपना दावा प्रस्तुत करेंगे। मुलायम का साथ देने के लिए अमर सिंह लंदन से दिल्ली पहुँच चुके हैं। अमर सिंह ने इस बात को फिर दोहराया कि मैं मुलायम सिंह के साथ हूं और हमेशा नेताजी के साथ रहूंगा। मैं उनका साथ कभी नहीं छोड़ने वाला हूँ। शिवपाल ने भी अमर सिंह की तरह बात दोहराई और कहा नेताजी राष्ट्रीय अध्यक्ष थे और हमेशा बने रहेंगे।
1 नवंबर 2016
क्या मुलायम सिंह, राहुल गाँधी और अजित सिंह कामयाब हो सकेंगे महागठबंधन बनाने में
कांग्रेस के चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर मुलायम सिंह से मिले। इस मुलाकात से महागठबंधन की शुरआत नज़र आ रही है । अलग थलग पड़ा अजित सिंह का राष्ट्रीय लोक दल भी उसमें शामिल हो सकता है। सपा के प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल यादव और कांग्रेस के चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर को करीब लाने की जदयू नेता केसी त्यागी की खास भूमिका बताई गई है। लोहियावादी और चरण सिंह वादियों को भी जोड़ने से उत्तर प्रदेश में इस महागठबंधन को काफी ताकत मिल सकती है। यदि मुलायम सिंह अपने द्वारा बनाये आकड़ों में सफल हो गए तो चुनाव का रंग बदल सकता है। लेकिन अखिलेश यादव की इस बारे में क्या सोच है कहा नहीं जा सकता है।
सपा और कांग्रेस एक साथ मिल मुस्लिम वोट पकड़ने की जुगाड़ में
मुलायम सिंह यादव की घबराहट शुरू हो गई है। उन्हें डर है कि उनके पुत्र और उनके भाई की कश्मकश में सपा का खेल बिगड़ सकता है। राजनीति के धुरंदर खिलाडी मुलायम कोई रिस्क नहीं लेना चाहते हैं। अखिलेश और शिवपाल के झगड़े से उन्हें मुस्लिम वोट टूटता नज़र आ रहा है। बताया जाता है क़ि वह राहुल गाँधी से गठबंधन की जुगाड़ में हैं। क्योंकि मुलायम हार नहीं सुनना चाहते हैं। भाजपा और बसपा मुलायम के घरेलु झगड़े से फायदे लेने में कोई कसर नहीं करना चाहते हैं। अखिलेश और शिवपाल का झगड़ा चालू है उधर अखिलेश को शंका है कि अमर सिंह उनकी कुर्सी पाने की कोशिश कर रहे हैं। जो भी हो सपा और कांग्रेस गठबंधन की आशाएं बढ़ती दीख रही हैं।
14 अक्टूबर 2016
मुख्यमंत्री का नाम चुनाव के बाद - मुलायम सिंह
सपा प्रमुख मुलायम सिंह ने यह बात साफ की कि प्रदेश का अगला मुख्यमंत्री विधायक दल और पार्टी के संसदीय बोर्ड द्वारा चुना जायेगा। प्रेस के लोगों से बात करते हुए सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव ने कहा यह आपका नहीं हमारा काम है। उन्होंने यह बात भी साफ करदी कि यादव परिवार में किसी प्रकार का विवाद या झगड़ा नहीं है। मुलायम ने कहा कि समाजवादी पार्टी परिवार
22 अगस्त 2015
मुलायम फिर बिगडे पार्टी की बढती अलोकप्रियता पर
--सरकार के काम काज पर भी की तीखी टिप्पणियां
-- नहीं उठ सका एस एन की सेवाओं
के गिरते स्तर से आगरा को मिला दर्द

मुलायम

आगरा, समाजवादी पार्टी की राज्य
में बढती जा रही अलोकपियता से और कोई नहीं खुद पार्टी राष्ट्रीय अध्यक्ष बेहद
पशोपेश में पड गये हैं। उनके तीखे तेवर भी अब मीटिग हॉलो के बाहर बेअसर हो चुके
हैं। वे पार्टी कार्यकर्त्ताओं की सुनने आते हैं और अपनी कही कह कर चले जाने के
आदी हो चुके हैं।सपा के प्रदेश पदाधिकारियों, जिलाध्यक्षों व महामंत्रियों..
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