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19 जुलाई 2017

नोटबंदी ने 60 लाख आदमियों की रोटी छीनी - सर्वे

मोदी सरकार द्वारा नोटबंदी किये जाने  से  15 लाख लोगों को अपनी नौकरियां गंवानी पड़ी हैं। यह खुलासा सेन्टर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकॉनोमी द्वारा किये गए सर्वे ने किया है। आमतौर पर एक जने की आमदनी पर चार लोगों का जीवन यापन होता है। इस प्रकार  नोटबंदी के फैंसले ने  करीब साथ लाख आदमियों को खाने से वंचित किया है। सीएमआईई के  सर्वे अनुसार नोटबंदी के बाद नौकरियों की संख्या में करीब 1.5 मिलियन अर्थात 15 लाख की कमी आई।

9 अप्रैल 2017

दो हजार खाते खुले थे बरेली में नोटबंदी की घोषणा के बाद

भारतीय स्टेट बैंक की बरेली स्थित एक  एक शाखा  में  नोटबंदी की घोषणा के  बाद करीब 2,441 नये एकाउंट्स खोले गए थे। इसका खुलासा सीबीआई की जाँच से पता लगा है। जाँच से पता लगा है कि इन खतों में करीब  आठ करोड़ रूपये  के पुराने नोट जमा किये गए थे। सीबीआई के निरिक्षण से पता चला कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा  नोटबंदी की घोषणा  के बाद बैंक की इस ब्रांच  में भारी मात्रा में नोट जमा कराये गए। भारी मात्रा में यह धन राशी नये खोले गये खातों और फिर से शुरू किये गये निष्क्रिय खातों में जमा की गई थी। इस साजिश में भाग लेने वाले बैंक अधिकारियों और दूसरे लोगों के विरुद्ध  सीबीआई ने मामला दर्ज किया है। 

2 मार्च 2017

नोटबंदी की घोषणा के बाद बसपा कहाँ से लाई इतना कैश

चुनाव आयोग ने मायावती की बहुजन समाज पार्टी से नकदी  में मिले चंदे और खाते में जमा किये गए पैसों का विवरण माँगा है। चुनाव आयोग ने  पार्टी द्वारा भारी मात्रा में कैश जमा करने के कारण पारदर्शिता नियमों के तहत ऐसा किया है। बता दें कि  8 नवंबर को नोटबंदी की घोषणा के बाद छोटे समय के दौरान पार्टी खाते में बड़ी मात्रा में कैश धन जमा किया गया था। बसपा से इसका जबाब  १५ मार्च तक देने के आदेश जारी किये गए हैं। सवाल यह है कि प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा  नोटबंदी की घोषणा के बाद बसपा के बाद इतना सारा कैश कहाँ से आया। भारी मात्रा में कैश  का मामला बसपा के लिए परेशानियां कड़ी कर सकता है।  

24 दिसंबर 2016

अखिलेश का नोटबंदी के नाम पर चुनाव जीतने का प्लान

उत्तर प्रदेश चुनावों में सपा  नोटबंदी के नाम पर चुनाव जीतने का प्लान बना रही है। उधर जनता के दिल में क्या है कहना मुश्किल है। हाल ही में चंडीगढ़ के स्थानीय चुनावों में नोटबंदी से नाराज़गी बाबजूद मोदी की पार्टी को ही लोगों ने  खुलकर वोट दिए। उधर अखिलेश यादव ने  नोटबंदी से राजनीतिक लाभ लेने के लिए बैंकों की कतार में खडे रहने के कारण जान गंवाने वाले लोगों के 14 परिवारों तथा शहीदों के परिजनों को  दो लाख रुपये के  चेक भी दे डाले हैं। लगता है नोटबंदी से परेशान वोटर को अखिलेश  आकर्षित कर सकें किन्तु वोट पर मोहर लगाते समय प्रदेश के  विकास, सडक, पानी और गुंडागर्दी  जैसे मुद्दे को कैसे नज़र अंदाज़ किया जा सकता है।