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6 दिसंबर 2015

जर्मन भी सैनिक और टॉर्नेडो फाइटर जंग में सीरिया भेजेगा

अमेरिकी ,फ्रांस , रूस और ब्रिटेन के बाद   1200 जर्मन सैनिक, टॉर्नेडो फाइटर ले कर जंग में उतर रहे है।  सैन्य विशेषज्ञ का कहना है  कि  इससे खास परिणाम नहीं नीलेंगे. यदि  आतंकी संगठन के सभी तार काट भी दिए जाएं,तब भी इस  इलाके में शांति स्थापित की जा सकेगी इसकी क्या गारंटी  है. इस्लामिक स्टेट के आतंकवादियों से लड़ने के लिए जर्मन सैनिक भेजने से  की जर्मन पर इस्लामिक स्टेट के हमलों का खतरा बढ़ सकता है। 

14 अप्रैल 2015

पी एम मोदी का ओटावा पहुंचने पर हुआ स्वाtगत

-एयर इंडि‍या वन खराब हो जाने के बावजूद अबाध रहा दौरे का कार्यक्रम

--जर्मन से उडान भरते हुए कहा ’यू एन ‘ की स्‍थायी वी टो सीट दि‍लवायें


ओटावा नई दि‍ल्‍ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तीन देशों की यात्रा का अंतिम चरण उनके  
(ओटावा(कनाडा) पहुंचने पर प्रधानमंत्री का हुआ भव्‍य स्‍वागत)

बुधवार को कनाडा पहुंचने के साथ शुरू हो गया। राजधानी ओटावा पहुंचने पर  हवाईअड्डे पर उनका भव्य स्वागत किया गया। श्री मोदी को वहां के प्रधानमंत्री  स्टीफन हार्पर के साथ दोपहर भोज करना है। वह टोरंटो व वैंकुवर भी जाएंगे, जहां भारतीय समुदाय के लोगों के साथ  उनकी मुलाकात होगी।

 श्री मोदी

13 अप्रैल 2015

जर्मन लेखक गुंटर ग्रास का नि‍धन

--‘द टिन ड्रम’ पुस्‍तक पर मि‍ला था नोवि‍ल पुरुस्‍कार

--कलकत्‍ता से खास लगाव रखते थे गुंटर
(जर्मन गुंटर ग्रास)
कलकत्‍ता : नेताजी सुभाष चन्‍द्रबोस के जीवन का गहनता से अध्‍ययन करने वाले नोवि‍ल पुरुस्‍कार वि‍जेता गुंटर ग्रास का नि‍धन हो गया ,कोलकाता के जनजीवन को उजागर करने वाले और समसामायिक दुनिया में युद्ध एवं हिंसा का विरोध करने वाले नोबेल पुरस्कार विजेता जर्मन लेखक गुंटर ग्रास का जर्मनी के ल्युबेक शहर में नि‍धन हो गया वह 87 वर्ष के थे।वह दो बार कोलकत्‍तता आये थे और यहां के जनजीवन में मां दुर्गा की सवेभौमि‍क्‍ता पर आश्‍चर्य चकि‍त रह गये थे। यही नहीं इस महानगर में गाय, गोबर, गटर और गंदगी के बीच मानवीय संवेदना और जिजिविषा किस तरह कायम है इसका भी गहनता के साथ अध्‍ययन कि‍या अपनी पुस्‍तकों में उल्‍लेख भी कि‍या था।
उनकी कोलकता की राजनीति, धर्म और सामाजिक जीवन पर ‘शो योर टंग’ शीर्षक से लिखी पुस्‍तक खास तौर चर्चि‍त रही थी। बंगाली राजनीति में नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के प्रभाव को भी उन्होंने आंका था तथा इसे विरोधाभासी माना था...

12 अप्रैल 2015

नेताजी से संबधि‍त क्लासीफाइड फायलें सार्वजनि‍क करें




--जर्मन प्रवासी सूर्य कुमार बोस चाहते हैं अपने बाबा की दबा रखी गयी हकीकत सामने लाना



(नेताजी सुभाष चन्‍द्र बोस ने हि‍टलर से 29मई 1942 को की थी
मुलाकात।यह दो राष्‍ट्र अध्‍यक्षोें की शि‍ष्‍टाचार भेंट थी)
 नई दिल्ली। नेताजी सुभाष चन्द्र बोस से संबधित मामलों का उठाया जाना प्रधानमंत्री पद को अब तक सुशोभित करते रहे नेताओं का बेहद अप्रिय रहा है। नेताजी के बारे में खोज खबर करने को केंद्र
 की ओर से गठित मुखर्जी आयोग तक की पहुंच पी एम कार्यालय में क्लासीफायड दस्तावेज के तौर पर रखी उन फायलों तक नहीं हो सकी जिन्हें कि वर्तमान में 'डी क्लारसी फाइड' करने की मांग जोर पकडी हुई है। आयोग के द्वारा नेताजी की मौत 18अगस्त 1945 में