आगरा की ऐतिहासिक क्वीन एम्प्रेस मैरी लाइब्रेरी में आयोजित कार्यक्रम ‘ढाई आखर प्रेम का’ प्रेम, भाईचारा और सामाजिक सौहार्द की अनूठी मिसाल बन गया। इस विशेष आयोजन में प्रख्यात ग़ज़ल गायक सुधीर नारायण ने संत कबीर दास की रचनाओं को सस्वर प्रस्तुत कर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।
सुधीर नारायण ने कहा कि अंधविश्वास, व्यक्ति पूजा, पाखंड और ढोंग के खिलाफ जो संदेश कबीर दास ने 15वीं सदी में दिया था, वह आज और भी प्रासंगिक हो गया है। हाल ही में अमेरिका सहित कई देशों का दौरा कर लौटे श्री नारायण ने बताया कि अब विदेशों में भी कबीर के दोहे और सबदों को समझने की जिज्ञासा बढ़ी है।
सिक्के केवल लेन-देन के साधन नहीं थे। हर सिक्का उस समय के शासक, साम्राज्य और कला की कहानी बताता है। आगरा में पाए गए मुगलकालीन सिक्के आज भी बताते हैं कि व्यापार और शासन किस तरह संचालित होता था। उदाहरण के लिए, अकबर और शाहजहाँ के समय के सिक्कों पर उनके नाम और प्रतीक अंकित होते हैं। इससे पता चलता है कि सिक्कों के माध्यम से शासन और व्यापार दोनों ही नियंत्रित होते थे।
कबीर की वाणी का वैश्विक असर
कार्यक्रम के दौरान सुधीर नारायण ने कहा कि इंटरनेट के माध्यम से कबीर दास का दर्शन अब विश्व के हर कोने तक पहुँच चुका है। उन्होंने बताया कि आज दुनिया भर में लोग कबीर की साखी, सबद और रमैनी को न केवल जानते हैं बल्कि उन्हें गहराई से समझते भी हैं। उन्होंने आगरा में अपने पहले कार्यक्रम के रूप में इस मंच को चुनने पर खुशी जताई और कहा कि क्वीन एम्प्रेस मैरी लाइब्रेरी का




