अन्य भी संक्रमण से उपचारित मास्क बांट स्वयं भी 'सुखद आत्म अनुभूति ' का अहसास करें
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| होलीपूर्व आयोजित शिविर जब विष्णू कपूर ने सबसे पहले बांटे थे 'मास्क' फोटो :असलम सलीमी |
आगरा:कोरोना वायरस के प्रति नागरिकों में अति संवेदनशीलता है और सरकार के द्वारा किये जा रहे उपायों व योजनाओं में भाग ले रहे हैं।इनमें से ज्यादातर वे हैं जिनके द्वारा दिये जाने वाले योगदान की जानकारी किसी न किसी रूप में आम जनता तक पहुंच जाती है,किन्तु ऐसे व्यक्ति भी काफी संख्या में हैं है जिनके द्वारा किये जाने वाले योगदान की जानकारी जनता तो क्या प्रशासन तक को शायद ही हो। ऐसे ही ताज सिटी के शहरी हैं श्री विष्णू कपूर । इस समय विकलांगों की सेवा में लगे हुए हैं। अगर किसी भी माध्यम से उन्हें मालूम पड़ जाये कि कोरोना से बचाव की आधार भूत जरूरत ' मास्क ' से बंचित है तो उसे संक्रमण प्रतिरोधी स्तरीय मास्क जरूर भिजवा देते हैं।
--होली पूर्व से लगे हैं अपने काम में
दरअसल अपने जीवन के अस्सी से ज्यादा दशक पूरे कर चुके श्री कपूर होलीपूर्व ही मास्कों के इंतजाम और उनको विकलांगों तक पहुंचाने के काम में लग चुके थे। लंगड़े की चौकी स्थित हृदयल विकलांग सेवा केन्द्र जिससे कि श्री कपूर कई दश्कों से सक्रियता से जुडे रहे हैं। यहीं लगे एक विकलांग सहायता शिवर से उन्होंने अपने अभियान की शुरूआत की थी। होली पूर्व लगा यह शिवर मूल रूप से नये पात्रों को चिन्हित एवं पूर्व से सूचीबद्ध विकलांगों को कृतिम पैर वितरण करने के लिये केन्द्र के नियमित आयोजन के क्रम में
लगा था । किन्तु इसमें जो भी विकलांग जन और उनके परिवार के सदस्य आये उन्हें श्री कपूर ने मॉस्क भी वितरित किये।
यह वह दौर था जब कि देश में सोशल डिस्टेसिग की जरूरत पर चर्चा शुरू हो चुकी थी तथा लोग मास्क की जरूरत को स्वीकारना शुरू कर चुके थे। एक बार जब श्री कपूर ने मास्क बांटे तो फिर वह लगातार इसमें लगे रहे।
-- विकलांगों के प्राथमिकता किन्तु अन्यों की भी सेवा| कोरोना संक्रमण विरोधी अभियान में 'विकलांगों ' की जरूरत के प्रति भी रहें संवेदनशील : विष्णू कपूर |
विकलांगों के लिये मास्क उपलब्ध करवाना उनकी प्राथमिकता है। वैसे जितने अपने संसाधनों से जुटापाते हैं बांट दे ते हैं। श्री कपूर ने एक जानकारी में बताया कि यह उनका निजि संसाधनों से किया प्रयास है। किसी से सहयोग लेकर या सरकार को जानकारी देकर काम करना बहुत ही मुश्किल भरा हो चुका है। उम्र दराज हो जाने के बाद न तो उनके पास क्षमता है और नाही वक्त ।
-- श्रीमती प्रमिला कपूर हैं सक्रिय सहयोगी
विकलांगों के अलावा अपने आवासीय क्षेत्र के आसपास के सफाई करने वाले गैर सरकारी कर्मियों को भी उन्होंने मास्कों का वितरण किया। उनकी पत्नी श्रीमती प्रमिला कपूर जो कि उनके हर समाज सेवा के कार्यों में बढ़ चढ़ कर सहभागी रहती आयी हैं ,इस अभियान में भी बढ़ चढ़ कर भाग ले रही हैं।मास्कों के संक्रमण निरोधी होना सुनिश्चित होने के बारे में पूछे जाने पर पर वह तपाक से कहते हैं कि डाक्टर बेटी का पिता होने के कारण इतना तो मुझे पता ही है। वैसे भी विकलांग को उपकरण उपलब्ध करवाने संबधी शिविरों से जुडा रहने से जन स्वास्थ्य और वायरस संक्रमणों से बचाव की जरूरत को वह भली भांति समझता हैं।
श्री कपूर कहते हैं कि सोशल डिस्टैंसिग के प्रति गंभीरता कोरोना वायरस के मौजूदा संकट से उबरने के बाद भी कयी महीने बनी रहनी है। उन्होंने इस संकट के दौर में सुधी जनों से अपेक्षा की हे कि अपने कार्यों में अगर विकलांगों और दिव्यांगों के समक्ष आ रही चुनौतियों को कम करने में योगदान दे सकें तो जरूरत को पूरा करने वाला तथा ' सुखद आत्म अनुभूति ' करवाने वाला कार्य होगा।
