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8 फ़रवरी 2016

ऐसी क्या नारज़गी गुलाम अली से शिव सेना को


पाकिस्तान के गजल गायक गुलाम अली का कार्यक्रम का आयोजन   लखनऊ में  किये जाने पर तीखी निंदा करते हुए शिव सेना ने कहा  उत्तरप्रदेश इस्लामी राज्य' में परिवर्तित हो गया है। अखिलेश  यादव की यू पी  सरकार ने  ‘राष्ट्र विरोधी कारोबार' शुरु कर दिया है। शिव सेना की मांग है कि कार्यक्रम की अनुमति देने वालों के  खिलाफ राष्ट्र विरोधी गतिविधियों के लिए मुकदमा किया जाना चाहिए। 

7 फ़रवरी 2016

आवाज़ के जादूगर गुलाम अली ने दिया लाइव लखनऊ में

लखनऊ :पाकिस्तानी ग़ज़ल जादूगर गुलाम अली लखनऊ महोत्सव में अपनी ग़ज़लों से लखनऊ के लोगों के दिल में घर कर गए। शिवसेना द्वारा धमकी दिए जाने की वजह से  सुरक्षा की विशेष व्यवस्था थी। भारत में पूर्व का कार्यक्रम शिवसेना की धमकी के कारण पहले रद्द किया गया था।मुंबई में पूर्व रद्द कार्यक्रम पर गुलाम अली ने कहा, ‘ मैं कतई नाराज नहीं हूं, मैं  लोगों को प्यार करता हूं और मुझे पता है कि प्यार ही विचार  बदल सकता है।’ उत्त्तर प्रदेश  राज्यपाल रामनाईक ने  ग़ज़ल गायक  गुलाम अली को सम्मानित करते हुए   कहा कि संगीत किसी एक देश का नहीं..

11 जनवरी 2016

गजल जादूगर गुलाम अली फिर गाएंगे भारत में

मुंबई। पाकिस्तानी गजल गायक गुलाम अली को भारत में कौन नहीं जनता है। बताया जाता है कि भारत में  उतनी ही ख्याति और बड़ी है  जबसे  उन्हें  भारत में कार्यक्रम करने से  रोका गया । आवाज़ के जादूगर  गुलाम अली लगातार और  सुर्खियां बटोर रहे हैं।
अब एक बार फिर चर्चा में हैं।  बॉलीवुड की आगामी  फिल्म में देशभक्ति गीत के लिए आवाज भी  दी है। फिल्म के निर्माता-निर्देशक सुहैब इलियासी ने कहा  कि 29 जनवरी को गुलाम अली घर वापसी का संगीत रिलीज करने जा रहे हैं। ज्ञात होगा  शिवसेना की धमकी के बाद अक्टूबर में कॉन्सर्ट स्थगित कर दिया गया था। इस घटना के बाद  यह पहला प्रोग्राम होगा।

8 अक्टूबर 2015

शिवसेना ने संगीत में भी की राजनीति, गजल गायक गुलाम अली के शो रद्द किये

शिवसेना ने गजल गायक गुलाम अली के कार्यक्रमों के रद्द करने का सिलसिला जारी  रखा।  मुंबई के बाद पुणे में भी कार्यक्रम रद्द कर दिया। गजल गायक जगजीत सिंह की चौथी पुण्यतिथि पर  श्रद्धांजलि देने  के लिए मुंबई और पुणे में एक कॉन्सर्ट होना थागजल गायक गुलाम अली के दिल पर इससे काफी चोट पहुंची है। इससे वह  बेहद दुखी हैं। उनका शो भले ही ना हो पाए लेकिन वो आज भी  गजल प्रेमिओं  के दिलों में बसे हुए  हैं। चुपके-चुपके रात दिन और हंगामा क्यों बरपा आदि ग़ज़लों को कौन भुला सख्त है।