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3 मार्च 2016

छात्र बनने का ढकोसला छोड सीधी राजनीति करें ‘कन्हैया’

दिल्‍ली में बैठकर बिहार की सूरत बदलने का असफल प्रयोग कई बिहारी बाबू कर चुके हैं

यूनीवर्सटियां शिक्षा का केंद्र  बने या फिर उस राजनीति की लडाई का मंच जिसके लिये प्रजातंत्र  में
(जे एन यू अध्‍यक्ष के भी बदल सकते हैं तेबर)

अलग से व्‍यवस्‍था है। बिहार से दिल्‍ली की जे एन यू पहुंचे कन्‍हैया ने जो कुछ भी पहले किया हो उसका एक बडा भाग न्‍यायालय के तहत विचारित है, इसलिये इस पर कुछ भी कहना शायद उपयुक्‍त न हो किन्‍तु अब वह शिक्षण संस्‍थान को जिस प्रकार से राजनैतिक मंच के रूप में उपयोग कर रहे है, वह निश्‍चित रूप से उस हर आम आदमी के लिये सोच का विषय है जिसके पैसे से तमाम जरूरी प्राथमिक्‍तायें दरकिनार कर सरकार के द्वारा जे एन यू जैसे बेहद खर्चीले संस्‍थान संचालित हैं।..