17 जनवरी 2026

नागपुर से नीदरलैंड तक: शिशु से मेयर तक की अद्भुत यात्रा

 

10 फरवरी 1985 को महाराष्ट्र के नागपुर में एक बच्चे का जन्म हुआ। जन्म के तीन दिन बाद ही उसकी माँ ने उसे छोड़ दिया। शिशु करीब एक महीने तक नागपुर की MSS संस्था में रहा, जो बेसहारा बच्चों और जरूरतमंद महिलाओं के लिए काम करती है। तभी मुंबई घूमने आए नीदरलैंड के एक दंपती ने उसे गोद लिया और यूरोप ले गए। संस्था की एक नर्स ने बच्चे का नाम “फाल्गुन” रखा, क्योंकि उसका जन्म फरवरी महीने में हुआ था।

फाल्गुन बिनेनडिज्क ने अपनी जिंदगी नीदरलैंड में बिताई और अब वे हीमस्टेड शहर के मेयर हैं। 41 साल बाद, उन्होंने अपने जन्मस्थान नागपुर लौटकर अपनी जन्मदात्री माँ को खोजने का फैसला किया। अधिकारियों के अनुसार, उनकी माँ उस समय 21 वर्ष की अविवाहित युवती थीं। सामाजिक दबाव और डर के कारण उन्होंने नवजात को MSS संस्था में छोड़ दिया।

फाल्गुन ने कहा, “मैंने महाभारत पढ़ा है और मुझे लगता है कि जैसे कर्ण को कुंती से मिलने का अधिकार था, वैसे ही हर संतान को अपनी माँ से मिलने का हक होना चाहिए।” 18 वर्ष की उम्र में वे पहली बार भारत आए थे, लेकिन इस बार उनका मकसद अलग है,माँ से मिलना। उन्होंने NGO, स्थानीय निकायों और पुलिस की मदद ली है ताकि उन्हें ढूंढा जा सके।

फाल्गुन बताते हैं, “मुझे लगता है कि वे आज भी उस फैसले के दर्द में होंगी। मैं बस उनसे मिलकर यह बताना चाहता हूँ कि मैं ठीक हूँ और खुश हूँ। उन्हें एक बार देखना चाहता हूँ।”