आगरा में लॉकडाउन को लिया जा रहा है सहजता से
| ' लॉक डाउन' के लिये संकल्पबद्धता फोटो: असलम सलीमी |
आगरा : कोरोना वायरस के संक्रमण को लेकर चल रहे अभियान के प्रति समाज के सभी वर्गों में संकल्पशीलता है, इसी के साथ लॉक डाउन की अवधि बढने की स्थिति में उत्पन्न चुनौतियों का सामना करने की पूरी तैयारी है। घने बसे अल्पसंख्यक बहुल मिश्रित आबादी वाले तिलक बाजार के लोगों द्वारा सोशल डिस्टैंसिग को पुरजोर तरीके से अपनाया जा रहा है।
5 अप्रैल को रात्रि में 9.9 बजे घर में रहकर द्वीप प्रज्वलित करने के कार्यक्रम का समूचे क्षेत्र में सकारात्मक असर रहा। मुस्लिम परिवारों की द्वीप और टार्च जलाकर की गयी सहभागिता से लोगों खास उत्साह रहा।
पूर्व प्रेस फोटोग्राफर असलम सलीमी ने बताया कि उन्होंने तो सपरिवार इस कार्यक्रम में सहभागिता की ही साथ ही आस पडोस के कई अन्य परिवारों को कार्यक्रम में भाग लेने के लिये प्रेरित किया। इस मौहल्ले के लोगों का कहना है कि लाकडाउन का पालन करने के बाबजूद अगर घर से बाहर भी आना -जाना जरूरी हुआ तो भी सोशल डिस्टेंसिंग के तहत र्निधारित दूरी के मानकों का पूरा ध्यान रखा
जा रहा है।
इसी मौहल्ले (तिलक बाजार)की पन्नी गली में राधास्वामी मत के पहले गुरू स्वामी जी महाराज शिवदयाल सिह (Sant Radhasoami Sahib, Seth Shiv Dayal Singh) का मूल आवास है ,आज यह स्थान अध्यात्मिक आस्थावानों के लिये तीर्थ है। तिलक बजार में ही राजा छत्ता काशी गली गली है, जहां अंग्रेजों के द्वारा बनारस की गद्दी से हटाये गये राजा चेत सिह के बेटे राजकुमार बलन्त सिह ( Kunwar Balwant Singh) रहा करते थे। वह अपने समय के एक विद्वान थे और इस गली के एक पुराने मुगलकालीन हवेली नुमा महल (इसे जहांगीरी महल के नाम से भी जाना जाता है) में 'काशीवाला राजा (penname "Kashi-walla Raja"( 1871) के नाम से कविता एवं लेख लिखा करते थे। अपनी निजी हैसियत से आगरा में रहने वाले बनारस के पास अनेक विद्वान आते रहते थे। म्यूनिस्पिल रिकार्ड में इस गली का नाम अब भी राजा छत्ता काशीवाली गली नाम दर्ज है। जाहिर है अध्यात्मिक और साहित्यक बौद्यिकता के धनी इस मौहल्ले में कुछ तो फर्क रहता ही आया है अन्य मिश्रित आबादी वाली बसावट इलाकों के लिये।
