13 अप्रैल 2020

आगरा नए मिजाज का शहर है, जरा फासले से मिला करो

'माईक्रो इकनामी ' ठप्प , जनजीवन में भारी  हताशा
आगरा: हर समय लोगों के अवागमन से गति‍शील रहने वाला आगरा का पुराना मौहल्‍ला ' बल्‍काबस्‍ती ' पि‍छले एक पखवारे से सन्‍नाटे के दौर में है और लोग असहज हैं। यहां का माहौल आगरा की उन पुरानी बसावटों का प्रति‍नि‍धि‍त्‍व करता है जि‍नके लि‍ये  सरकारें घोषणाएं  तो खूब  करती हैं  कि‍न्‍तु कुछ खास कर नहीं पातीं। 
सांप्रदायि‍क और जातीय तनाव जनि‍त हालातो से नि‍पटने के  लि‍ये शहर में कर्फ्यू तो कई बार लगे कि‍न्‍तु राजामंडी और गोकुलपुरा के नजदीकी बल्‍काबस्‍ती मौहल्‍ले ने मौजूदा दौर सा कभी नहीं देखा था । लोग 22मार्च से ही लोग बि‍ल्‍कुल फुर्सत में हैं। 
खूब बजायी ताली ,अब जेब है खाली
हालांकि‍ लॉक डाउन के दि‍न से पूर्व ही यानि‍  22 मार्च की शाम 5 बजे ताली और थाली बजाकर लोगों  ने  खुशी से कोरोना के खि‍लाफ एक जुटता जरूर प्रदर्शि‍त
की कि‍न्‍तु कि‍सी को भी इस बात का अहसास नहीं था कि‍ आने वाले दि‍न और  कडा अनुशासन दि‍खाने वाले होंगे। 24 मार्च से शुरू हूऐ लॉक डाउन  के बाद  कोरोना वायरस के संक्रमण से लोगों को बचाने के लिए देशभर में लॉक डाउन  है।
 
फोटो:शि‍वम सक्‍सेना (साभार)
कि‍तने दि‍न चलेगा यह सि‍लसि‍ला कि‍सी को पता नहीं । भाग्‍य के मामले में 'भगवान' के प्रति‍ जबकि‍ स्‍वास्‍थ्‍य को लेकर डाक्‍टर-वैद्यों के वि‍श्‍वासि‍यों का  मौहल्‍ला है , इसी लि‍ये बि‍ना दबा की बीमारी (कोरोना) को लेकर लोगों को एतबार है कि‍ इलाज का कोयी न कोयी तरीका जरूर नि‍कल ही जायेगा। 
कसक अब रैड जोन की
बाकी तो सभी ठीक है कि‍न्‍तु रोज काम पर जाकर कमाने वालो की बहुलता होने से लोगों में असहजता काफी बढ गयी है। आखि‍र बि‍ना पैसे के भी जि‍दगी चल सकती है। 'मौहल्‍ले ' के एक परि‍वार के मुखि‍या में संक्रमण की जानकारी मि‍लने  के बाद से पि‍छले पांच दि‍न से ' रैड जोन ' घोषित हो जाने से जो रही बची सहजता थी वह भी सि‍मि‍ट गयी है।खैर यह केवल यहीं  नहीं महानगर में दो दर्जन से ज्‍यादा इलाकों में 'रैड जोन ' घोषि‍त है। 
पटरि‍यों की ही नहीं लाइब्रेरि‍यो की शैल्‍फें भी शोभायमान  कीं 
शहर की पटरि‍यों और बाजारो की रौनक बढा कर सम्‍मान की जि‍दगी व्‍यतीत करने वालों के साथ ही हि‍न्‍दी साहि‍त्‍य के आधारभूत स्‍थम्‍भ  और फोर्टवि‍लि‍यम में ईस्‍ट इंडि‍या कंपनी के अफसरों को हिन्‍दी भाषा का अक्षर ज्ञान करवाने वाले लल्‍लू लाल जी का इसी मौहल्‍ले से नाम जुड़ा  है। वैसे कम से कम दो दर्जन ऐसे साहि‍त्‍यकार यहां रहे हैं जि‍नकी कृति‍यां देश की सभी प्रमुख लाइब्रेरि‍यों की शोभा बढा रही है। 
फि‍लहाल बल्‍काबस्‍ती शांत है , इंतजार में कि‍ अब तो आ ही जायेगा 'अच्‍छा वक्‍त '  क्‍यों कि‍ मौजूदा दौर से और बुरा क्‍या हो सकता है ।