राजनीतिक पार्टियां चुनाव में जाति, धर्म, समुदाय, नस्ल या भाषा अब वोट नहीं मांग सकेंगी। किन्तु भारत में जो सबसे बड़ी समस्या है कि किसी का नाम देखते ही उसकी यह चारों बातें पता लगा जाती हैं,कि वह किस जाति धर्म और समुदाय का है । अब इन मुद्दों को चुनाव में इस्तेमाल करना गैरकानूनी होगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अब कोई भी धार्मिक नेता धर्म, जाति या समुदाय के नाम पर किसी उम्मीदवार के समर्थन में वोट नहीं मांग सकता है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैंसले का सभी राजनैतिक दलों और धर्मगुरुओं द्वारा प्रशंसा की गई है। कोर्ट का कहना है कि कि चुनाव एक धर्मनिरपेक्ष प्रक्रिया है और इसका धार्मिक गतिविधियों से कोई संबंध नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा 123(3) की व्याख्या करते हुए कहा कि मज़हब का राजनैतिक चुनावों
में उपयोग तब भी गैरकानूनी माना जाएगा जब कि उम्मीदवार और मतदाताओं का धर्म या जाति अलग-अलग हों। सुप्रीम कोर्ट का यह फैंसला भविष्य में बदलाव लाएगा।
में उपयोग तब भी गैरकानूनी माना जाएगा जब कि उम्मीदवार और मतदाताओं का धर्म या जाति अलग-अलग हों। सुप्रीम कोर्ट का यह फैंसला भविष्य में बदलाव लाएगा।
