विभागों के मामले में मुख्यमंत्री अब भी हैवीवेट
लखनऊ: उत्तर प्रदेश मंडल के आठवें विस्ता्र के बाद से चल रही अटकलें अब थम गयी है, मुख्यमंत्री
![]() |
| गायत्री प्रजापति |
अखिलेश यादव ने ने खुद के सात श्री शिवपाल सिंह यादव के दो विभाग कम करके इन नौ विभागों को नये मंत्रियों को दे दिया है। बर्खास्तगी के बाद फिर मंत्रिमंडल में शामिल हुए गायत्री प्रजापति को अब परिवहन विभाग सौंपा गया है जबकि महबूब अली का कद बढ़ाते हुए उन्हें एक अतिरिक्त विभाग दिया गया है।
उल्ले खनीय है कि अखिलेश यादव ने 26 सितंबर को मंत्रिमंडल का आठवां विस्तार कर तीन मंत्रियों को शामिल करने के साथ ही छह मंत्री प्रोन्नत किये गये थे और एक नए मंत्री को
कैबिनेट में स्थान मिला था।
राजभवन से जारी सूचना केअनुसार मुख्यमंत्री ने चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, इलेक्ट्रानिक्स एवं प्रौद्योगिकी, कर एवं निबंधन और समाज कल्याण विभाग शिवपाल से वापस ले लिये।
नये बंटवारे के बाद मुख्यमंत्री के पास 41 वहीं शिवपाल के पास 12 विभाग रह गए हैं। राम गोविंद चौधरी से अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण एवं सैनिक कल्याण वापस लिया गया है।
नये बंटवारे के बाद मुख्यमंत्री के पास 41 वहीं शिवपाल के पास 12 विभाग रह गए हैं। राम गोविंद चौधरी से अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण एवं सैनिक कल्याण वापस लिया गया है।
समाजवादी सरकार में यह पहला मौका है कि जब स्वास्थ्य विभाग को हो हिस्सों में बांटकर चिकित्सा एवं स्वास्थ्य और परिवार कल्याण एवं मातृ शिशु कल्याण विभाग के लिए अलग-अलग मंत्री नियुक्त किये गये हैं। अखिलेश यादव ने सत्ता संभालने पर अहमद हसन को चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग सौंपा था। फरवरी 2015 में हुए फेरबदल में मुख्यमंत्री ने यह विभाग अपने पास रख लिया। 27 जून के सातवें विस्तार में रविदास मेहरोत्रा को स्वतंत्र प्रभार का मंत्री नियुक्त कर उन्हें परिवार कल्याण एवं मातृ शिशु विभाग दिया गया था। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मुख्यमंत्री ने अपने पास रखा था। अब यह विभाग शिवाकांत ओझा को दिया गया है जबकि रविदास भी प्रोन्नत होकर मंत्री गए हैं हो। जिससे विभाग में दो मंत्री हो गये हैं हालांकि कामकाज के बंटवारा बिल्कुल स्पष्ट है। ध्यान रहे, इससे पहले बसपा सरकार में स्वास्थ्य विभाग में भी दो मंत्री हो गए थे।
वर्तमान में स्थिति यह है कि आठवें विस्तार के बावजूद सपा के अधिकांश विधायक मंत्रिमंडल में अपना नम्बर न आने के कारण बेहद खफा हैं.मीडिया के सामने तो खुलकर बोलने का सहास कोई नहीं कर पा रहा हे किन्तु आक्रोष अभिव्यमक्तिो का कोई मौका नहीं छोड रहे।
