एन एस यू आई बैकफुट पर ,फिलहाल पुतला फूंकने वालों को नोटिस
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| मोदी का पुतला फूंकने वाले जेएनयू के 'राम' जिन्हें नहीं ढूढ पा रही है पुलिस |
नई दिल्ली :जो जे एन यू कुछ समय पहले भारत में आजादी मांगने वाले कन्हैया के लिये सुर्खियों में रहा अब उस राम के लिये पुन: जनचर्चा में है जिसने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मुखौटे वाले दस सिरों के रावण स्टाइल पुतले को रामचन्द्र स्टाइल मे फूंक तो डाला किन्तु रमायण की पौराणिक कथा के नायक राजा रामचन्द्र के समान सच्चाईयों का सामना करने के स्थान पर भागता घूम रहा है। यही नहीं उसके साथ पुलिस को समझाते फिर रहे हैं कि उन्होंने किसी व्यक्ति का नहीं बुराईयों के प्रतीक का पुतला
फूंका है।
पुतला फूंकने वाले कांग्रेस के छात्र संगठन एन एस यू आई के सदस्य हैं, संगठन की ओर से भी अपनी छवि बचाने के लिये छात्रों को नोटिस जारी कर दिये गये हैं।
दशहरे की रात को घटी इस घटना को विश्विविद्यालय प्रशासन और दिल्ली पुलिस ने संज्ञान में जरूर ले लिया है किन्तु कोई भी प्रभावी कार्रवाही अब तक नहीं की है।छात्रों का एक समूह पुलिस और विश्वहविद्यालय के इस रूख से बेहद खफा है और प्रतिक्रिया स्वरूप कांग्रेस के कई गण्यमानों के पुतले फुंकवाने जैसी अप्रिय घटनाओं की संभावना बढ गयीं हैं ।
इनमें अमित शाह, बाबा रामदेव, नाथूराम गोडसे, जेएनयू के वीसी के चेहरे भी शामिल थे।
वाइस चांसलर एम कुमार ने कहा कि जेएनयू में पुतला दहन की घटना उनके संज्ञान में आई है। मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं। जे एन यू में इससे पहले कुछ और पुतले जलाये जा चुके हैं ,मीडिया मे सुर्खियां मिलने से छात्रों को प्रोत्साहन मिलना स्वतभाविक था।
एनएसयूआई अपने सदस्यों के इस कृत्य में सीधी लिप्तता के बाद बैकफुट पर आ गयी है और पुतला फूंकने वाले सदस्यों को कारण बताओ नोटिस जारी कर चुकी है। एन एस यू आई के काम से कांग्रेस इस लिये ज्यादा परेशान हैे कि अगर पुतले फुंकना शुरू हुए तो पूरी दिल्ली में उसके नेताओं के पुतले फुकने का क्रम शुरू होते देर नहीं लगेगी।
