-- नेत्रदान को प्रेरित करतीहै लघु फिल्म रूपी यह कोशिश
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| द़ष्टिहीनों की अंतरव्यथा ‘एक उम्मीद की रोशनी’ |
आगरा: सूर साधना स्थली 'सूर कुटी' की विरासत से धनी आगरा में जब तब दृष्टिहीनों की अंतर व्यथा से समाज को रूबरू करवाने के लगातार प्रयास होते रहे हैं, इन्हीं में ताजातरीन कोशिश है 'एक उम्मीद रोशनी की' फिल्म के रूप शैलेन्द नरवार की है।
युवा शैलेन्द्र व्यवहार में एक अत्यंत भावुक स्वभाव के हैं, उनके द्वारा निर्मित एवं निर्देशित 'उम्मीद रोशनी की' शायद इसी का परिणाम है। शैलेन्द्र्र कहते हैं कि उन्होंने सहज संभव हो
सकी आडियो वीज्युल सुविधा से समाज के दृष्टिवानों को समझाने की कोशिश की है कि नेत्रदान से उनकी वह
आंखें उन लोगों के लिये कितना कुछ दे सकती है जिनकी मृत्यू केे उपरांत मनुष्यों को जरूरत ही नहीं रहती। नरवार ने अपने इस प्रयोग धर्मी प्रयास से रुपया भले ही नहीं बटोरा हो किन्तु 'प्रेम धन' व प्रशंसा जरूर जमकर लूटी है। सोशल मीडिया खास कर 'यू ट्यूब' इसकाेे जनता के बीच पहुंचने का सशक्त 'माध्यम साबित हुुई है। साईबर मीडिया पर अपलोड होते ही उन्हें प्रशंसकों की एक ऐसी सशक्ते लॉबी मिली जिसके लगभग हर सदस्य की दृष्टिईहीनों के प्रति अपनी उदार संवेदनाये हैं।
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| शैलेन्द्र सिंह नरवार |
नरवार बताते हैं कि फिल्म में दिखाया गया है की किस प्रकार द़ष्हीनता केकारण उन्हें जिंदगी के हर कदम पर पहाड़ जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है | फिल्म के निर्माण में समाज सेवी रंजन शर्मा का विशेष सहयोग रहा है | फिल्म के दृश्य, संगीत, संवाद, दिल को छू लेते हैं | शैलेन्द्र नरवार इससे पूर्व भी शैक्षिक व पर्यावरण से संबन्धित डॉक्यूमेंटरी का निर्माण कर चुके है जिनमें ' फतेहपुर सीकरी, मुग़ल राजधानी या जैन आस्था केन्द्र ' व 'सेव यमुना' प्रमुख हैं | यूट्यूब पर फिल्म एक उम्मीद रोशनी की का लिंक है -' https://www.youtube.com/watch?v=YsdL4Rbl8K4

