11 अक्टूबर 2016

आगरा के पर्यावरण योद्धा डी के जोशी पंचतत्वों में विलीन

--लोक कथाओं की तरह से याद किये जायेंगे उनके भ्रष्टाषचार के विरूद्ध संघर्ष

आनंत यात्रा के लिये अल विदा
--फोटो:शैलेन्‍द्र सिंह नरवार
 आगरा: प्रख्यात पर्यावरण विद डी के जोशी का पार्थिव शरीर पंचतत्वोंं में विलीन हो गया.पिछले कई दिनों से दिल्ली के आनंद विहार स्थित एक हॉस्पिटल में वैंटीलेटर पर थे। वह 78 वर्ष के थे। पिता अयोध्या लाल जोशी और मां प्रकाशवती थे। देश विभाजन के बाद जोशीजी के पिता अजमेर में आकर बस गये वहीं पर डीके जोशी की पढ़ाई हुई। राजनीति में सक्रियता के दौर में वह कांग्रेस में प्रदेश महामंत्री पद तक पहुंचे।
श्रीजोशी का नाम तमाम कानूनी संघर्षों से जुडा रहा किन्तुे यमना एक्शसन प्लानन में भ्रष्टांचार को लेकर उप्र के लखनऊ स्थिसत पर्यावरण कोर्ट में दायर मुकदमा अपने आप में मिसाल है, इस मामले को सुन रहे पीठासीन जज ने मुकदमा दर्ज करने के बाद उन्हेंं अपने
कक्ष में बुला कर कहा था कि वह नोटिस तो जरूर जारी करवा रहे हैं किन्तुं जानते हैं कि यह मुकदमा कम से कम उनके कार्यकाल में तय नहीं हो पायेगा यही नहीं जजसाहब ने तो यह तक कहडाला कि काश यह हमारे जीवन काल में ही तय हो जाये.वाकई में मुकदमा तय नहीं हुआ और श्री जोशी दुनियां को अलविदा कर गये।.ठीक इसी प्रकार की एक लडाई नदी डूब क्षेत्र को बचाने के लिये चल रही है, ग्रीन ट्रिबयूनल के आदेश को क्रियान्व्यन करवाने की प्रक्रिया का निर्णायक दौर प्रारंभ चुका है हो।
जोशीजी के निधन सुप्रीम कोर्ट अनुश्रवण केमेटी के सदस्यद श्री रमन ने भारीशोक व्यीक्तक कियाहै और कहा है कि वह अपनी संघर्ष क्षमता, कानूनी समझ के लियेहमेशा याद किये जायेंगे, उनके कानूनी संघर्ष विश्वदविद्यालय स्ता, र पर शोध का विषय हो सकते हैं। सिविल सोसायटी आगरा के अध्यवक्ष डा शिरोमणी सिह, इतिहास विद राजकिशोर राजे, सिविलएयरपोर्टअभियान के श्री अनिल शर्मा