-इस्लाम में आतंकवाद को कोई जगह नहीं: सैय्यद अजमल अली
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| सैय्यद अजमल अली साहब मौहर्रम के गमजदा माहैल हमकदमों केसाथ ।फोटो: असलम सलीमी |
आगरा: मौहर्रम के पर्व पर परंपरागत ताजिये निकाले और मातमके साथ दफन कर उन संदेशों को याद कियाजो कि जुल्मर और नाइंसाफी के खिलाफ न झुकने को लेकर दिया गया था। जुलूस और मजहबी माहौल में हुए कार्यक्रमों के दौरान धर्म गुरूओं ने कहा कि इस्लांम इंसानियत और भाईचारा का संदेश देनेवाला मजहब और आतंक और उग्रवाद के लिये इसमें कोई जगह नहीं है।
आका मैला सईदुश शैहदा जन्नेत के सरदार ईमाम मशरिबल मगरिव इमाम हुसैन आली मुकाम अले हिरसलाम की याद में
एक विशाल जुलूस '' खानकाह आलिया कादिरया नियाजिया से (बरागाद) निकाला गया। इस जुलूस की सरपरस्तील आली जनाब किवला मखदूम अखलाकुजमा सैय्यद अजमल अली जाकरी कादरी निजामी नियाजी साहब ने की.सय्यद शब्ब र अलीशाह ,, सय्यद शमीम शाह, सैय्यद सिनवान अहमद शाह कादरी सय्यद मोतसिम अली शाह, सैय्यद यासिर अली आदि ने इस जुलूस का नेतृत्व संयुक्तहरूप से किया।
एक विशाल जुलूस '' खानकाह आलिया कादिरया नियाजिया से (बरागाद) निकाला गया। इस जुलूस की सरपरस्तील आली जनाब किवला मखदूम अखलाकुजमा सैय्यद अजमल अली जाकरी कादरी निजामी नियाजी साहब ने की.सय्यद शब्ब र अलीशाह ,, सय्यद शमीम शाह, सैय्यद सिनवान अहमद शाह कादरी सय्यद मोतसिम अली शाह, सैय्यद यासिर अली आदि ने इस जुलूस का नेतृत्व संयुक्तहरूप से किया।
चांद मियां नियाजी, ताबिस नियाजी, ने भनकबती अशआर सोजे सलाम के के कलाम को जुलूस के हमकदमों के बीच पढकर माहौल को जज्बनबाती किये रखा। चांद मियां नियाजी, ताबिस नियाजी, चांद बाबू अब्बाजसीहाजी इम्त याज नियाजी, हाजी मौहम्मिद इलियास हुसैन कादरी वारसी, भैय्याजाहिद हुसैन, सैय्यद जाहिद मुंशी, जाहिद अली अफजल अकबराबाद, सनी नियाजी, एजाजनियाजी, अनस नियाजी, अख्त, र नियाजीर, निसारअहमद साबरी आदि गमजदाओं के जुलूस में हमकदम रहे.जलूस फुव्वासरा, हास्पि्टल रोड, गुण की मंडी, फलट्टी बाजार, चिडीमार टोला, पाय चौकी, इमाम बरगाह, बडा इमामबाडा, होता हुआ फूलोंवाले ताजिया पर हाजरी लगाने पहुंचा। सज्जाौद नशीन किब्लाग मखदूम अखुलक जमॉ, सय्यद कादरी निजामीनेइमामकीबारगाहमें पहुंच कर दुआ की और इमाम हुसैन शहदत की याद दिलाकर जुल्मीके खिलाफ
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| बुन्दन मियां की चर्चित'अल्लाह और पैगंब्म्म्बर सबील |
मौहर्रम के अवसर पर परंपरागत सबील बेगम ड्योढी स्थि'त पाय चौकी पर इस साल भी लगायीगयी। सबील को इस बार उस पेड से सजाया गया था जिसके 99 पत्तों पर अल्ला ह और इतने पर ही पैगम्ब र मौहम्मेद साहब का नाम संजोया हुया था.अबुल ओलाईशेख कमैटी के सूफी बुन्द न मियां भारतीय मुस्लियम विकास परिषद के राष्ट्री य अध्य क्ष समी आगई, राष्ट्री य महा सचिव सय्यद इरफान अहमद सलीम। सबीलकी व्य वस्था में शाहिदबुन्दबन, जाहिद बुन्दईन, मुवीन बुन्द्न, जावेद, मोहिसिनआदि की सहभागिता रही। सबील को देखने लगातार दो दिन तक लोगों की बडी भीड जुटती रही।
उधर आगरा के सौ से अधिक मुस्लि म अबादी वाले इलाकों में चार सौ सेज्यारदा ताजिये रखे गये और मातमी जुलूसों के साथ इन्हें करबला में दफन कर दिया गया।

