खास फर्क नहीं नमामी गंगे और स्व राजीव गांधी के गंगा एक्शन प्लान में
लखनऊ: भारत सरकार के
द्वारा हाल में घोषित नमामि गंगे कार्यक्रम को कांग्रेसियों ने स्व राजीव
गांधी
के द्वारा ढाईदशक पूर्व शुरू किये गये गंगा एक्शन प्लान के समरूप ही माना है, इस लिये इसके विरोधी की राजनीति न
कर पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमती
सोनियां गांधी स्वयं वाराणसी के गंगाघाट पहुंच साध्यकाल को होने वाली गंगा आरती
कार्यक्रम में भाग लेने पहुंच रही हैं।उ प्र कांग्रेस के नेताओं में नेतृत्व के
इस फैसले से भारी राहत महसूस की जा रही है।पूर्वांचल के लोग भले ही भाजपा विरोधी
हों किन्तु न तो श्री नरेन्द्र मोदी के नमामी गंगे कार्यक्रम के विरोधी हैं और
नहीं गंगा
एक्शन प्लान के।
एक्शन प्लान के।
उधर भारत सरकार के द्वारा बाढ
के बचाव के कार्यक्रमों के दौर में नामामी गंगे कार्यक्रम के तहत होने वाले
कार्यों की घोषणा कर दी है।
आधिकारिक जानकारी के अनुसार नमामि गंगे अभियान में कार्यान्वयन की दिशा में
एक और महत्वपूर्ण कदम के अंतर्गत राष्ट्रीय गंगा नदी बेसिन प्राधिकरण (एनजीआरबीए)
की उच्चाधिकार प्राप्त संचालन समिति (ईएससी) ने आज 400 करोड़ (लगभग)
रूपए की विभिन्न परियोजनाओं को स्वीकृति दे दी है। इन परियोजनाओं में घाटों का
विकास, रुद्रप्रयाग से गुप्तकाशी (उत्तराखंड) के खंड में
घाटों और शमशान घाटों, कानपुर में घाटों और शमशान घाटों का
पुनर्वास/विकास, कानपुर शहर के सीसामउ और अन्य नालों का
अवरोधन और प्रवाह, उत्तर प्रदेश में रामगंगा पर बिजनौर में
घाटों और शमशान घाटों का विकास, इलाहाबाद में घाटों और शमशान
घाटों का विकास कार्य, बिहार के कहलगांव में सार्वजनिक
सुविधाओं/शमशान घाटों/नदी के अग्रणी क्षेत्रों के विकास सहित घाटों का निर्माण,
झारखंड के साहिबगंज से राजमहल के खंड में घाटों और शमशान घाटों का
विकास, पश्चिम बंगाल वनीकरण कार्यक्रम में भातपारा और नैहाटी
में विद्युत शमशानगृह का निर्माण और उन्नयन और उत्तरप्रदेश के बिजनौर में 13 घाटों और पांच शमशान गृहों का विकास शामिल है।
