नई दिल्ली: वस्तु और सेवा कर विधेयक के राज्यसभा में बहुमत से पारित हो गया। मत विभाजन की प्रक्रियाके तहत इस विधेयक और उसमें रखे गये संशोधनोंपर वोटिंग की औपचारिकता भी हुई। इसमें राज्यों के करों को हटाकर देशभर में समान कर प्रणाली लागू करने का प्रावधान है। इसमें केंद्रीय उत्पाद कर, राज्यों के वैट, मनोरंजन, प्रवेश और विलासित करों को हटाकर एक ही दर पर जी एस टी लगेगा। इस प्रणाली के लागू होने से वस्तुओं और सेवाओं का सुचारू रूप से आवागमन हो सकेगा।
विधेयक पर
हुई छह घंटे से अधिक चर्चा का उत्तर देते हुए वित्तीय मंत्री अरूण जेटली ने कहा कि सरकार इस विधेयक के लिए अत्यंत उचित दर लगाने का प्रयास करेगी। इस समय वित्त मंत्री इस वि धेयक पर चर्चा का जवाब दे रहे हैं। कांग्रेस के पी। चिदम्बरम ने चर्चा शुरू करते हुए मांग कि थी वस्तु और सेवा कर की मानक दर मुख्य आर्थिक सलाहकर के सुझाव के अनुरूप 18 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी इसके पक्ष में समर्थन जुटाने के लिए देशभर में अभियान चलाएगी।
हुई छह घंटे से अधिक चर्चा का उत्तर देते हुए वित्तीय मंत्री अरूण जेटली ने कहा कि सरकार इस विधेयक के लिए अत्यंत उचित दर लगाने का प्रयास करेगी। इस समय वित्त मंत्री इस वि धेयक पर चर्चा का जवाब दे रहे हैं। कांग्रेस के पी। चिदम्बरम ने चर्चा शुरू करते हुए मांग कि थी वस्तु और सेवा कर की मानक दर मुख्य आर्थिक सलाहकर के सुझाव के अनुरूप 18 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी इसके पक्ष में समर्थन जुटाने के लिए देशभर में अभियान चलाएगी।
यू पी के राजनैतिक दलों के नेताओं ने कहा है कि अगर जी एस टी लागू हो जाने के बाद राज्य सरकर की कर संग्राक एजेंसियों का दखल सामान्य कारोबारी गतविधियों में कम हुआ तो निश्चित रूप से उप्रमें व्यापार को काफी बढावामिल सकेगा।
