1 अगस्त 2016

पूर्व मुख्य मंत्री आवास आवंटन नियम-1997 निरस्त

--लखनऊ में अधा दजर्न पूर्व मुख्‍यमंत्रियों के नाम पर आवंटित संपत्‍तियां होंगी खाली

नई दिल्‍ली:उच्‍चतम न्‍यायालय ने व्‍यवस्‍था दी है कि पूर्व मुख्‍यमंत्री जीवनभर के लिए सरकारी आवास
(क्‍या कहें ,वैसे भी अब कहने को बचा ही क्‍या है)
नहीं रख सकते। न्‍यायालय ने
2004 में दाखिल एक याचिका पर फैसला सुनाते हुए कहा कि ऐसा कोई भी सरकारी आवास दो या तीन महीने के अंदर खाली किया जाना चाहिए। पूर्व मुख्‍यमंत्री आवास आवंटन नियम- 1997 के तहत य आंवंटन होते आये थे।
उत्‍तरप्रदेश स्‍थित एक गैर सरकारी संगठन ने पूर्व मुख्‍यमंत्रियों और ऐसे गैर पात्रों को सरकारी कोठियों के आवंटन के
खिलाफ याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि इलाहाबाद उच्‍च न्‍यायालय के निर्देश के बावजूद उत्‍तरप्रदेश सरकार ने पूर्व मुख्‍यमंत्रियों को कोठियां आवंटित करने के लिए कोई कदम नहीं उठाया है। गैर सरकारी संगठन लोक प्रहरी की  तय किए थे।

एक दिलचस्‍प तथ्‍य यह और है कि राजस्‍थान के राज्‍यपाल श्री कल्‍यान सिह के मुख्‍यमंत्री पद के कार्यकाल के बाद से अपने कार्यकार्यकाल में ही पूर्व मुख्‍यमंत्रीकी हैसियत से अघोषित रूप से बंगला आवंटित करवालेने की कार्रवाही करने की परंपरा रही है। प्रदेश के वर्तमान मुख्‍यमंत्री श्री अखिलेश यादव के लिये भी प्रदेश का लोक निर्माण विभाग एक बंगला तैयार कर रहा है,जबकि अभी उनके कार्यकाल को एक साल के लगभग है,यही नहीं वह चनाव लडकर जीतने का भी लगतार दावा कर रहे हैं। गैर सरकारी संगठन लोक प्रहरी की इस पहल को खूब चर्चा मिली है और अब दो महीने के बाद क्‍या अगला कदम संगठन के द्वारा दठाया जाना इसका अन्‍य को नहीं उ प्र पुलिस महकमें को खास इंतजार है,क्‍यों कि बंगले खाली करवानेमें सबसे अहम भूमिका तो इसी महकमे की होती है।