--बौद्धबिहार चक्की पाट पर पहला प्रचार पैम्पलैट भगवान बुद्ध को किया अर्पित
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| (बौद्ध विहार चक्कीपाट पर स्वतंत्रता सेनानी श्री चिम्मन लालने बावा साहिब भीमराव अम्बेडकर कोश्रद्धांजलि अर्पितकर वर्ष 2016-17को घोषित किया नशा बन्दी वर्ष) |
आगरा: डा उत्तर प्रदेश में वित्तीय वर्ष 2016-17 नशाबन्दी वर्ष
के रूप में मनाया जायेगा । यह घोषणा भीमराव
अम्बेडकर की 125 वीं जयंती के अवसर पर
बौद्ध विहार चक्की पाट पर आयोजित कार्यक्रम में शराब बन्दी आंदोलन के उपाध्यक्ष
एवं शिक्षक नेता डा बिजेन्द्र सिह नरवार के द्वारा की गयी। उन्होंन कहा कि
सामाजिक कुरूतियों के लिये प्रदेश में संघर्षरत बाबा साहिब डा भीमराव अम्बेडकर के
मिशन और गांधीवाद को समर्पित संस्थाओं
से समन्वय बैठाकर इसे सक्रिय किया जायेगा। यह विशुद्ध गैर राजनैतिक अभियान होगा जिसके माध्यम से राजनैतिक दलों को अपनी अबकारी नीति और विकास मॉड्यूल को नशेबाजी के राजस्व से मुक्त रखने को प्रेरित किया जायेगा। वायोबृद्ध स्वतंत्रता सेनानी श्री चिम्मन लाल जैन ने इस अवसर पर शराब विरोधीवर्ष 2016-17 का पैम्पलेट जारी करते हुए कहा कि इसे जनजन तक पहुंचाने के काम में जुटेगे। उन्होंने कहा कि शराब बन्दी समाज के सामने सबसे बडा लक्ष्य है । अगरा आपको दलित और आर्थिक रूप से पिछछे वर्ग का शोषण दूर करना है, तो शराब बन्दी के कडे कदम को दठाना ही होगा।
से समन्वय बैठाकर इसे सक्रिय किया जायेगा। यह विशुद्ध गैर राजनैतिक अभियान होगा जिसके माध्यम से राजनैतिक दलों को अपनी अबकारी नीति और विकास मॉड्यूल को नशेबाजी के राजस्व से मुक्त रखने को प्रेरित किया जायेगा। वायोबृद्ध स्वतंत्रता सेनानी श्री चिम्मन लाल जैन ने इस अवसर पर शराब विरोधीवर्ष 2016-17 का पैम्पलेट जारी करते हुए कहा कि इसे जनजन तक पहुंचाने के काम में जुटेगे। उन्होंने कहा कि शराब बन्दी समाज के सामने सबसे बडा लक्ष्य है । अगरा आपको दलित और आर्थिक रूप से पिछछे वर्ग का शोषण दूर करना है, तो शराब बन्दी के कडे कदम को दठाना ही होगा।
श्री चिम्मन लाल ने कहा
कि बिहार सरकार ने यह कदम दठाकर यू पी के सामने आदर्श उत्पन्न किया है,कई अन्य
राज्यों ने भी शराबपर रोक लगायी है किन्तु बिहार ही यू पी के लिये असली आदर्श
है। उन्होंने कहा कि आगरा में जनमानस संकोच और स्वस्थापित बर्जनाओं मे फंसा है ज्यादतर
लोग उदासीन है या फिर अपने सामाजिक और आर्थिक हालातों के आगे मजबूर है।उन लोगों से
मैं कहना चाहता हूं कि अगर बाबा साहिब डा अम्बेडकर भी हालातो के कारण खामोश बैठ
गये होते तो देश में लोकतंत्र की मजबूती आज की सी नहीं होती और नहीं सामाजिक न्याय
के प्रति प्रतिबद्धता का माहौल ही बना होता।
पैम्पलैट की एक प्रति बौद्ध बिहार चक्की पाट के मठ को समर्पित की
जिसे प्रबंधन की ओर से ग्रहण करते हुए चौ राम
गोपाल ने कहा कि बाबा साहिब खुद भी शराब की आदत को समाज की बडी बुराई मानते थे और
जिस बौद्ध धर्म के वह अनुयायी थे उसमें भी शराब की लत को कोई स्थान नहीं है। उन्होंने
कहा कि हकीकत में दलित और आर्थिक रूप से विपन्नो का विकास और संपन्न बनने का
रास्ता शराब बन्दी आंदोलन की कामयाबी पर ही निर्भर है।
ग्रामीण क्षेत्रो में शराब बन्दी आंदालन को नशाबन्दी अभियान
समिति के माध्यम से अंजामदेने को सक्रिय सामाजिक कार्यकर्त्ता के रूप में सक्रिय
वरिष्ठ सर्वोदयी श्री विजय सिह तोमर ने कहा कि गांवों की संपन्तता शराब खोरी की
आदत की भेट चढचुकी है,बीमारी और कायाकमजोर करने वाली इस लत ने ग्रामीणों की क्षमताओं को
भी कम करके रख दिया है।शासन का घ्यान आकर्षित करने को 2 मई को ग्रामीण कलैक्ट्रेट
का घेराव करेंगे।श्री धाकरे सहित नौजवानों के एक दर्जनप्रतिनिधियों ने भी सभा में
अपने विचारव्यक्त किये।इन नौजवानों का कहना है कि सरकारभले ही बीमारी का इलाज के
लिये इंतजाम नहीं करवाये किन्तु बीमारी घर घर पहुंचाने वाली शराब बिक्री को बढावा
देने से तो बाज आये।
