श्री चिम्मन लाल जी उन चन्द, रहे बचे परंपरावादी गांधी वादियो
में से हैं जो अब भी चर्खा चलाने में विश्वास करते हैं।श्री पैट ने अपने भारतीय
अभियान में बर्धा आश्रम भी गये थे और उन्हों ने वहां...
चर्खा चलाने की औपचारिक रस्म ही नहीं पूरी की आपितु इसको चलाने का प्रशिक्षण भी लिया।उन्हों ने बर्धा में यह भी इच्छा जतायी थी कि अपनीयात्रा के दौरान उन लोगों से मिलना चाहेगे जो कि गांधीवादी परंपराओं को अब भी अपनी जिंदगी का हिस्सा बनाये हुए हैं।
चर्खा चलाने की औपचारिक रस्म ही नहीं पूरी की आपितु इसको चलाने का प्रशिक्षण भी लिया।उन्हों ने बर्धा में यह भी इच्छा जतायी थी कि अपनीयात्रा के दौरान उन लोगों से मिलना चाहेगे जो कि गांधीवादी परंपराओं को अब भी अपनी जिंदगी का हिस्सा बनाये हुए हैं।
इसी के फलस्वरूप श्रीचिम्मन लाल जी ने उनके सम्मान मे
संजय प्लेस के एम्पोरियम ब्लाक स्थित खादी भंडार पर चर्खा कातने का निश्चय
किया था । आगरा प्रशासन को भी इसकी जानकारी
पत्र के द्वारा दे दी थी।अपनी घोषणा के अनुसार श्री चिम्मन लाल ने प्रात:7
बजे से पूर्वाह्न 11.30 बजे तक चर्खा काता। आस्ट्रेलियन मेहमान के साथ तो उनका
संवाद कायम नहीं हो सका किन्तु तमाम विदेशी जरूर श्री चिम्मन लाल जी के द्वारा
चर्खा चलाना देखने पहुंचत रहे ।
श्री चिम्मन लाल ने कहा कि उनकी मुलाकात भले ही श्री पैट
से नहीं हो पायी हो किन्तु उन्हे खुशी है, कि वह पैदल चलते हैं,दांडी मार्च को पैदल चल कर संदेश प्रचार को श्रेष्ठ प्रयास
मानते हैं तथा चर्खे में उनका अपने अंदाज में अटूट विश्वास है।
श्री जैन ने एक प्रश्न के
जबाब में कहा कि यह सही है कि श्री पैट के आगरा में होने के बावजूदवह उनसे नहीं मिल
सके किन्तु इसको लेकर किसी से शिकायत –शिकवाह नहीं है। हकीकत में पैट से संवाद कायम
करने की कोशिश उनके अपने साथियों के द्वारा ही कुछ विलम्ब से शुरू की गयी थी।
