-- ‘विश्वसनीयता सर्वपरि’ के निष्कर्ष के साथ मीडिया सैमीनार संपन्न
आगरा:पत्रिकारिता के समक्ष नित नई चुनौतियां खडी होती रहती है साथ ही उसे भी अपने
किस्म के
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| (सैमीनार के सत्रमें विश्लेषण प्रस्तुत करते हुए श्रीपीयूष पांडेय) |
नये प्रतिस्पर्धी दौर से होकर गुजरना पड रहा है।किन्तु इससे जनसंवाद के
माध्यमों पर प्रतिकूल असर पडने की बात सोचना गलत है, हकीकत मे
प्रिंट और इलैक्ट्रानिक मीडिया इससे धारदार ही हुए हैं। यह मानना है देश के प्रमुख
मीडिया
हाऊसों के संपादकों और न्यूजरूम से जुडे वरिष्ठ पत्रकारों का जो कि गुरुवार को केन्द्रीय हिन्दी संस्थान में इंटरनेट और मास मीडिया पर आयोजित दो दिवसीय सेमीनार के दूसरे दिन के सत्र को समेधित कर रहे थे। वक्ताओं ने अपने अनुभवों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रगतिके नये दौर और नये प्रयोगों की होड के दौर में भी विश्वसनीयता ही मास मीडिया में अब भी ‘सर्वपरि है’।संस्थान के प्रो देवेन्द्र शुक्ला,डा राज शंकर पांडेय, ने आयोजन में हुई चर्चाओं को महत्वपूर्ण बताते हुए उम्मीद जतायी कि वैचारिक परपक्वता के लिये वैचारिक आदान प्रदान का यह सिलसिला चलता रहेगा। कार्यक्रम संयोजक केशरी नंदन ने स्वागत किया जबकि अनुपम श्रीवास्तव ने आभार जताया।पीयूष पांडेय ने कहा कि सोशल मीडिया की चुनौती का सकारात्मक असर हुआ है।गतिशीलता मीडिया जगत की नियति है।राकेश उपाध्याय ने कहा कि सोशल मीडिया की उपयोग तो है किन्तु यदि वह आम रुटीन जिंदगी में जमीन से काटने वाला साबित हो रहा है तो इसे रोकना चाहिये।दीपक अग्रवाल, अभिषेक मल्होत्रा ,एन आर स्मिथ आदि अन्य विचार व्यक्त करने वालों में शामिल थे। कार्यक्रम का संचालन श्री बृज खंडलेवाल के द्वारा किया गया।
हाऊसों के संपादकों और न्यूजरूम से जुडे वरिष्ठ पत्रकारों का जो कि गुरुवार को केन्द्रीय हिन्दी संस्थान में इंटरनेट और मास मीडिया पर आयोजित दो दिवसीय सेमीनार के दूसरे दिन के सत्र को समेधित कर रहे थे। वक्ताओं ने अपने अनुभवों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रगतिके नये दौर और नये प्रयोगों की होड के दौर में भी विश्वसनीयता ही मास मीडिया में अब भी ‘सर्वपरि है’।संस्थान के प्रो देवेन्द्र शुक्ला,डा राज शंकर पांडेय, ने आयोजन में हुई चर्चाओं को महत्वपूर्ण बताते हुए उम्मीद जतायी कि वैचारिक परपक्वता के लिये वैचारिक आदान प्रदान का यह सिलसिला चलता रहेगा। कार्यक्रम संयोजक केशरी नंदन ने स्वागत किया जबकि अनुपम श्रीवास्तव ने आभार जताया।पीयूष पांडेय ने कहा कि सोशल मीडिया की चुनौती का सकारात्मक असर हुआ है।गतिशीलता मीडिया जगत की नियति है।राकेश उपाध्याय ने कहा कि सोशल मीडिया की उपयोग तो है किन्तु यदि वह आम रुटीन जिंदगी में जमीन से काटने वाला साबित हो रहा है तो इसे रोकना चाहिये।दीपक अग्रवाल, अभिषेक मल्होत्रा ,एन आर स्मिथ आदि अन्य विचार व्यक्त करने वालों में शामिल थे। कार्यक्रम का संचालन श्री बृज खंडलेवाल के द्वारा किया गया।
केन्द्रीय
हिन्दी संस्थान के रजिस्ट्रार सी के त्रिपाठी ने कार्यक्रम में मीडिया के परपक्वों
की सहभागिता को महत्वपूर्ण बताया तथा उम्मीदजतायी कि आने वाले समय मे वेचारिक आदान
प्रदान के और भी अवसर संभव होंगे।
