7 फ़रवरी 2016

दाराशिकोह लाब्रेरी मे दो दिन होंगे ‘तहजीब ए आगरा ‘ के कार्यक्रम






--नगर निगम सफाई ओर अतिक्रमण तक के प्रति भी लापरवाह


ताज लिट्रेचर फैस्‍टेविल के तहत दाराशिकोह की लाइब्रेरी हाल में होगा दो दिनी तहजीब ए आगरा
आगरा: ताज लिट्रेचर फैस्‍टेविल के तहत मोतीगंज बाजार में स्‍थित पुरानी चुंगी के नाम से मशहूर दाराशिकोह की लाइब्रेरी में दो दिवसीय आयोजन होगे। एक दिन सांस्‍कृतिक कार्यक्रम और शायरी व गजलों की प्रस्‍तुतियां होंगी जबकि दूसरेदिन दाराशिकोहके लिट्रेचर पर केन्‍द्रित चर्चा सत्र होंगे।यह जानकारी आधिकारिक रूप से ताज लिट्रेचर फैस्‍टेविल (टी एल एफ) आयोजको की ओर से ही जारीहोगी किन्‍तु आयोजन कमेटी के सदस्‍य श्री बृज खंडेलवाल ने भवन में संचालित विद्यालय की प्रसिपल एवं अन्‍य स्‍टाफ सदस्‍यों के साथ व्‍यवस्‍थाओं पर चर्चा की।
श्री खंडेलवाल ने बताया कि यह स्‍थान कभी आगरा की तहजीब का केन्‍द्र रहा था, इस लिये यहां आयोजितकार्यक्रम तहजीबए आगरा के रूप में ही आयोजित करने की योजना है।इस सम्‍बन्‍ध में विद्यालय के प्रबंधन के श्री ब्रजेश चन्‍द्रा से भी बात हुई है जिन्‍होंने आयोजन को पूर्ण सहयोग देने को अश्‍वस्‍त किया है।ऐतिहासिक इमारत  दाराशिकोह  का कुतुबखाना पुस्तकालय’, जो की आजादी से पूर्व  स्थानीय नगर पालिका के  मुख्यालय पुरानीचुंगी के रूप में जानी जाती  थी  । आजादी की लडाई में  इस चुंगी की इमारत के नीचे के मैदान को
 स्वतंत्रता सेनानियों द्वारा  जन सभाओं को संबोधित करने के लिए  इस्तेमाल किया जाता था । हाल ही में आगरा के वरिष्ठ पत्रकार बृज खण्डेलवाल और राजीव सक्सेना ने  इस इमारत का भ्रमड कर चिंता व्यक्त करते हुए  कहा  कि हालत अति खराव है, इमारत के अनुरक्षणका प्रयास विद्यालय प्रबंधन के सहयोग से ही करवाये जाने का प्रयास होगा।   यह संत्ति स्थानीय नगर निगम के  संरक्षण में  है। लेकिन नगर निगम इसके संरक्षण में बिलकुल  रुचि नहीं ले रहा  है । कोई नई व्‍यवस्‍था की जाये इसकी अपेक्षा विद्यालय को ही जरूरी आधार भूत सुविधओं के लिये साधन उपलब्‍ध करवाये जाये तो ज्‍यादा उपयुक्‍त रहेगा।

 भारत सरकार के पुरातत्‍व सर्वेक्षण से कोई उम्‍मीद रखना ज्‍यादती होगी वह पहले से ही अपनी सूची की  पुरातत्‍व सूची के स्‍थलों में से विश्‍वध्‍रोहरों के अलावा अन्‍य के साथ न्‍याय नहीं कर सका है।जहांतक राज्‍य पुरातत्‍व विभाग का सवाल है यह आगरा ही नहीं लखनऊ तक में छिन्‍न भिन्‍न है और सैफई व बौद्ध सर्किट से आगे नहीं बढ सका है। मथुरा म्‍यूजियम तक करोडों की ग्रांट के बावजूद सही प्रकार से संचालित हीं कर सका है।