--कई स्थापित सियासी
चेहरे पशोपेश में , बचाव को शुरू हुई पेशपेश में
आगरा नोएडा
अथॉरिटी के पूर्व चीफ इंजीनियर यादव सिंह से पूछताछ के बाद सीबीआई ने गिरफ्तार कर
लिया है,
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| (याादव सिह) |
उनपर करोड़ों की संपत्ति के मामले में घपले करने का आरोप
है । सीबीआई ने यादव सिंह के खिलाफ आईपीसी की धारा 409, 420, 466, 467,
469, 481 के अलावा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज किया
है। इस गिरफ्तारी से उत्तर प्रदेश की राजधानी में गतविधियां अनायास ही तेज हो गयी
हैं। कई बेडे बकीलों के यहां नय सिरे से प्रमुख राजनीतिज्ञों के फोन खटखटाने का सिलसिला
शुरू हो गया है।
उल्लेखनीय हे कि
यादव सिह के खिलाफ लगे आरो पो की जाच का मामला इलहाबाद हाई कोर्ट की याचिका के बाद
ही सीबी आई को सोंपा गया था। उत्तर प्रदेश सरकार ने इस मामले में खास
दिलचस्पी नहीं दिखायी थी।
दिलचस्पी नहीं दिखायी थी।
. इससे पहले
उनसे जुड़े असिस्टेंट प्रोजेक्ट इंजीनियर रमेंद्र को भी सीबीआई ने गिरफ्तार किया
था.
इस मामले में गिरु्तारों के परिवार वालों से भी पूछ ताछ की
जा रही है।वैसे इस मामले में 80 बिल्डरों
से अब तक पूछताछ हो चुकी है.
जो जानकारियां अब तक सामने आयी हैं उनके अनुसार इस मामले में
में यह दूसरी गिरफ्तारी है. इससे पहले गिरफ्तार हुआ रमेंद्र, यादव सिंह के साथ भ्रष्टाचार में संलिप्त था.। वह सीधे
यादव सिंह को रिपोर्ट करता था. वह एक डायरी मेंटेन करता था, जिसमें
ठेकेदारों और बिल्डरों से मिलने वाली रिश्वत और उनके बंटवारे के बारे में ब्यौरा
दर्ज होता था।
बताते चलें कि सीबीआई ने यादव सिह के खिलाफ भ्रष्टाचार, आपराधिक साजिश, धेखाधड़ी, फर्जीवाड़ा
और कानून के उल्लंघन के संबंध में केस दर्ज किया था. उसके बाद उनके कई ठिकानों पर
हुई छापेमारी में अकूत संपति का खुलासा हुआ था. इसके साथ ही उनके राजनीतिक रसूख
सामने आए थे.
यूपी की सामाजिक कार्यकर्ता नूतन ठाकुर ने यादव सिंह के मामले की जांच सी बी आई से कराने को लेकर एक जनहित याचिका दायर की थी. उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर करके कहा था कि राज्य सरकार की पूर्ण निष्क्रियता साफ दिख रही है. इसके बाद केस सीबीआई को सौंप दिया गया था.
आयकर विभाग ने 954 करोड़ रुपये के टेंडर घोटाला मामले में यादव सिंह और उनकी पत्नी के परिसरों पर छापे मारे थे. इनमें भारी मात्रा में नकदी, दो किलो सोना और हीरे के कई आभूषण बरामद हुए थे. उनके बैंक खातों और निजी फर्मों को भी आयकर विभाग ने जांच के दायरे में लिया था.
