--नौ वर्कशॉपों के साथ क्रिटीकेयर-2016 शुरू
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| (क्रिटीकेयर -2016' की शुरूआत रही डाश्रीकांतनिवास और डा कुलकर्णीके उद्बोधनों के साथ) |
आगरा:
क्रिटिकल (एक्सीडेंट, सीने में दर्द, सांस फूलना, सर्जरी आदि के) मरीजों के इलाज
में अल्ट्रासाउंड तकनीक एक अत्यंत महत्वपूर्ण है। फेफड़े, हृदय, किडनी सिर आदि
सभी अंगों के अल्ट्रासाउंड से न सिर्फ मरीज के मर्ज का पता सही समय पर लगाया जा
सकता है, बल्कि मर्ज का पता लगने पर सही समय पर इलाज सम्भव हो पाने से बाद की
जटिलताओं को दूर भी किया जा सकता
है। यह कहना है दिल्ली के ख्याति प्राप्त चिकित्सक डॉ. श्रीकांत श्रीनिवास व अतुल कुलकर्णी का ,जो कि इंडियन सोसायटी ऑफ क्रिटीकल केयर मेडिसिन की 22वीं वार्षिक कांफ्रेंस क्रिटीकेयर-2016 के पहले दिन के सत्र को सम्बोधितकर रहे थे।
है। यह कहना है दिल्ली के ख्याति प्राप्त चिकित्सक डॉ. श्रीकांत श्रीनिवास व अतुल कुलकर्णी का ,जो कि इंडियन सोसायटी ऑफ क्रिटीकल केयर मेडिसिन की 22वीं वार्षिक कांफ्रेंस क्रिटीकेयर-2016 के पहले दिन के सत्र को सम्बोधितकर रहे थे।
डॉ. श्रीकांत श्रीनिवास ने कहा कि भारत में पीएनडीटी एक्ट तो, कभी डॉक्टरों में जागरूकता के अभाव से
अल्ट्रासाउंड की सुविधा सभी गम्भीर मरीजों को नहीं मिल पाती। अल्ट्रासाउंड मशीन का
जहां एक ओर दुरुपयोग हो रहा वहीं पीएनडीटी एक्ट गम्भीर मरीजों को अल्ट्रासाउंड की
सुविधा से दूर रहजाने की एक वजह है। उन्होंने कहा कि भारत जैसे देश में पीएनडीटी
एक्ट के जनित पेचीदगियों को समझ कर इनका समाधान करना होगा जिससे मीरीजों के स्वस्थ्य
संघर्ष की बाधा दूर हो सके।
22वीं वार्षिक कांफ्रेंस क्रिटीकेयर-2016 का
पहला दिन अल्ट्रासाउंड की नई एप्लीकेशन के साथ गम्भीर में मरीजों में फेफड़े,
हृदय, किडनी आदि के अल्ट्रासाउंड के बारे में जानकारी प्राप्त कर डॉक्टरों द्वारा
खुद को अपडेट करने को समर्पित रहा । आपसी चर्चा में उन्हों ने इस बात पर भी
प्रकाश डाला कि मरीज का बीपी कम होने की सही वजह का पता
अल्ट्रासाउंड से सिर्फ 15 मिनट में लगाया जा सकता है। इसी तरह फेफड़े तक का
अल्ट्रासाउंड कर उसमें हवा भरने, इनफेक्शन या उन्य वजह का पता लगाया जा सकता है।
वर्कशॉप में मरीजों का अल्ट्रासाउंड करके भी डाक्टरों को व्यवहारिक चुनौतियो से
अवगत करवाया गया।
आर्गनाइजिंग
कमेटी के सचिव डॉ. रणवीर सिंह त्यागी व राकेश त्यागी ने बताया कि पांच दिवसीय
कांफ्रेंस के पहले दिन होटल जेपी पैलेस, होटल अमर, होटल करन विलास, होटल पुष्पविला
में कुल 9 वर्कशॉप हुई। 4 फरवरी को भी 12 वर्कशॉप होंगी। कांप्रेंस में 20 देशों
के लगभग 3 हजार से अधिक
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| बर्कशाप में बांटे गये अनुभव |
वर्कशॉप
में लोकल को-ऑडिर्नेटर, डॉ. राजकुमार गुप्ता, अपूर्व मित्तल,
सिद्धार्थ अग्रवाल, आरएन गोयल, अपूर्व जैन, सौरभ शर्मा, पुनीत मित्तल, नरेश
त्यागी, रजत अरोरा, मधुर चौहान आदि थे।
आम
व्यक्ति भी सीखें इंटेसिव केयरः डॉ. अय्यर
आगरा।
रोड एक्सीडेंट के मामले लगातार बढ़ने की वजह से यह जरूरी हो गया है कि आम व्यक्ति
बी इंटेसिव केयर को सीखें। यह कहना था इंडियन सोसायटी ऑफ क्रिटीकल केयर मेडिकल के
राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. शिव कुमार अय्यर का। उन्होंने कहा कि रोड पर पड़े घायल
व्यक्ति को बचाने के लिए इंटेसिव केयर देना बहुत जरूरी है। यदि व्यक्ति मूर्छित है
तो उसे कृत्रिम सांस दें। हृदय की मसाज दें। जिससे घायल की जान बचाई जा सके। आम
लोगों के लिए बीएलएस व एसीएलएस कोर्स भी हैं। यह भी जरूरी है कि कोई दुर्घटना होने
पर लोग तमाशबीन न बनें। बल्कि घायल को तुरन्त हॉस्पीटल पहुंचाएं। चाहें चोट हो या
नहीं। क्योंकि कई बार अंदरूनी चोट होती है, जो बाद में खतरनाक हो सकती है।
प्यास
कम लगती है, किडनी की समस्या तो नहीं
यदि
आपको प्यास कम लगती है और यूरिन भी कम जाते हैं तो एक बार किडनी का चैकअप जरूर करा
लें। यह कहना है एनआरआई डॉ. रवि कुमार (अमेरिका) का। उन्हों ने बताया कि किडनी की
समस्या होने पर अक्सर मरीज सुस्त रहते हैं और भूख व प्यास कम लगती है। डायबिटीज व
बीपी के रोगियों में किडनी की समस्या होना आम बात है। क्योंकि किडनी एक छोटा अंग
है, जिसे अधिक ब्लड सप्लाइ चाहिए। बीपी कम होने पर किडनी में ब्लड सप्लाइ कम
पहुंचती है और यूरिन कम बनता है। यूरिन कम बनने से शरीर के जहरीले व अनावश्यक तत्व
पूरी तरह से बाहर नहीं निकल पाते हैं। इससे किडनी के अलावा अन्य अंगों विशेषकर
हृदय पर भी विपरीत असर पड़ता है।(रिपोर्ट:सुश्री अंशु पारीक)

