7 फ़रवरी 2016

तकनीकि ज्ञान के आदान-प्रदान के साथ सम्पन्न हुआ वैश्विक सम्मेलन

समापन समारोह में कांफ्रेंस आयोजन की पूरी टीम को किया गया सम्मानित

(क्रिटीकलकेयर -2016 तकनीकिऔरशोधपरक अनुभवों के आदान प्रदान का बना पर्याय)

आगरा: पांच दिन तक चले क्रिटीकल केयर के क्षेत्र में विचार मंथन व नई-नई तकनीकों के आदान प्रदान के साथ  क्रिटीकेयर-2016 का समापन हो गया। वैश्विक स्‍तर की भागीदारी इस सम्‍मेलन का उद्घाटन मानव संसाधन राज्‍य मंत्री रामाशंकर कठैरिया के द्वारा किया गया था ।

सम्मेलन के विभिन्‍न सत्रों मे देश विदेश के 3 हजार से अधिक इंटेसिविस्टों और इंटरनेसनल सेप्सिस फोरम व यूरोपियन सोसायटी ऑफ इंटेसिव केयर मेडिसिन के 200 से अधिक विशेषज्ञों ने
भाग लिया। साइंटिफिक सेक्रेट्री डॉ. दीप्तिमाला अग्रवाल ने बताया कि कांफ्रेंस में 150 रिसर्च पेपर पढ़े गए। आर्गनाइजिंग कमेटी के चेयरमैन डॉ. सुभाष चंद्रा ने आर्गनाइजिंग सचिव डॉ. रणवीर सिंह त्यागी, डॉ. राकेश त्यागी व साइटिफिक सेक्रेट्री डॉ. दीप्तिमाला को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। उन्होंने कांफ्रेंस की सफलता का श्रेय डॉ. रणवीर, डॉ. दीप्तिमाला व डॉ. राकेश के टीम वर्क को किया। इसके साथ ही आर्गनाइजिंग कमेटी के मैम्बर ने कांप्रेंस में सभी सहयोगियों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया।
स्वास्थ्य के लिए एकजुट होकर काम करें सार्क देशः डॉ. अय्यर
सम्‍मेलन के सत्रों के क्रम के तहत हुए सार्क देशों के पैनल डिसकशन में आईसीसीएम (डियन सोसायटी ऑफ क्रिटीकल केयर मेडिसिन) के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. शिव कुमार अय्यर ने कहा कि समान जलवायु होने के कारण इन देसों की बीमारियों भी लगभग समान हैं। इसलिए स्वास्थ्य की दृष्टि से हमें एकजुट होकर काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि क्रिटीकल केयर में शार्ट टर्म कोर्स डॉक्टरों व नर्सों के लिए बेहद जरूरी हैं। उन्होंने बताया की भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी है, इस वजह से 90 पीसदी भारतीय आईसीयू की पहुंच से महरूम रहते हैं।श्रीलंका के डॉ. पूवनेनद्रियन शानमुगम ने बताया कि श्रीलंका में 95 फीसदी सरकारी हास्पीटल में आईसीयू हैं। उन्होंने श्रीलंका में भी चिकित्सा के क्षेत्र में ब्रेन ड्रेन की समस्या को जाहिर किया। इस मौके पर उन्होंने नई तकनीकों व कोर्स की भी चर्चा की।नेपाल के डॉ. लावा जोशी ने बताया कि नेपाल में डॉक्टरों की कमी है। 62.7 प्रतिशत आईसीयू प्राइवेट हास्पीटल में, 15.7 प्रतिशत कम्यूनिटी हास्पीटल में, 21.6 प्रतिशत सरकारी आस्पतालों में हैं। 

गर्भावस्था में सांस फूलना व घबराहट को नजरअंदाज न करेंएक अन्‍य सत्रमें बताया गया कि यदि आप गर्भ से हैं और सांस फूलना, घबराहट, बैचेना व बुखार जैसे लक्षण नजर आते हैं तो इसे नजरअंदाज न करें। यह एम्बोलिजम ( नस में खून का घक्का जमने) के लक्षण भी हो सकते हैं। जिससे आपकी जान पर बी बन सकती है। क्रीटीकेयर-2016 में विशेषज्ञों ने बताया कि जो महिलाएं 35 वर्ष से अधिक की हैं और उनका वजन अधिक हैं, साथ में पहले 3-4 बार गर्भधारण कर चुकी हैं, उनमें इसका खतरा अधिक होता है। इससे सम्बंधिक लक्षण नजर आने पर महिला को तुरन्त डॉक्टर का परामर्श लेना चाहिए।
बीपी कम होने का कारण पता लगने के बाद ही लें दवा

डिस्‍कशन भरे एक सत्र में बताया गया कि बीपी कम होने के कई कारण हो सकते हैं। बीपी कंट्रोल करने के लिए कोई एक सामान्य दवा नहीं है। बल्कि बीपी कम होने के कारण का पता चलने पर अलग-अलग स्थित में अलग-अलग दवा दी जाती है। मसलन बीपी कम होने के कारण हृदय की गति में असमानता, हृदय की मांसपेशियों का कमजोर होना, हृदय का आकार बढ़ना, लम्बे से चल रहा बुखार, किसी वजह से शरीर में आक्सीजन की कमी, फूड प्वाइनिंग, वायरल इनपेक्शन हो सकता है। इन अलग-अलग कारणों में बीपी को कंट्रोल करने के लिए अलग-अलग दवा हैं। इसलिए अपनी मर्जी से कैमिस्ट से दवा खरीद कर खुद बीपी कंट्रोल करना आपके स्वास्थ्य के लिए घातक हो सकता है। इस सेशन के कंडक्टर डॉ. राजकुमार गुप्ता थे।