ताज लिट्रेचर फैस्टेविल के आयोजको ने ही की है इसके लिये पहल
जाना जारी है।उल्लेखनीय है कि बृज भाषा के प्रति
जागरूकता को यह नई पहल उस समय शुरू की गयी हे जबकि उसे हिन्दी का भाग मान कर अलग से
पहचान दिये जाने की सरकारी नीति पर विराम लग चुका है।
उल्लेखनीय
है कि संपूर्ण बृजक्षेत्र में एक समय बृज भाषा ही आम बोलचाल की भाषा थी ।वर्तमान में
जन उपयोग में आ रही खडी बोली वाली हिन्दी प्रख्यात लेखक लल्लू लाल जी के द्वारा
फोर्ट विलियम (कलकत्ता) से आगरा आने के बाद से प्रचलित हुई।लल्लू लाल की फोर्ट विलियम
में ईस्ट इंडिया कंपनी के प्रशासनिक कैडर को हिन्दी पढाने का कार्य करते थे।क्यो
कि कंपनी के नियमो अनुसार हिन्दी भाषी क्षेत्र में किसी प्रशासनिक पद पर तभी नियुक्ति
संभव थी जबकि अधिकारी विशेष क्षेत्रीय भाषा खासकर हिन्दी जरूर जानता हो। लल्लू लाल
ने आगरा आकर हिन्दी का पहला छापाखाना आगरा के गोकुलपुरा मौहल्ले में खोला था। यही
नहीं उनकी सक्रियता के काल में ही बृज के साहित्य का बडे पैमाने पर अनुवाद हुआ था।इनमें
भक्ति काल के कई दुलर्भ ग्रंथ भी शामिल हैं जिनकी मूल प्रतियां हस्त लिखित या अन्य
किस्म की प्रतियां अब लगभग अ प्राप्त हैं।
