नशेबाजी के विरुद्ध अभियान को गति देने की जरूरत पर एक जुटता
आगरा: नशाबन्दी के खिलाफ स्वतंत्रता
सेनानी श्री चिम्मन लाल जैन के द्वारा चलाये जा रहे ‘मूवमेंट अगेंस्ट
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| (इंस्टीटयूट आफ सेाशल साइंस के विद्यार्थियों से नशोबाजीकी बढती लत को चलाये आंदलन सेनानी चिम्मन लाल ने किया सीधा संवाद) |
एडिक्शन’ को लेकर डा बी आर अम्बेडकर
विश्विद्यालय के इंस्टीट्यूट आफ सोशल साइंस के तत्वावधान में आयोजित संवाद कार्यक्रम
के दौरान आजादी के बाद आये बदलावों पर विस्तार से चर्चा के दौरान उन स्थितियों पर
विस्तार से प्रकाश डाला गया जिनके कारण नशा विरोधी आंदालन को फिर से तेज करने की जरूरत
है।श्री चिम्मन लाल....
जी ने कहा कि अंग्रेजो
के द्वारा अपना खजाना भरने के लिये नशाखकरी को भी राजस्व हित में अनदेखा किया जाना
समझ में आता है किन्तु देश की आजादी के बाद भी सरकार शराब बिकवाना जारी रखेगी यह
समझ
से परे की बात है।उन्हों ने कहा कि नशेबाजी के प्रचलन का बनाये रखने से सबसे ज्यादा
महिलाओं पर ही नकारात्मक हसर पडता है।शराब के नशे में धन निपट देने के कारण घर का
खर्च
चलाना मुश्किल हो जाता है।इसकार इस लत के पीडितों के इलाज तक की व्यवस्था नहीं
करवा पा रही है।
राजीव सक्सेना ने कहा कि सरकार को अपने रवैय में बदलाव लाना चाहिये।कॅपेन को कार्डीनेट कर रहे कार्पोरेट सैक्टर के कार्डीनेटरश्रीअनिल शर्मा ने कहा कि अब आंदालन को अंजाम देने व्यापक सपोर्ट की जरूरत है,जिसमें स्टूडेंट सपोर्ट बहुतजरूरी है। इंस्टीट्यूट के डायैरेक्टर पडा दिवाकर खरे ने कहा कि नशेबाजी समाज की एक पीडा है,जिसका समाधान होना चाहिये।उन्हों ने कहा कि भारत में न तो संस्कृति ही इसकी इजाजत देती है और नहीं जलवायु ही नशासेवन के अनुकूल है। उन्होंने आयोजन को आडीटोरियम में होने वाले यादगार कार्यक्रमों में से एक बताया ।ललित कला संस्थान की डायरैक्टर एवं इंस्टीटयूट के स्टैटिक्स डिपार्टमेंट में प्राफेसर डा विनीता सिह ने कहा कि नशेबाजी के कारण देश की सामाजिक स्थितियों और आर्थिक संसाधनों प कितना प्रतिकूल असर पडा रहा है इसकी गंभीरता को समझना चाहिये। प्रो दीपमाला श्रीवास्तव ने कहा कि नशेबाजीकी लत से समाज को लगातार क्षित पहुच रही है, इससे देश की सबसे महत्वपूर्ण ‘मानव संसाधन’सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं।डा रनवीर सिह, मोहम्मद हुसैन ,राजीव वर्मा, डा राजेश कुशवाह, डा हरिओम,डा अंशू भट्ट आदि सीनियर फैकेल्टी मेम्बर की भी संवाद में सहभागिता रही। कार्यक्रम के सांयोजक डा मोहम्मद अशरद ने श्री चिम्मन लाल जी के आंदालन और स्वतंत्रताआंदालन में रही उनकीपृष्ट भूमि की विद्यार्थियों को जानकारी दी। 96 साल की उम्र हो जाने के बावजूद जिस अंदाज में वह लगे हुए है,वह समाज में सभी के लिये प्रेरणाप्रद है। इसी लिये वह चाहते थे कि इंसटीट्यूट के विद्यार्थी भी भावी समाज शास्त्री और मानव संसाधन प्रबंधन में अपनी भूमिकाओं के परिप्रेक्ष्यमें उनकीविचारधारा ,और प्रयासों को समझे । डा अशरदने कहा कि खुशी हे कि विद्यार्थियों इसके महत्व को समझा फलस्वरूप यह सार्थकता के साथ संपन्न हुआ।
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| (श्री अनिल शर्मा,इंस्टीटयूट के निदेशक दिवाकर खरे,एवं डा विनीता खरे एवं स्वतंत्रता सेनानी श्री चिम्मन लाल जैन) फोटो:सभार दैनिक हिन्दुस्तान) |
राजीव सक्सेना ने कहा कि सरकार को अपने रवैय में बदलाव लाना चाहिये।कॅपेन को कार्डीनेट कर रहे कार्पोरेट सैक्टर के कार्डीनेटरश्रीअनिल शर्मा ने कहा कि अब आंदालन को अंजाम देने व्यापक सपोर्ट की जरूरत है,जिसमें स्टूडेंट सपोर्ट बहुतजरूरी है। इंस्टीट्यूट के डायैरेक्टर पडा दिवाकर खरे ने कहा कि नशेबाजी समाज की एक पीडा है,जिसका समाधान होना चाहिये।उन्हों ने कहा कि भारत में न तो संस्कृति ही इसकी इजाजत देती है और नहीं जलवायु ही नशासेवन के अनुकूल है। उन्होंने आयोजन को आडीटोरियम में होने वाले यादगार कार्यक्रमों में से एक बताया ।ललित कला संस्थान की डायरैक्टर एवं इंस्टीटयूट के स्टैटिक्स डिपार्टमेंट में प्राफेसर डा विनीता सिह ने कहा कि नशेबाजी के कारण देश की सामाजिक स्थितियों और आर्थिक संसाधनों प कितना प्रतिकूल असर पडा रहा है इसकी गंभीरता को समझना चाहिये। प्रो दीपमाला श्रीवास्तव ने कहा कि नशेबाजीकी लत से समाज को लगातार क्षित पहुच रही है, इससे देश की सबसे महत्वपूर्ण ‘मानव संसाधन’सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं।डा रनवीर सिह, मोहम्मद हुसैन ,राजीव वर्मा, डा राजेश कुशवाह, डा हरिओम,डा अंशू भट्ट आदि सीनियर फैकेल्टी मेम्बर की भी संवाद में सहभागिता रही। कार्यक्रम के सांयोजक डा मोहम्मद अशरद ने श्री चिम्मन लाल जी के आंदालन और स्वतंत्रताआंदालन में रही उनकीपृष्ट भूमि की विद्यार्थियों को जानकारी दी। 96 साल की उम्र हो जाने के बावजूद जिस अंदाज में वह लगे हुए है,वह समाज में सभी के लिये प्रेरणाप्रद है। इसी लिये वह चाहते थे कि इंसटीट्यूट के विद्यार्थी भी भावी समाज शास्त्री और मानव संसाधन प्रबंधन में अपनी भूमिकाओं के परिप्रेक्ष्यमें उनकीविचारधारा ,और प्रयासों को समझे । डा अशरदने कहा कि खुशी हे कि विद्यार्थियों इसके महत्व को समझा फलस्वरूप यह सार्थकता के साथ संपन्न हुआ।

