27 जनवरी 2016

हुजूर गौस –उल-आजम का गिलाफ शरीफ मरकजी साबरी में पेश

--सज्‍जादानशीं दरगाह हजरत  तारा शाह चिश्‍ती साबरी का बगदाद की यात्रा से लौटने पर हुआ भव्‍य स्‍वागत

आगरा: दरगाह हजरत ख्‍वाजा शेख सैय्यद फतिहउद्दीन बल्‍खी अलमारूफ तारा शाह चिश्‍ती साबरी के

बगदाद से मुबारक यात्रा करके लौटे रमजानअलीशाह चिश्‍ती साबरी
का बगदाद से धार्मिक यात्रा कर लौटने पर हुआ भव्‍य स्‍वागत
                              फोटो:असलम सलीमी
सज्‍जादा नशीं आले पंजतानी कुतुब –ए-मुहब्‍बत पीर अलहाज रमजान अली शाह चिश्‍ती साबरी ने बारगाहे हुजूर गौसुल आजम शेख अब्‍दुल कादिर जिलानी की बारगाह से मिला हुआ गिलाफ भव्‍य जुलूस के साथ लाकर दरबारे मरकज साबरी में पेश किया ।बुद्धवार को इस मौके पर फातिहा ख्‍वानी की रस्‍म भी हुई।

मरकज साबरी के
सज्‍जादानशीं पीर अलहाज रमजान अली शाह चिश्‍ती साबरी ने अपने सफर –ए-बगदाद शरीफ का जिक्र करते हुए कहा कि गोसुल आजम की बारगाह औलिया –ए – कामलीन में सबसे ज्‍यादा अब्‍बल है।गौस दुनियां में एक ही होता है तो सारी दुनियां पर फैजाने करम गौसुल आजम का ही है।उन्‍हों ने कहा कि गौसुल ए आजम की सबसे मुख्‍य तालीम सत्‍य के रास्‍ते पर चलना और सच बोलने का उपदेश मुख्‍य है।आपका एक वाक्‍या बहुत मशहूर है कि हुजूर गौसुल आजम बचपन में सफर पर रवाना हुए तो मां ने तालीम दी कि बेटा झूंठ कभी नहीं बोलना।इस सफर के बीच जब डाकूओं ने काफिले को लूट लिया तो अन्‍यों के समान ही इस नन्‍हें मुसाफिर से भी डाकुओं ने पूछा कि बता तेरे पास क्‍या है। तो उसने कहा कि चालीस दीनार इस डाकुओं ने उनकी तलाशी ली जब कपडों तलाशी लिये जाने के बावजूद भी उन्‍हें नहीं मिली तो डाकू नाराज हो गये और उनमें से एक ने कहा कि तू झूंटबोलता है तो इस पर हुजीर ने कहा कि वह झूंठ नही बोलते मां ने ये दीनारे सदरी में सी दी हैं।जब सदरी की सीवन को उधेड कर देखा गया तो उनका कहा सही निकला।डाकू उनके द्वारा सही बोलने की हिम्‍मत और मां की सीख का पालन करने के जज्‍बेसे बेहद प्रभावित हुए। एन्‍हों ने काफिले के यात्रियों से लूटा गया सारा सामान वापस कर दिया यही नहीं खुद भी उनके मुरीद बन गये।गौस-उल-आजम ने अपने अपने मुरीदो को हमेशा समझाया  कि जिंदगी में किसी का दिल मत दुखाओ, चोरी मत करो ,चुगली मत करो, ये बहुत ही बडे गुनहाहैं।जो बन्‍दे सच के रास्‍ते पर चलते हैं तो अलह की हर मदद शामिले हाल होगी।आगरा के लिये यह पहला मौका है जबकि बार चादरशरीफ हुजूर गौसुल आजम हजरत शेख अब्‍दुल् कादिर जिलानी की बारगाह में उर्स मुबारक के मौके पर की गयी।पूर्वमें दरगाह तक तक जुलूस का जगह जगह  सभी बर्गों और सांप्र्रदाययों के लागों के द्वारा फूलों और मालाओं से स्‍वागत किया गया। आखिर में जुलूस में शामिल सभी लोगों का मरकज साबरी के महा सचिव विजय कुमार जैन ने शुक्रिया अदा किया।

इस मौके पर पीरजादा बुन्‍दू खां चिश्‍ती साबरी, विजय कुमार जैन, हाजी इमरान अली, डा कृष्‍णवीर कौशल, रईसुद्उीन कुरैशी, पप्‍पू राघव, गौरव जैन मो अनीस खान, खालिद कुरैशी,विनोद श्रोत्रिय, आदिल,अनुज शिवहरे, अब्‍दुल शहीद, रमजान खां, उमेश चन्‍देल, तरुण अरोरा, अभिनन्‍दन जैन, प्रांशू जैन, राकेश जैन ,कुंवर सिह, विशाल सिह,शोभित सिहं, मौ अनीसमौ शरीफ, मुदित कुलश्रेष्‍ठ ,छोटू, नन्‍द किशोर पाण्‍डे, नरेश बंसल, इरुान, वशीर भाई ,कमलेशजैन ,गुरु प्‍यारी, सितारा जहां, सबानाजहां,सुमन आदि की मौजूदगी उल्‍लेखनीय थी।