21 जनवरी 2016

ग्यारहवीं शरीफ का दो दिवसीय आयोजन

-- सूफी संतो सहित आम जनता ने भी किये अलम शरीफ के दीदार

-- महफिल ए सामां में मशहूर कब्‍बालों ने की शिरकत

आगरा: ग्‍यारहवीं शरीफ का दो दिवसीय आयोजन सेव का बाजार मावा कटरा स्‍थित आस्‍ताना
(सेव का बाजार में मावा कटरा स्‍थित आस्‍ताना आलिया कादरिया परयारहवीं
 शरीफके दिवसीय आयोजन के दौरान,सज्‍जादा नशीं हजरत सिनवान अहमद शाह
  वं मुरीदो ने'अलम शरीफ' के प्रति की श्रद्धा अभिव्‍यक्‍ति फोटो:असलम सलीमी ) 
आलिया कादरिया गुरुवार 21 जनवरी से इबादत और उत्‍साह के साथ शुरू हुआ। इसमें बाद नमाज अस्र,अलम शरीफ की जियारत,बाद नमाज मगरीफ, लंगर व बाद नमाज ईशां महफिल –ए-समां का आयोजन हुआ।22 जनवरी को बाद नमाज अस्र,महफिल ए समां , बाद नमाज मगरीब,लंगर व बाद नमाज
ईशां रात्रि 10 बजे से महफिल ए सामां आदि कार्यक्रम संपन्‍न होंगे। आस्‍ताना आलिया कादरिया पर तकरीबन 200 सालों से चांद की दस वग्‍यारह तारीख को अलम शरीफ सूफी संतो व आम जनता के दर्शनाथ रखे जाने की परंपरा है। इसके दर्शन के लिये देश विदेश से अकीदतमंद आते हैं।आसताना आलिया कादरिया के मौजूदा सज्‍जादा नशीन हजरत सैय्यद सिनवान अहमद शाह कादरी इस इस परंपराको बडी लगन के साथ निभा रहे हैं।इस मौके पर महफिल –ए –समां का भी आयोजन किया जाताहै।जिसमें देश की प्रमुख शख्‍सियतों के मशहूर कब्‍बाल आकर अपना कलाम पेश करते हैं।
इस बार अजमेर शरीफ से सुल्‍तान मियां, फतेहपुर सीकरी के सज्‍जदा नशीं रईस मियां चिश्‍ती, ग्‍वालियर के शौकत मियां, फीरोजाबाद से गुलाम रामदानी साहब, पानीपत से सै एजाज अहमद, बीकानेर से हाफिज फरमान अली, सै अजमल अली शाह, सै हैदर अली शाह, सै असद अली ,सै मैराज उद्दीन, सै मरगूब उज्र ज्मा, सै इरुान अली सलीम, मुवीन मियां,सै.अशरफ अहमद , ,सै आजम अहमद, सै मसूद उज्र ज्रमा सै शिराज अहमद शाह, अदीव अहमद, शाह, सै नदीम अहमद,  हाशमी, समी आगई आदि आयोजन में भाग लेने आने वालों में शामिल हैं।

उल्‍लेखीय है कि पीरान –ए-पीर हजरत मुहीउद्दीन अब्‍दुल कादिर गिलानी बडे पीर साहब रह हुजूर सल्‍लाहो अलेह वसल्‍लम की 11 वीं उस्‍सानी को फातिहा बडे जश्‍न व शानोशैकत के साथ मनाते थे, जो समय के साथ ग्‍यारहवीं शरीफ के नाम से मशहूर हुई।इस ग्‍यारवीं शरीफ को पूरी दुनियां खास कर भारत बडी अकीदत व एहतराम से मनाते हैं। सन.1779ई- 1203
हिजरी मे मीस पाक के परपोते हजरत अब्‍दुल शाह बगदादी रह. अपने पूर्वज के आदेश पर आगरा पधारे।आपने अपने दादा हुजूर के आदेश पर हजरत गौस पाक का अलम शरीफ बगदाद से लाकर उस समय के जानेमाने सूफी संत हजरत मौलवी मौलवी अमजद अली शाह रहमतुल्‍ला अलेहे को भेंट किया और आपको सिल सिलाहे कादरिया में मुरीद कर खिलाफत से नवाजा और आदेश दिया कि हर महीने की ग्‍यारह तारीख को फतीहा करवायी जाये व गरीबों के लंगर बांटा जाये।यह परंपरा  शुरू हो जाने के बाद अब तक जारी है।
सालाना फतेहा पर चांद की 10 व 11 रवी उस्‍मानी को अलम शरीफ आम लोगों के दर्शनार्थ रखा जाता है।इस परंपराको निर्वाहनकरने के लिये ताजगंज में आस्‍ताना आलिया कादरिया का निर्माण करया गया ।बाद में यही  आस्‍ताना 1225 हिजरी में मावा कटरा सेव का बाजार , आगरा बनाया गया जो अब तक मौजूद है। इस वर्ष यह पर्व 21 व 22 जनवरी (सन् 2016) को मनाया जाना तय हुआ था।