9.70 लाख राशनकार्ड कार्ड धारकों को संतुष्ट नहीं कर सका है मौजूदा वितरण तंत्र
कार्ड विक्रेताओं
के माध्यम से गेंहूं, चावल , मिट्टी का
तेल वितरण करवाने में नकाम रही है। यही नहीं प्रदेश के ज्यादातर जनपदों में अब तक
आर्थिक सर्वेक्षण का काम पूरा नहीं हुआ है, फलस्वरूप गरीबी की रेखा के नीचे के परिवारों
की संख्या आगरा जनपद में महज 15 हजार तक सीमित हो कर रह गयी है।
अब राशन कार्ड अन्य प्रचलित स्मार्ड
कार्डों की तरह ही स्मार्ट राशन कार्ड में तब्दील किये जायेंगे। मनमोहन सिह के नेतृत्च
वाली कांग्रेस सरकार के...
कार्यकाल की यह योजना कई साल पूर्व ही यू पी में भी प्रभावी
हो जानी चाहिये थी किन्तु यह ज तक संभव था तब तक टलती रही और राशन विक्रता इसका जमकर
इसका फायदा उठाते रहे जबकि अब 1 जनवरी 2016 से देश के अन्य राज्यों के समान ही उप्र
में भी खाद्य सुरक्षा कानून प्रभावी हो जाने से हालात एक दम बदल गये है। आने वाले वक्त
में राशन कार्ड की चस्तुओं पर मिलने वाली सब्सिडी सीधे उपभोक्ता को दिये जाने की
योजना प्रभावी हो गयी है किन्तु राज्य में जब राशन कार्डों का वितरण ही सही प्रकार
से नहीं हुआ है तो फिर कानून कैसे प्रभावी ढंग से लागू हो सकता है।
आगरा मंडल की स्थिति भी राशन वितरण कार्य
में अनियमित्ता वाले मंडल में शामिल है। प्रख्यात सैलेब्रिटी श्रीमती हेमा मालिनी
और केन्द्रीय मंत्री राम शंक कठैरिया सहित पांच सांसदों के द्वारा प्रतिनिधित्व करने
वाले इस मंडल के सभी चारों जनपदों में राशन वितरण व्यवस्था लगभग चरमराई हुई है। मंडल
के मुख्यालय वाले आगरा जनपद का हाल तो और भी खराब है। नागरिक अपूर्ति विभाग पूरी तरह
से निष्प्रभावी हो जाने की सी स्थिति में है।
वस्तु स्थिति का अंदाजा इसी तथ्य से
लगाया जा सकता है पिछले दस साल से गरीबी की रेखा के नीचे के राशनकाडों की संख्या
15 हजार ही बनी हुई है।जबकि जमीनी हकीकत में यह संख्या दस साल के अंतराल कहीं अधिक
हो चुकी है।
वर्तमान में 805200 सामान्य श्रेणी या
गरीबी की रेखा से ऊपर वाले (ए पी एल ) 9070 अंत्येदय कार्ड धारक और 15670 गरीबी की रेखा के नीचे यानि बी पी एल कार्डधारक
हैं। जिन्हे राशन वितरण करने का माध्यम हैं शहरीक्षेत्र की 450 व ग्रामीण क्षेत्रों
में 1250 दूकानों के मायम से राशन वितरण का कार्य होता है। किन्तु लगभग 1700 दूकानों
में से शायद ही किसी भी दूकान के क्षेत्र के राशन कार्डधारी राशन वितरण की व्यवस्था
से संतुष्ट हों।
इस गडबडी का एक कारण राशन विक्रेताओं
को सरकारी निगरानी तंत्र का पूरा संरक्षण् मिला रहना है।दूकानों को राशन अवंटन से लेकर
उसके वितरण तक का तंत्र जनपद में पूरी तरह से उपभोक्ताओं के हितों को अनदेखा किये
हुए है।