--गांधी जी 1929 में पहुंचे थे दालबाग
--देश के अकेले शहरी निकाय जहां अब तक शराब बिक्री को ठेके नही खुल सके हैं
आगरा:पाकिस्तान में भी उसके अपने गांधी
थे और सभी समुदाय महात्मा गांधी के समान ही उनका
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| (स्वतंत्रता सेनानी आर ई आई इंटर कॉलेज के विद्यार्थियों के साथ नशा विरोधी आंदोलन पर संवाद करते हुए) |
आदर करते थे।यह जानकारी वायोबृद्ध
स्वतंत्रता सेनानी श्री चिम्मन लाल जैन ने अपने ‘मूवमेंट अगेंस्ट एडिक्शन’ अभियान के तहत दयालबाग शिक्षण संस्थानों
के आर ई आई इंटर कॉलेज के विद्यार्थियोंसे सीधे ‘संवाद’ कार्यक्रम में गुरुवार को चर्चा के दौरान दी। उन्होंने बताया कि बच्चा खान
और बादशाह खान के नाम से विख्यात खान साहब
खुदाई खिदमतगार संगठन के माध्यम से समाज की सेवा करते रहे।दुर्भाग्य है कि शांति
और अमन पसंद इस महान शख्सियत के नाम पर पेशावर में बने शिक्षण परिसर को भी आतंकवादियों
ने अपने खूनी खेल से नहीं बख्शा।
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| (श्री चिम्मन लाल जैन ने पाकिस्तान के गांधी खान अब्दुल गफ्फार खांकी दास्तान भी बतायी छात्रों को) |
आयोजित सेमीनार में आने का आग्रह किया।
छात्रों से मुलाकात
करने के बाद श्री चिम्मन लाल जैन दयालबाग मंदिर
भी गये।
भी गये।
मूवमेंट के कॉर्डीनेटर
ने श्री अनिल शर्मा ने बताया कि गांधीजी 1929 में अपने 11दिवसीय आगरा प्रवास के दौरान
दयालबाग आये थे तब दयालबाग भी गये थे और उस समय वहां चलने वाली स्थानीय उत्पादन गतविधियों
से उनके स्वदेशी आंदोलन को काफी प्रेरणा मिली थी।हालांकि यह तथ्य ज्यादा प्रचारित
नहीं हो पाया किन्तु पुराने गांधीवादी जो कि बर्धा आश्रम आते जाते रहे थे और जमुना
लाल बजाज को जानते थे इस तथ्य से भलीभंति वाफिक हैं।
श्री चिम्मन लाल जैन
इस तथ्य से और अभिभूत हुए कि दयालबाग और स्वामीबाग देश के अकेले ऐसे नगरीय निकाय
हैं जिनमें अब तक शराब की दूकानें नहीं खुली हैं राज्य में सरकार के द्वारा शराब बिक्री
पर रोक लगाये जाने पर ही अन्य स्थानों पर संभव हो सका है जबकि संयोग से उ प्र में
कभी भी शराब बिक्री पर पाबंदी नही लग सकी ।यही नहीं आजादी के बाद भी जितनी सरकारेंराज्य
में आयी सभी ने शराब बिक्री को राजस्व से जोड कर प्रशासन पर बिक्री लक्ष्य बढाने
को ही दबाव बनाये।

