--मुख्यमंत्री ने लखनऊ में शिक्षा मित्रों से की वार्ता दिया आश्वासन
आगरा, प्रदेश की राजधानी से शिक्षा मित्रों का आंदालन
समाप्त हो जाने की जानकारी मिलने के साथ ही आगरा में भी इस मुद्दे पर सक्रिय
प्रभावित अब आंदोलन नहीं करेंगे। प्राप्त जानकारी के
अनुसार मुख्यमंत्री अखिलेश
यादव ने कहा है कि है कि दो वर्षीय बीटीसी के बाद समायोजित किए गए शिक्षा मित्र
सहायक अध्यापक के पद पर बने रहेंगे। उन्हें पहले की तरह वेतन और अन्य सुविधाएं
मिलती रहेंगी। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि वे हाईकोर्ट के आदेश का सम्मान करते
हैं।विधिक राय लेने के बाद सुप्रीम कोर्ट में मजबूती
से अपना पक्ष रखेंगे।
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| (छोडो कल की बातें,फिलहाल लडवाओ चुनाव) |
से अपना पक्ष रखेंगे।
मुख्यमंत्री ने सोमवार को अपने आवास पर शिक्षामित्रों के
प्रतिनिधि मंडल से मुलाकात की थी ,इस मुलाकात के बाद शिक्षा मित्रों ने अपने आंदोलन
को समाप्त करदिये जाने की घोषणा कर दी।
संयुक्त शिक्षा मित्र संघ के पदाधिकारियों ने कहा है कि राज्य सरकार उनके साथ है इसलिए आंदोलन समाप्त किया जा रहा है, लेकिन एनसीटीई के खिलाफ सांकेतिक विरोध जारी रहेगा।
मुख्यमंत्री ने शिक्षा मित्रों से कहा कि जब उत्तराखंड और महाराष्ट्र में शिक्षामित्रों को बिना टीईटी के शिक्षक बनाया जा सकता है, तो यूपी में क्यों नहीं? जब राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) ने वहां कोई आपत्ति नहीं उठाई, तो फिर यूपी के लिए क्यों। वह दोहरी नीति क्यों अपना रहा है।
श्री यादव ने कहा कि इस मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी से बातचीत की जा रही है। पीएम से अनुरोध किया जाएगा कि वे एनसीटीई को यूपी के शिक्षामित्रों के साथ भेदभाव न करने का निर्देश दें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षामित्रों का समायोजन नियम और
कानून के दायरे में किया गया है। शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत राज्य सरकार को
यह अधिकार है कि वह नियमावली में संशोधन कर सकती है। उन्होंने
शिक्षा विभाग के अफसरों को निर्देश दिया कि वे सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष पूरी
तैयारी के साथ रखें ताकि फैसला शिक्षामित्रों के पक्ष में आ सके।
