--यू पी सरकार ही नहीं गुजरात से आया विशेष्ज्ञ भी कर चुके हैं पलायन
आगरा,
राष्ट्रीय चम्बल सेंचुरी प्राजेक्ट के तहत संचालित इटावा लायन सफारी के काम को
प्राईवेट
संस्था को सोपा जा सकता है, एन जी ओ की तर्ज पर काम करने वाले दो संस्थान
इसके लिये अल्यंत बेताव है।पी पी पी पैटर्न के प्रचलित मॉड्यूल पर वे सफारी का
काम हाथ में लेना चाहते हैं किन्तु इसके एवज में सरकार को कुछ देने के एवज में
उसका खर्च कम करने कीबात तक ही अपने को सीमित मानते हैं।
प्राईवेट
संस्थाओं के द्वारा लम्बे समय से ही इस प्रोजेक्ट को अपने माफिक माना जा रहा
है किन्तु अधिक अनुकूल स्थितियां तब उत्पन्न हुयीं जबकि शेरों के जन्म
बच्चे मरगये।कार्यरत कर्मचारियों और अधिकारियों द्वारा इसके बाद से शुरू हुई
पूछताछ और अपनी नौकरी के भविश्य पर
लगनाशुरू हुए सवालिया निशानों के बाद ज्यादातर बन विभाग के कर्मचारी यहां से कही भी चले जाना बैहतर मान रहे हैं।
लगनाशुरू हुए सवालिया निशानों के बाद ज्यादातर बन विभाग के कर्मचारी यहां से कही भी चले जाना बैहतर मान रहे हैं।
घोषित
तौर पर कर्मचारियों और अधिकारियों का भागना चौकीदार ऋषि यादव के साथ हुई मारपीट से जोडी जा रही हे जबकि वस्तुस्थति यह है कि
लायन सफारी मुख्यमंत्री का ड्रीम प्रोजेक्ट होने से यहां कार्यरत भारी दबाव से
परेशान हैं। शावकों के मारे जाने की घटना के बाद से तो उन्हें प्रशासनिक सख्ती
ही नहीं अपने विभाग का बेंरूखा पन भी बेहद अखर रहा है।
सफारी के निदेशक केके ¨सिह से पूर्व यहां कार्यरत रहे लखनऊ चिड़ियाघर के डा. उत्कर्ष
शुक्ला, डा. विकास जा चुके हैं। गुजरात से
आये डा. आरएस कड़ीवार व गुजरात के विशेषज्ञ जू कीपर सलीम ने भी लायन सफारी को खामोशी
के साथ छोड़ गुजरात के लिए रवाना हो गये।वहीं प्रदेश के वन विभाग के सफारी में
कार्यरत एसडीओ तेज बहादुर ¨सह का फतेहपुर व रेंजर एके
पांडेय का तबादला विभाग ने ही सिद्धार्थ नगर कर दिया है।
शायद अब तक निजी संस्थाये आ
भी चुकी होतां किन्तु वालल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट आफ इंडिया और सेंट्रल जू अथार्टी
से अनुमति के वगैर कोई निर्णय सहजता के साथ नहीं लिया जा सकता है।यह बात अलग हे
कि इच्छुक संस्थाये अनुमतियों आदि की जहमत भी खुद ही करवाये लाने की जिम्मेदारी
लेने को तैयार हैं।किन्तु कई अधिकारी इस पचडे में खुद को डलने से बचनाप चाहते
हैं।
