-- न्यायमूर्ति श्रीनारायण शुक्ला और न्यायमूर्ति राजन राय की बैंच ने 27 अप्रैल तक तलब किया जबाव
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| (फसल क्षति :अब तक केवल निरीक्षण और केवल नेता गीरी ) |
आगरा,अब तक केवल राजनीतिज्ञों के
भरोसे और सरकार की दया पर किसानों को उनकी फसल क्षति का उपयुक्त मुआबाजा दिलवाये
जाने को चल रही मुहिमों के अलावा इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ ने भी किसानों
को उचित राहत के मामले में सरकार से जबाव तलब कर दखल दिया है। कोर्ट ने मुआवजा देने के मामले में केन्द्र
और राज्य दोनों सरकारों से अलग अलग जवाब मांगे है।
न्यायमूर्ति श्रीनारायण शुक्ला और
न्यायमूर्ति राजन राय की पीठ ने इस संबंध में प्रस्तुत तीन अलग अलग जनहित याचिकाओं
को विचारार्थ स्वीकार कर लिया है। इन तीनों में ही असमय बारिश और ओलावृष्टि के कारण फसल बर्बादी का
सामना कर रहे राज्य के किसानों की स्थिति
का उल्लेख कर सरकार से फसल क्षति के अनुरुप मुआबजा राशि दिलवाये जाने को निर्देश दिये जाने की अपेक्षा की गयी है।
का उल्लेख कर सरकार से फसल क्षति के अनुरुप मुआबजा राशि दिलवाये जाने को निर्देश दिये जाने की अपेक्षा की गयी है।
याचिकाकर्ताओं का आरोप कि केन्द्र
और राज्य सरकारें किसानों को उनके नुकसान के अनुरूप पर्याप्त मुआवजा नहीं दे रही
हैं.ऐसे में किसानों के सामने रोजी रोटी का संकट खडा हो गया है.
राज्य सरकार की ओर से पेश अपर
महाधिवक्ता बुलबुल गोदियाल ने कहा कि किसानों को राहत और मुआवजा दिया जा रहा है.
उन्होंने और केन्द्र के वकील ने जवाब दाखिल करने के लिए अदालत से समय मांगा. इस पर
अदालत ने सुनवाई की अगली तारीख 27 अप्रैल तय की।
याचिकाओं के स्वीकार करने की
जानकारी सार्वजनिक होते ही जहां सरकार जबाव देने की तैयारी में जुट गयी है,वहीं
राजनीतिज्ञ इस बात का अंकलन कर रहे हैं कि कोर्ट के ताजा रुख से उनकी राजनीति
कि
