1 अप्रैल 2015

मौसम पीडि‍त कि‍सान ने मांगी अपनी लाटरी की पांच लाख की राशि‍

--सि‍क्‍कि‍म और कर्नाटक की टि‍कटों परनि‍कले थे ईनाम

--2004 से लाटरी माफि‍या के खि‍लाफ राजीव कांत ने शुरू कर रखी है जंग

                             --फायल फोटो
इनाम आगरा,राज्‍य सरकारों के द्वारा संचालि‍त की जाती रही लाटरि‍यां अब बन्‍द हुए लगभगएक दशक से अधि‍क  हो गया है कि‍न्‍तु इनके कारण प्रभावि‍त हुए लोगों में काफी ऐसे हैं जो इनके नकारात्‍मक असर से अब तक प्रभावि‍त हैं।इन्‍हीं में मधुनगर राजीव कांत सि‍ह भी हैं।पेशागत तौर पर स्‍वतंत्र पत्रकार राजीवकांत मूल रूप से एक कि‍सान परि‍वार के हैं।इस बार बेमौसम और ओला वृष्‍टि‍ की मार से जब जब उनकी आलू की फसल खराब हो गयी तो तहसील से फसल मुआबजे की लाडाई क्षेत्र के अन्‍य कि‍सानों के साथ करने के साथ ही उन लाटरी टि‍कटों को लेकर पुरानी लडाई पुन: प्रारंभ कर दी जि‍सकों लेकर वह पूर्व में भी पीएम कार्यालय तक चि‍ट्ठी पत्री करते रहे हैं।उनका मानना है कि‍ उनकी तरह के कई हजार मामले अब भी लम्‍बि‍त चल रहे हैं कि‍न्‍तु न्‍याय नहीं मि‍ल सका है।
                                                           --फायल फोओ
    सन्2004 में उन्‍होंने सि‍क्‍कि‍म सरकार की लाटरी फास्‍ट लोटो का 10 रुपय का टि‍कट संख्‍या जि‍समें 5,12,13,23,और 29नम्‍बर उनके चयनि‍त नम्‍बरों में शामि‍ल थे 25फरवरी को शि‍रडी (महाराष्‍ट्र) से खरीदा था।जब वह लाअरी ड्रा की जानकारी लेने उसी दि‍न रात्रि‍ को 10 बजे दूकानदार के पास पुंचे तो उसने बताया कि‍ उनके चार नम्‍बर मि‍ल गये
हैं ,इस लि‍ये उन्‍हें 545 रुपये मि‍ल जायेंगे यह बताकर उसने उनसे टि‍कट लेने के नाम पर लगभग छीनने का प्रयास करते हुए 545रुपये का भुगतान कर  पे स्‍लि‍प तो दे दी कि‍न्‍तु  उसके उग्र हवाभावों से उन्‍हे लगा कि‍  वह गलत बोल रहा है और बतायी गयी राशि‍ से कही बडा इनाम उनके टि‍कट पर नि‍कला है जि‍से कि‍ दूकादार खुद हडपना चाहता है।
बाद में जब सि‍क्‍कि‍म लाट्री की वेव साइड को चैक कि‍या तो वह आश्‍चर्य में पड गये और उन्‍हे लगा कि‍ खुद को ठगे जाने की आशंका ठीक ही है।इसमें राज्‍य के द्वारा संचालि‍त लाट्रि‍यों में से सुपर लोटो,थंडर वाल, लकी थ्री आदि‍ के वि‍वरण और पि‍छले दो साल के वि‍वरण तो हैं कि‍न्‍तु फास्‍ट लोटो का परि‍णाम उसमें आकि‍त नहीं था।
मधु जी ने इसी दूकान से 26फरवरी 2004 को ‘लकी थ्री’ लाट्री का भी 10 रुपये का एक टि‍कट खरीदा जि‍स पर ‘लकी पि‍क’ में नमबर नि‍कलने पर 4लाख रुपये के इनाम की व्‍यवस्‍था थी।जब 27फरवरी को टकट दि‍खाया तो नमबर चैक करके बोला कि‍ मेरा लकी पि‍क (998 एस टी आर) लग गया है।फलस्‍वरूप 4500 रूपये मि‍लेंगे,आप टि‍कट देकर रकम लेलें।इस पर जब कहा कि‍ आप तो कह रहे थे कि‍ लकी पि‍क में सलैक्‍ट नम्‍बर को 4लाख मि‍लेंगेइस पर वह कन्‍फ्यूजन फैलाने वाली बाते गढने लगा।कपनी की बेबसाइड भी टि‍कट नमबर को वि‍निंग नम्‍बर के रूप में दर्शारही थी ।लेकि‍न बाद में शि‍रडी के डीलर ही नहीं टि‍कट डि‍स्‍ट्रीब्‍यूटर तक ने बार बार फोन करने के बावजदू जबाव देना गवारा नहीं कि‍या।
राजीव जी ने 25फरवरी 20व4 को ही 10 रूपये कीमत का सुपर लोओ का ड्रा संख्‍या (00101)भी ख्‍रीदा था।उन्‍हे अनुमान है कि‍ इस टि‍कट पर जैकपाट लगा था। कि‍न्‍तु इसका परि‍णाम पूछने पर दूकानदार ने बताया कि‍ कोई इनाम नहीं लगा है।यही नहीं जि‍स लास्‍ट डि‍जि‍ट 6 को लेकर मेरी आशा थी उसके स्‍थान जो स्‍लि‍प वि‍नर की दी उसमें लास्‍ट डि‍जट 7 का था। उस समय वह कुछ समझ नहीं पाये और अपना टि‍कट लेकर चले आये कि‍न्‍तु बाद में जब होटल में आकर गहन अध्‍ययन कि‍या तो मालूम हुआ कि‍ दूकानदार ने जो स्‍लि‍प वि‍र नम्‍बर की दी थी वह स्‍लि‍प पर सुपर लोटो के स्‍थान पर केवल केवल लोटो ही लि‍खा हुआ था।
 मधु जी का मानना है कि‍ यह मामला भले ही एक दशक से पराना पड गया हो कि‍न्‍तु उनके द्वारा तो अपने स्‍तर से लगातार लि‍खापढी ही की जाती रही है।भले ही प्रस्‍तुत साक्ष्‍यों को नजरअंदाज कर गलत ही साबि‍त कर दि‍या जाता तो रि‍स्‍पांस तो अपेक्षि‍त था ही।खास कर जब कि‍ पत्राचार का अंति‍म चरण प्रधानमंत्री जैसे देश के महत्‍वपूर्ण कार्यालय के संज्ञान में लाकर कि‍या जा रहा हो।
श्री राजीव कांत का कहना है कि‍ इस मय उनकी आलू की पूरी फसल चौपट हो चुकी है कि‍न्‍तु उनका गांव मुआवजे की वाले गांवों की श्रेणी में नहीं आ सका है,भाग्‍य में शायद यही घाटा लि‍खा था इस कि‍न्‍तु जो कुछ भाग्‍य में लि‍खा थउ कम से कम वही सरकार दि‍लवादे तो मुझे काफी राहत मि‍ल जायेगी और अगली फसल के लि‍ये फि‍र सक्रि‍य हो सकूंगा। वैसे भी मांग भले ही मै मानवीय आधार पर कर रहा हू कि‍न्‍तु लाटरि‍यों के माध्‍यम से मेरे नाम घोषि‍त  लगभग 5 लाख की राशि‍ मेरे कानूनी हक की है और कर्नाटक तथा सि‍क्‍कि‍म सरकारो को अदा करनी है।