मिराज 2000 श्रेणी के पहले दो प्रोन्नत विमान ग्वालियर पहुंचे। भारतीय वायुसेना के वायलटों द्वारा फ्रांस से भारत लाए यह विमान सात दिन के समय में ग्रीस, मिस्र और कतर से होते हुए यहां पहुंचे।
वायुसेना स्टेशन पहुंचने पर दोनों विमानों को पारम्परिक 'वाटर कैनन सैल्युट' दिया गया। विमान को लाने वाले दल के प्रमुख ग्रुप कैप्टन एम. मनोचा का स्वागत ग्वालियर वायुसेना स्टेशन के एयर ऑफिसर कमाडिंग एयर कमोडोर एच. एस. बसरा ने किया। श्री मनोचा ने विमान से संबंधित दस्तावेज एयर आफिसर कमाडिंग को सौंपे। दो सीट वाले विमान मिराज को विंग कमांडर विवेक शर्मा और स्क्वाडन लीडर के सूर्य नारायण उड़ाकर लाए।
मिराज के प्रोन्नतिकरण के दौरान जोड़े गए एडवांस एवियोनिक्स, हथियारों और स्व रक्षा उपकरणों से विमान की क्षमताओं में महत्वपूर्ण वृद्धि हुई है। इन विमानों के प्रोन्नतिकरण के लिए थेल्स एयरोपोर्ट्स सिस्टम्स और दसोल्ट एविएशन ऑफ फ्रांस के बीच समझौता हुआ था। इस कार्य को तय समय सीमा में सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया। मिराज 2000 के अगले विमानों का प्रोन्नतिकरण एचएएल, बंगलौर में ही किया जाएगा।
वायुसेना स्टेशन पहुंचने पर दोनों विमानों को पारम्परिक 'वाटर कैनन सैल्युट' दिया गया। विमान को लाने वाले दल के प्रमुख ग्रुप कैप्टन एम. मनोचा का स्वागत ग्वालियर वायुसेना स्टेशन के एयर ऑफिसर कमाडिंग एयर कमोडोर एच. एस. बसरा ने किया। श्री मनोचा ने विमान से संबंधित दस्तावेज एयर आफिसर कमाडिंग को सौंपे। दो सीट वाले विमान मिराज को विंग कमांडर विवेक शर्मा और स्क्वाडन लीडर के सूर्य नारायण उड़ाकर लाए।
मिराज के प्रोन्नतिकरण के दौरान जोड़े गए एडवांस एवियोनिक्स, हथियारों और स्व रक्षा उपकरणों से विमान की क्षमताओं में महत्वपूर्ण वृद्धि हुई है। इन विमानों के प्रोन्नतिकरण के लिए थेल्स एयरोपोर्ट्स सिस्टम्स और दसोल्ट एविएशन ऑफ फ्रांस के बीच समझौता हुआ था। इस कार्य को तय समय सीमा में सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया। मिराज 2000 के अगले विमानों का प्रोन्नतिकरण एचएएल, बंगलौर में ही किया जाएगा।
