29 मार्च 2015

नेशनल ग्रीन ट्रि‍ब्यूनल ने एक सप्ता‍ह में यू पी से रि‍पोर्ट की तलब

--यमुना नदी के फ्लड प्‍लेन का चि‍न्‍हांकन होगा

--आदेश का प्रभाव क्षेत्र राष्‍ट्रीय राजधानी क्षेत्र होने के बावजूद डउन स्‍ट्रीम के नदी भाग के लि‍ये भी उपयोगी

(बद से बदत्‍तर हालात में पहुंच चुकी है
 यमुना नदी:फायल फोटो)
 आगरा,यमुना नदी की सुफाई को जुलूस भी नि‍कल रहे हैं भारत सरकार को साधू सन्‍यासि‍यों के द्वारा ज्ञापन भी दि‍ये गये हैं कि‍न्‍तु इसके बावजूद भारत सरकार के द्वारा ही अब तक कोई वयवहारि‍क योजना ही अब तक बनायी जा सकी है और नहीं उ प्र ,हरि‍याणा व दि‍ल्‍ली प्रदेश सरकार ही अपनी ओर से सक्रि‍यात दर्शा सकी हैं।लेकि‍न अब यह नि‍ष्‍क्रि‍यता नही रह सकेगी अन्‍यथा राज्‍य सरकारों को इसके लि‍ये सफाई देनी हागी। नेशन ग्रीन ट्रि‍ब्‍यूनल के अध्‍यक्ष  न्‍याय मूर्ति‍ स्‍वतंत्र कुमार की अध्‍यक्षता वाली पीठ ने मार्च महा के अंति‍म सप्‍ताह में दि‍ये
गये एक आदेश जारी कर यमुना नदी के तटीय क्षेत्रों में रि‍वर फ्लड प्‍लेन के चि‍न्‍हांकन का काम तीनदि‍न के अंदर एन जीटी के समक्ष पेश करने को कहा गया है।यू पी के लि‍ये यह बात राहत करी हे कि‍ उसे तीन के स्‍थान पर सात दि‍न का समय दि‍या गया है।साथ ही उसके लि‍ये जानकारी दि‍ये जाने के लि‍ये अपस्‍ट्रीम में पल्‍ला फाल से बजीरावाद और डाउन स्‍ट्रीम में ओखला बेराज के डाउनस्‍ट्रीम में यू पी की सीमा में आने वाले(हरि‍याणा की सीमा में यमुना नदी के प्रवेश करने वाले स्‍थल) भाग तक को नि‍र्धारि‍त कि‍या है। ग्रीन ट्रि‍ब्‍यूनल ने राष्‍ट्रीय राजधानी क्षेत्र में आने वाले कामन एफ्यूलेंट ट्रीटमेंट प्‍लांट (सी ई टी पी) के लगे होने और कार्यरत स्‍थि‍ति‍यों की मौजूदा स्‍थि‍ति‍यों की जानकारी भी तलब की है।

कोर्ट ने दि‍लल्‍ी के आवादी वाले क्षेत्र में प्रदूषण कारी उद्योगों के लगे होने को गैरकानूनी बताये जाने के दि‍ल्‍ली सरकार के प्रदूषण बोर्ड के नि‍र्णय को जायज बताया है।बैंच का मानना है कि‍ प्रदूषि‍त उत्‍प्रवाह शहरी नालों में मि‍लने के बाद अगर नालों के पानी का ट्रीटमेंट प्‍लाटों में ट्रीटमेंट भी कि‍या जाये तो भी उनका शोधि‍त पानी दुबार उपयोग लायक नहीं हो सकता।