--योगेन्द्र और प्रशांत राष्ट्रीय कार्यकारिणी से निष्कासित
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| (प्रशांत भूषण और योगेन्द्र यादव:अपने हुए बेगाने) |
श्री यादव के अनुसार राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में लोकपाल को नहीं आने दिया गया। गोपाल राय आनन-फानन
में प्रस्ताव ले आए। हमने कहा कि इस पर चर्चा होनी चाहिए तो गोपाल राय ने कान बंद कर लिए और कहा कि लिखकर दीजिये। अभी हम कुछ करते कि मनीष सिसोदिया ने उस पर वोटिंग की शुरुआत करा दी और प्रस्ताव पारित करा लिया गया।''
वहीं, प्रशांत ने बैठक के दौरान गुंडागर्दी करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, ''राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में गुंडागर्दी हो रही थी। लोगों को पीटा जा रहा था। बाउंसर बुलाए गए थे। हमने लोकपाल की मांग की और उसे न आने देना दिखाता है कि अवैध वोटिंग कराई गई है।''
वैसे राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य बागी तेवर वाले अपनेसदस्यों के प्रति एक जुट से लगे। इसी कारण जैसे ही प्रशांत भूषण, योगेंद्र यादव सहित दो अन्य सदस्यों को निष्कासित करने के लिए पेश प्रस्ताव किया गयाा 247 सदस्यों ने खुले तौर पर समर्थन कर दिया।बैठक में 300से अधिक सदस्यों ने भाग लिया था,इनमें से 54 ने अपने को मतदान से अलग रखाा जबकि केवल दो ने ही प्रस्ताव के विरुद्ध अपनी असहमति जतायी।
रिकार्डिग के हाई टेक यूजर्स पर रखी गयी कडी नजर रखने के बावजूद मीटिग
के जीवट योद्धा नजर आ सकते हैं छोटे टी वी पर।जानकार सूत्रों के अनुसार पार्टी की
ओर से ही कुछ लोगों ने रिकार्डिंग करवायी हुइ्र है जो वक्त आने पर स्टिंग
आप्रेशन के रूप में किश्तों में जनता के सामन परोसी जाती रहेगी।।
