--परदेशियों को बाबा राम देव और अन्ना के विदेशी धन संबधी नजरियों पर संवाद अपेक्षित

आगरा:महात्मागंधी के प्रवास से भारत लौटने के सौ वें साल को समर्पित वाइब्रेंट गुजरात समिट के तहत इस बार का बे बडा आकर्षण प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी स्वयं हैं।2003 से इस आयोजन की शुरूआत हुई थी। पूर्व में उनकी भूमिका मुख्यमंत्री के रूप में ही रहती थी और मंच से प्रवासियों को केन्द्र से ही राहत दिलवाये जाने को आश्वासन दिलवाये जाने तक ही सीमित रहते थे।जबकि अब वह वयं बहुमत वाली केन्द्र सरकार के पी एम हैं। आयोजित की गई है. समिट 11 से 13 जनवरी तक होनी है, जबकि प्रवासी भारतीय दिवस सात जनवरी से शुरू हो चुका है और नौ जनवरी तक चलेगा...
सत्ता में आने के बाद से ही पीएम मोदी ने दुनियाभर के प्रमुख देशों का
दौरा किया था और हर जगह
उन्होंने भारत में निवेश को लेकर मौजूद अनुकूल माहौल और संभावनाओं का बखान किया
था.
अपने गृह
प्रदेश गुजरात में सफलतापूर्वक खुद को साबित करने के बाद मोदी ने अपने विकास के
गुजरात मॉडल को देश के लिए भी आजमाने की बात कही थी. इसी वजह से गुजरात में आयोजित
हो रहे इन कार्यक्रमों में रूचि के साथ शिरकत कर रहे हैं ताकि इस बहाने वो विदेशी
और अप्रवासी भारतीय लोगों को भारत में निवेश के लिए आकर्षित और आश्वस्त कर सकें।
प्रवासियों को
सबसे ज्यादा उन अश्वासनों को नीति के
रूप में क्रियान्वित होते देखने और अनुभव करनो को है जिनके बारे में श्री मोदी
अपने विदेशी दौरों में काफी कुछ कह आये हैं। प्रवासियों की बसे बडी दिलचस्पी बाबाराम
देव के सरकार पर प्रभाव के आंकलन को लेकर है।बाबा राम देव और अन्न हजारे के द्वारा
विदेशों में जमाकाले धन को देश में लाये जाने को जो माहौल देश िदेश में पिछले
दो साल से खडा किया जात रहा है1प्रवासी उसे लेकर सहज नहीं हैं। वे निवेश को तो
उत्सुक हैं किन्तु अपने निवेश की सुरक्षा के साथ ही बे वजह की जबावदेही और उन
उलझनों से बचना चाहते है जो कि विधिक और नौकरशाही के कारण बडे बडे उद्यमीयों तक के लिये
उलझनें साबित करती रही हैं।
बिजली
संकट,पर्यावरण कानून,भूमि अधिग्रहण और सरकार के द्वारा जमीन उपलब्ध करवाये जाने
की नीति व व्यवस्था को लेकर स्पष्ट स्थिति होना उनके लिये खा दिलचस्पी
के विषय हैं।
