9 जनवरी 2015

साठ साल बाद टाटा समूह ने फि‍र शुरू की एयरलाइंस

--फि‍लहाल दि‍ल्‍ली मुम्‍बई के बीच

--कभी आगरा भी रहा है टाटा की एयरलाइंस के नक्‍शें में

(टाटा की हवाई सेवा 'वि‍स्‍तार'अब)
(टाटा एयरलाइंस का वि‍मान और उसका क्रू, तब)
आगरा, देश के प्रमुख उध्यकमी टाटा समूह ने साठ साल के अंतराल के बाद एक बार पुन: नागरि‍क उड्डयन क्षेत्र में पदापर्ण कि‍या है। उनकी शुरूआत दि‍ल्लीट से मुम्ब ई के बीच शुक्रवार को नवगठि‍त कंपनी वि‍स्ता‍र’  पहली उडान के
साथ हुई। दिल्ली व मुंबई के बीच की यह फ्लाइट थी और पूरी कामाबी के साथ पूरी हुई। "विस्तारा" के चेयरमैन प्रसाद मेनन ने इस अवसर पर कहा, "ज्यादा तमाशा करने और फिर निराश होने के बजाय हमने इसे सादे ढंग से करने का फैसला किया। फुल सर्विस एयरलाइन होने का मतलब यह कतई नहीं है कि आप फालतू खर्च कर सबसे बड़े होने का दिखावा करें। इसका सीधा से अर्थ है-अलग किस्म के ग्राहकों की अलग ढंग से सेवा करना।"
वर्तमान में सार्वजनि‍क क्षेत्र की एयर इंडिया और निजी क्षेत्र की  जेट एयरवेज ही फुल सर्वि‍स एयरलाइंस ही थी इस प्रकार  "विस्तारा" देश की तीसरी फुल सर्विस एयरलाइन है। रतन टाटा ने कहा भी, "लंबे अरसे से टाटा समूह का देश में विश्वास्तरीय फुल सर्विस एयरलाइन शुरू करने का सपना था। वह सपना आज साकार हुआ है। मैं इस दिन को भूतपूर्व चेयरमैन तथा भारत के पहले लाइसेंसशुदा पायलट स्वर्गीय जेआरडी टाटा को समर्पित करता हूं।"
टाटा की भागीदारी बडी
नयी एरलाइंस टाटा-सियामें टाटा संस की 51 फीसद भागीदरी है, जबकि सिंगापुर एयरलाइंस की49 प्रति‍शत  । वैसे टाटा समूह की मलेशियाई बजट एयरलाइन एयर एशिया में भी 30 फीसद इक्विटी है। मगर वहां समूह का रोजमर्रा के कामकाज में कोई दखल नहीं है
--फि‍लहाल दो 148 सीटर
फिलहाल "विस्तारा" के पास लीज पर लिए गए दो ए-320-200 श्रोणी के विमान हैं। इन 148 सीटर विमानों में 16 सीटें बिजनेस क्लास, 36 प्रीमियम इकोनॉमी और 96 इकोनामी क्लास की हैं।उल्‍लेखनीय है कि‍ देश में  टाटा समूह द्वारा स्थापित टाटा एयरलाइंस को ही बाद में एयर इंडिया नाम दिया गया और 1950 के दशक में इसका राष्ट्रीकरण कर दिया गया। उसके छह दशक से अधिक समय बाद देश का यह प्रतिष्ठित उद्योग समूह भी इस क्षेत्र में आया है।
--आटा ने ही शुरू करवाया था आगरा का एयरपोर्ट
आगरा का हवाई अड्डा टाटा की ही देन है।पहले वि‍श्‍वयुद्ध के बाद ब्रटि‍श इंडि‍या में कम्‍यूनि‍केशन सि‍स्‍टम का विस्‍तार करने के साथ ही तेजी लाने का काम शुरू हुआ था। इसी के तहत टाटा ने हवाई डाक सेवा क्षेत्र में प्रवेश कि‍या।यह हवाई जहाज करांची,मुम्‍बई ,ग्‍वालि‍यर होकर आगरा तक आप्रेट कि‍या करता था।इस सेवाकाल में आगरा के हवाई यात्रि‍यों को डाक के थौलों के बीच बैठकर ही अपना हवाई सफर पूरा करना होता था।
हकीकत में आगरा का एयरपोर्ट इसी सेा के लि‍ये टाटा समूह ने ही बनाया था।एयरफोर्स स्‍टेशन के पथौली की ओर के गेट को अब तक एयरफोर्स स्‍टेशन के रि‍कार्ड में टाटा गेट के नाम से ही जाना जाता है। दूसरे वि‍श्‍वयुद्ध के शुरू होने के बाद जब जपान युद्ध में पूरी तरह से कूद गया तो मि‍त्र राष्‍ट्रों की हवाई सेना के लि‍ये टाटा की हवाई पट्टी का ब्रटि‍श सरकार के द्वारा 1941 में अधि‍ग्रहण कर लि‍या गया।आजादी के बाद भी टाटा एयरलाइंस की सेवा के नक्‍शें में आगरा राह ।बाद में इंडि‍यन एयर लाइंस ने भी इसे अपनी सेवा से जोडे रखा । वर्तमान में सुनि‍श्‍चि‍त एयर कनैक्‍टि‍वि‍टी की मांग लगातार की जाती रही है। टाटा समूह आगरा को हमेशा काफी महत्‍व देता रहा है ,संभावना है कि‍ जो काम एयर इंडि‍या, इंडि‍यन एयरलाइंस,सहि‍त अन्‍य कंपनीि‍यां ठीक प्रकार से नहीं कर सकीं वह नयी कपनी जरूर पूरा करेगी।