--नसबंदी के सख्त विरोधी थे 12 वें शाही ईमम
--तुर्कमान गेट पर चले तोडफोड अभियान से सख्त खफा थे ईमाम
आगरा,इमामों
की राजनीति में हमेशा दिलचस्पी रही है।मुगल बदशाहों के शासन काल में राजनीति
में सीमित दिलचस्पी थी किन्तु रजनैतिक हल्कों में उनका रुतबा कहीं बडा
था।दरबारियों और शाही परिवार के सदस्यों के अलावा शायद ईमाम साहब ही उस समय उन
इने गिने लोगों में होते थे जो बादशाह और उसके प्रमुख... औहदेदारों से आसानी से मिल सकते थे।ईस्टइंडिया कंपनी के शासन के समय मुगलों का रुतबा कम होता गा उसी के अनुरूप शाहीईमाम का भी सत्ता के गलियारों में महत्व कम हो गया ।इंग्लिश इंम्पीरियल सरकार के समय शाही ईमाम की भूमिका अत्यंत सीमित ही रही हां उस समय तक ईमामत कार्यालय जरूर देश के मुसलमानों के लिये एक महत्वपूर्ण कार्यालय जरूर काफी महत्वपूर्ण एवं हिन्दुस्तान के मुसलमानों के लिये काफी महत्पूर्ण हो चुका था।....
देश के विभाजन के साथ आयी आजादी के पहले दश्क में तो ईमाम को सत्ता की और सत्ता को ईमाम की खास जरूरत नहीं रही किन्तु इसके बाद देश के मुसलमानों का वोट बैंक के रूप में उपयोग शुरू हो जाने के बाद अनायास ही महत्व मिलना शुरू हो गया ।अब तक किसी भी आम चुनाव के दौरान देश के दूसरे भागों पर जामामस्जिद के ईमाम का कोई असर होता हो या नहीं किन्तु दिल्ली की सीटों के अलावा हांसी,फरीदाबाद,बाल्लभगढ,बुलंदशहर,गाजियाबाद ,बागपत,मेरठ,मुज्जफर नगर आदि की सीटों के मुस्लिम मतदाता शाहीईमाम के रुख को जरूर महत्वदेते हैं।
बहुगुणा
जी ने शुरू करवाया था राजनीति में सीधा दखल
शाहीईमाम
का सबसे पहले खुला राजनैतिक उपयोग स्व जगजीवन राम के नेतृत्व में गठित कांग्रेस फार डैमोक्रेसी (कांफडे)पार्टी
के नेता के रूप में स्व हेमबती नन्दन बहुगुणा ने किया था। स्व श्रीमती इन्दिरा
गांधी के द्वारा देश में लगायी गयी इंमरजेंसी के दौरान देश की बढती आबादी को थामने
के लिये पांच सूत्रीय कार्यक्रम में शामिल ‘नसबंदी’के मुद्दे को मुख्य आधार
बनाया गया ,वैसे तत्कालिक विश्लेषकों के अनुसार शाही ईमाम मौलाना सयैद अहमद
बुखारी की असली नाराजगी की वजह जामामस्जिद का अंतरिम भाग माने जाने वाले
तुर्कमान गेट क्षेत्र में कामर्शियल गतविधियों
कारण बढे हुए अतिक्रमणों और अवैध निर्माणों का बडे पैमाने पर ध्वस्तीकरण कराया
जाना शामिल है।आजादी के बाद से उस समय तक दिल्ली ही नहीं देश के किसी भी मुस्लिम
बहुलक्षेत्र में इतने बडे पैमाने पर तोडफोड की कार्रवाही कभी भी नहीं हुई थी।
उपराष्ट्रपति
बनाये जाने की पेशकश
उपराष्ट्रपति बनते बनते रह
गये थे 12 वें शाही ईमाम
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| 12 वें शाही ईमाम ब्दुल्ला बुखारी |
( Do you have any political ambitions?
None. I am happy where I
am. I do not want to reach a stage where I am folding my hands in front of
everyone and lowering my head before anyone. For 400 years, we have been in the
Masjid. Morarji Desai offered to make my father the vice-president. I got numerous
offers to be made a member of Parliament. But I am happy in the masjid.)
गुजरातियों
की अपेक्षा
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| पूर्व पी एम स्व मोरारजी देसाई |


