टैफिक माह चल रहा है लेकिन दुपहिया वाहन चालक बिना हेलमेट के अपने वाहन को चलाकर ट्रैफिक नियमों का उपहास उड़ा रहे हैं। कितने दुपहिया चालक बिना हेलमेट के चल रहे है और उसमें से कितने पुलिसकर्मी हैं, कितने वाहन चालक चलाते हुए मोबाइल पर बात करते हैं और कितने वाहन चालक ट्रिपलिंग करते हैं, इनका सर्वेक्षण आज ज्ञानोदय संस्थान, नरायन भवन के विद्यार्थियों की तीन टीम ने शहर के अलग अलग हिस्सों किया।
पहली टीम भगवान टाॅकजी चैराहे पर थी, दूसरी टीम नगर निगम तिराहे पर वअंतिम टीम ज्ञानादेय संस्थान के प्रवेश द्वारा
पर ही थी...
पहली टीम भगवान टाॅकजी चैराहे पर थी, दूसरी टीम नगर निगम तिराहे पर वअंतिम टीम ज्ञानादेय संस्थान के प्रवेश द्वारा
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पहली टीम जो भगवान टाॅकीज पर थी, उसके टीम लीडर जितेन्द्र जैन थे उस टीम ने 1:00 बजे से 2:00 बजे तक दुपहिया वाहनों की गिनती जो 1842 थी जिसमें हेलमेट पहने वाहन चालक आश्चर्यजनक रूप से
केवल 192 थे और शेष 1650 चालक बिना हेलमेट के दुपहिया चला रहे थे, अर्थात् कुल 10 प्रतिशत वाहन चालक ही हेलमेट पहने हुए थे, इन दुपहिया वाहन चालकों में 13 वाहन चालक तो मोबाइल बात करते हुए अपना वाहन चला रहे थे और 7
पुलिसकर्मी इस दौरान बिना हेलमेट
सूरसदन चैराहे पर नियुक्त हुई दूसरी टीम ने दोपहर 1:00 बजे से 1:30 बजे तक दुपहिया वाहनों की गिनती की। इस टीम के लीडर अंशुल जैन थे और इनके साथी थे उज्जवल, आयुष, पारश, धनन्जय और आर्जव। 30 मिनट की अवधि में 1201 दुपहिया वाहन निकले जिसमें से बिना हेलमेट वाले दुपहिया वाहन चालक 723 थे और शेष 478 ही हेलमेट पहने हुए. थे। बिना हेलमेट वाले पुलिस कर्मियों की संख्या 8 थी और 12 अधिवक्तागण बिना हेेलमेट के वाहन चला रहे थे, तीन सवारी वाले 30 चालक थे और फोन पर बात करने वाले 27 चालक थे। टीम का यह भी अनुभव रहा कि वहां पर नियुक्त ट्रैफिककर्मी ढीलेढाले थे और ट्रैफिक पर उचित नियंत्रण नहीं कर रहे थे।
तीसरी टीम ने 12:30 बजे से 1:30 बजे तक मोतीलाल नेहरू रोड पर दुपहिया वाहनों का सर्वेक्षण किया इस टीम के टीम लीडर अनुज जैन और इनके साथी-अरिहन्त, आदर्श, अर्चित, सम्यक, पनिमेश और प्रयाग थे। सर्वेक्षण के दौरान कुल वाहनों की संख्या 1242 थी जिसमें हेलमेट पहले वाहन चालक 502 थे और शेष 740 चालक बिना हेलमेट पहने वाहन चला रहे थे। चालक जो वाहन चलाते समय मोबाइल से बात कर रहे थे उनकी संख्या 38 जबकि तीन सवारी वाले चालकों की संख्या 54 थी। सर्वेक्षण में 2 पुलिसकर्मी भी पाये गये जो बिना हेलमेट पहने वाहन चला रहे थे।
शहर के तीन हिस्सों में किये गये इस सर्वेक्षण के आधार पर ज्ञानोदय संस्थान के छात्रों ने नतीजा निकाला कि भगवान टाॅकजी चैराहे पर हर 10 दुपहिया वाहन चालकों में से 9 चालक बिना हेलमेट के थे जबकि सूरसदन चैराहे पर 10 वाहन चालकों में 6 बिना हेलमेट के चल रहे थे, इस परिप्रेक्ष्य में ज्ञानोदय संस्थान ने मांग की कि हेलमेट लगाने में ट्रैफिक पुलिस की सख्ती बरतनी होगी, पिछले अनेक सालों से जागरूकता अभियान चल रहे हैं, मुफ्त में हेलमेट भी संस्थाओं ने वितरित किये लेकिन स्थिति लगभग जस की तस है, यह ट्रैफिक माह का मजाक है कि इतनी बड़ी तादात में लोग बिना हेलमेट के सड़कों पर निडर चल रहे हैं, चलते हुए मोबाइल से भी बात कर रहे हैं, संस्थान ने शहर वासियों से अपील की कि उन्हें इसको गंभीरता से लेना चाहिए क्योंकि आगरा शहर भारत के पहले दो तीन शहरों में आता है जहां सड़क दुर्घटनाओं में सबसे अधिक लोगों की मृत्यु होती है जैसा कि आई.आई.टी दिल्ली ने अपने रिपोर्ट में अभी हाल में प्रस्तुत किया है। इस सर्वेक्षण की माॅनिटरिंग ज्ञानोदय संस्थान के समन्वयक के.सी. जैन द्वारा की गयी।
