2 अक्टूबर 2014

कृष्णा चन्द्र सहाय को स्‍वतंत्रता सेनानी का दर्जा


-- लोहि‍यावादी के रूप में गोवा मुक्‍ति‍ आंदालन में साहय की थी सक्रि‍य भागीदारी

--राजस्‍थान सरकार से सम्‍मनि‍त सहाय का यूपी के समाजवादी करेगे अभि‍नन्‍दन

गोवा आंदोलन कारि‍यों को नि‍यंत्रि‍त करते पुर्तगाली  पुलि‍स कर्मी
आगरा, 2अक्‍टूबर: आगरा को कर्मभूमि‍ मानकर जीवन के छै दशक गांधीवादी दर्शन को समर्पि‍त करने वाले श्री कृष्‍ण चन्‍द्र सहाय के द्वारा गोवा को पुर्तगाली दास्‍ता से मुक्‍त कराने के संघर्ष को चऊनवें साल में मान्‍यता देकर राजस्‍थान सरकार ने स्‍वतंत्रता सेनानीका दर्जा प्रदान कि‍या है।वर्तमान में श्री सहाय जयपुर में अपनी पुत्री श्रीमती मधु के साथ रह रहे हैं।सहाये को स्‍वतंत्रता सेनानी के रूप में अब 24हजार रुपये हरमहीने पेंशन मि‍लेगी,अगस्‍त 2014 से अब तक का एरि‍यर के रूप में भुगतान भी मि‍लेगा।
सहाये को गोवा मुक्‍ति‍  आंदलना का सेनानी मान लि‍ये जाने की जानकरी सोशल एक्‍टि‍वि‍ट श्री हरीश सक्‍सेना चि‍मटीने श्री चि‍त्रगुप्‍त परि‍षद  के द्वारा नागरी प्रचारि‍णी सभागार में गांधी-शास्‍त्रजयंती पर आयोजि‍त कार्यक्रम को सम्‍बोधि‍त करते हुए दी।उन्‍होंने कहा कि‍ उप्र सरकार ने गोवा आंदोलन में भले ही उनके योगदान को नजर अंदाज कर दि‍या हो कि‍न्‍तु आगरा वासी और राज्‍य के सामजवादी लखनऊ या आगरा में शीघ्र ही उनका नागरि‍क अभि‍नन्‍दन जरूर करेंगे। सभागार में उपस्‍थि‍तों ने करताल ध्‍वनि‍ से जानकारी का स्‍वागत करते हुए गांधी जयंती की सबे महत्‍वपूर्ण सूचना करार दि‍या।

गांधी ने लोहि‍याजी की थी प्रशंसा

उल्‍लेखनीय हे कि‍  गांधी जी खुद तो अंग्रेजो के खि‍लाफ लडाई में लडने में रही व्‍यस्‍तता के कारण गोवा के बारे में कुछ नही कर सके कि‍न्‍तु जब उन्‍हे मालूम  हुआ कि‍ डा लोहि‍या अपने समाजादी साथि‍यों के साथ गोवा की सीमा में पहुंच कर अहि‍सा के रास्‍ते गोवा को पुर्तगाल से आजाद करवाने के लि‍ये सक्रि‍या हो चुके  हैं तो उनकी प्रशंसा कि‍ये बि‍ना नहीं रह सके। दीर्घकालीन जेल में नि‍रुद्ध रखने के बाद 11अप्रैल 1946 को डा लोहिया को आगरा सेंट्रल  जेल से रिहा कर दिया गया। 15 जून को लोहिया पंजि‍म पहुंच गये और वहां उन्‍होंने  गोवा मुक्‍ति‍ आंदोलन की पहली सभा ली।इस पर लोहि‍या को 18जून को आंदोलन के पहले ही दि‍न 18 जून को गि‍रु्द्ध  कर लि‍या गया।  14 अगस्त 1946 को 'हरिजन' में गांधी जी ने लिखा कि, लोहिया को बधाई दी जानी चाहिए।

असली लोहि‍या वादी

श्री कृषण चन्‍द सहाये डा राम मनोहर लोहि‍या के उन पुराने कर्मठ कार्यकत्‍तओं में से रहे हैं जि‍न्‍होंने अपने नेता का हरकदम पर साथ देते हुए कि‍शोर से जवान हुए और समाजवाद गांधीवाद की अलख जगाते हुए जि‍दगी के सात दशक पूरे कर आठवे में प्रवेश कर गये।समाजवादी आंदोलनों के अलाव श्री सहाय का चम्‍बल घाटी शांति‍ मि‍शन के कार्यकर्त्‍ता के रूप में खा योगदान रहा है।दस्‍युओं के व जयप्रकाश नारायण और बि‍नोवा जी के द्वारा करवाये गये आत्‍म समर्पणों में उनकी सक्रि‍य भूमि‍का रही थी।सार्वोदय नेता महावीर भाई , सुब्‍बाराव और समाजवादी पार्टी के राष्‍ट्रीय महामंत्री पूर्व केन्‍द्रीय मंत्री रामजीलाल सुमन के साथ उनकी काफी नि‍कटता रही।गांधी पीस फाऊंडेशन की आगरा इकाई गांधी‍ शांति‍ प्रति‍ष्‍ठानके सचि‍व के रूप में  आगरा के जनजीवन में उनकी अति‍ सक्रि‍य भूमि‍का रही।जातीय और सांप्रदायि‍क सदभाना जब भी कही प्रभावि‍त होती तो जब तक सामान्‍य नहीं हो जाती तब तक वह लगातर प्रयत्‍नशील बने रहते।

भारी मन सं छोडा था आगरा

श्री सहाये भारी मन से आगरा छोडने को वि‍वश हुए थे ।गांधी शांति‍ प्रति‍ष्‍ठान के सचि‍व का कार्यकाल पूरा हो जाने के बाद कुछ साल तो आंतरि‍क रूप से भारी आर्थि‍क संकट से जूझते हुए बि‍ता गये कि‍न्‍तु में अंतत:आगरा छोडना ही पडा।
पूर्व वि‍धायक बालोजी अग्राल भी थे गोवा के आंदालनकारी
श्री सहाये को इस बात की हमेशा टीस रही है कि‍ उ प्र सरकार अपने नि‍वासि‍यों के गोवा मुक्‍ति‍ आंदोलन में योगदान को क्‍यो महत्‍व नहीं दे सकी।जबकि‍ इस आंदालन के नि‍र्णायक दौर के कर्त्‍ता धरता डा लोहि‍या मूल रूप से यू पी के ही थे। श्री सहायके अलावा आगरा के समाजवादी नेता पूर्व वि‍धायक स्‍व बालोजी अग्रवाल भी आगरा के ही दूसरे गोवा मुक्‍ति‍ के आदोलनकारी थे। उनका भी श्री सहाय की तरह ही पुर्तगाली सेना ने गोलि‍यों की बौछार से गोवा में सगत कि‍याथा और बाद में पकड कर महीनों पंजि‍म कीजेल में बन्‍दी रखा।आजादी की पचासवीं जायेती के अवसर पर दोनों ही स्‍वतंत्रता सेनानि‍यों को गोवा सरकार के द्वारा राजकीय आति‍थि‍ के रूप में सपि‍रवार गोवा आमंत्रि‍त कि‍या गया था।