--मैनपुरी लोकसभा सीट के उपचुनाव
में तेजप्रताप यादव ने भाजपा के प्रेम सिह शाक्य को 3.21लाख
आगरा,भारतीय जनता पार्टी को मैनुपरी लोकसभाई सीट सहित उ प्र में सहयोगी दल की एक सीट सहित सात विधान सभाई सीटो पर उप चुनावों में करारी शिकस्त का सामना करना पडा है।इसके कई कारण है किन्तु इनमें सबसे अहम है प्रदेश भर में फैले हुए पार्टी कार्यकर्त्ता तंत्र पर वरिष्ठ नेताओं का लगातार
हावी होते जाना। पार्टी में महत्वपूर्ण पदों पर पदासीन अधिकांश ऐसे नेता है जो कर्मशून्य होने के साथ ही केन्द्र में पार्टी की सरकार बनने के बाद से विवाद
विस्तारक की भूमिका में रहे हैं।पार्टी सांसदों की तो भूमिका ही अपने क्षेत्र
की उन समस्याओं से भी पलायनवादी की सी हो गयी है जो कि मोदी लहर के बावजूद लोकसभा के
लिये लडी जंग में संघर्ष का एक महत्वपूर्ण अाधार रही थीं।
मैनुपरी आगरा मंडल की पांच लोकसभाई सीटों में से राजनैतिक दृष्टि से सबसे महत्वपूर्ण सीट मानी जाती है।अब आगरा के मामले को ही लें ,महानगर की पेयजल समस्या समाधान के लिये बैराज बनायी जानी थी बन रही है ताजमहल के पिछवाडे को जलमग्न रखने के लिये।हाईकोर्ट बैंच के मामले से भाजपा और सपा दोनों के ही बडे नेता मुंह छुपाते घूम रहे हैं।मंडल के फीरोजाबाद और मैनपुरी जनपदों में जहां सपा के प्रभावशाली नेताओं की निरंतर मौजूदगी बनी हुई रहती है।वहीं मथुरा जनपद की सांसद का तो जनता छोडिये पार्टी जनों तक से सीधा संवाद अब तक संभव नहीं हो सका है।
आगरा के सांसद राम शंकर कठैरिया की मौजूदगी बनी जरूर रहती है किन्तु क्षेत्र की बात तो बाद की है पार्टी हित तक में उनकी सार्थकता अब तक साबित नहीं हो सकी है।पेयजल,बिजली और विश्वविद्यालय से जुडी समस्याओं के दूरकरने में अब तक उनकी भूमिका के सकारात्मक परिणामों से जनता ना वाफिक है। यही नहीं बाईपास रोड के सिक्स लेन करने के प्लान को उनके द्वारा न तो रिलाइंस कंपनी से ही और नहीं एन एच ए वालों से स्पष्ट कराया जा सका है।जिससे कम से कम उनलोगों को तो वस्तुस्थति स्पष्ट हो सके जिनके काम धंधे इस तोडफोड का शिकार होने हैं।अनुमान है कि लगभग चार हजार प्रतिष्ठानों का कामकाज प्रभावित होगा।अगर सर्विस रोड बनती है तो तोडफोड की जद में और भी ज्यादा क्षेत्र आयेगा ।सांसद की आत्मकेन्द्रित नेतागीरी उन्हीं की पार्टी यानि 'भाजपा 'के ही विधायक जगन प्रसाद गर्ग की लोकप्रियता का ग्राफ प्रभावित होने की ज्यादा संभाना है।क्योकि बाईपास रोड पर होने वाली अधिकाश तोडफोड विधायकजी के ही कर्म एंव निर्वाचन
आगरा के सांसद राम शंकर कठैरिया की मौजूदगी बनी जरूर रहती है किन्तु क्षेत्र की बात तो बाद की है पार्टी हित तक में उनकी सार्थकता अब तक साबित नहीं हो सकी है।पेयजल,बिजली और विश्वविद्यालय से जुडी समस्याओं के दूरकरने में अब तक उनकी भूमिका के सकारात्मक परिणामों से जनता ना वाफिक है। यही नहीं बाईपास रोड के सिक्स लेन करने के प्लान को उनके द्वारा न तो रिलाइंस कंपनी से ही और नहीं एन एच ए वालों से स्पष्ट कराया जा सका है।जिससे कम से कम उनलोगों को तो वस्तुस्थति स्पष्ट हो सके जिनके काम धंधे इस तोडफोड का शिकार होने हैं।अनुमान है कि लगभग चार हजार प्रतिष्ठानों का कामकाज प्रभावित होगा।अगर सर्विस रोड बनती है तो तोडफोड की जद में और भी ज्यादा क्षेत्र आयेगा ।सांसद की आत्मकेन्द्रित नेतागीरी उन्हीं की पार्टी यानि 'भाजपा 'के ही विधायक जगन प्रसाद गर्ग की लोकप्रियता का ग्राफ प्रभावित होने की ज्यादा संभाना है।क्योकि बाईपास रोड पर होने वाली अधिकाश तोडफोड विधायकजी के ही कर्म एंव निर्वाचन
में ही होनीहै।जानकारी के अभाव में प्रभावित होने जा रहे लोगों को मुआबाजा दिये जाने जैसी सामान्य मांग तक नहीं उठा पा रहे हैं।वैसे हार के फलस्वरूप यू पी की भाजपा इकाई में भारी बदलाव आने की संभावना है।भाजपाई चाहते है कि भले ही जनता के अच्छे दिन न भी ला सकें तो कम से कम पार्टी के बुरे दिन तो शुरू न हो जायें।
तेज प्रताप यादव की जीत
तेज प्रताप यादव आशाओं के अनुरूप मैनपुरी लोकसभा सीट से चुनाव जीत गये।उन्होंने अपने प्रतिद्वन्दी प्रेम सिह शाक्य को 3.21लाख मतो से हराया। आगरा मंडल की राजनीति की दृष्ट से यह जीत काफी महत्वपूर्ण मानी जा सकती है,इसी से लगी हुई फीरोजाबाद लोकसभाई सीट से नव निर्वाचित सांसद के भाई अक्षय यादव सांसद हैं।माना जा रहा था कि परिवारवाद के आरोपों के लगते रहने से मैनपुरी की सीट पर इस बार कांटे संघर्ष होगा किन्तु मीडिया प्रचार के अलावा जमीन पर औपचारिक राजनैतिक लडाई भी संभ नहीं हो सकी।
11विधानसभा सीटों में से 8सपा के खाते में
रोहनिया,ठाकुर खास,बिजनौर,सिराथू,हमीरपुर,चरखारी,निघासन आदि सीटें समाजवादी पार्टी सपा ने छीन ली। जबकि सहारनपुर,लखनऊ और नोयडा में भाजपा अपना कब्जा बरकरार रखने मे कामयाब रही ।
